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संशोधित खबर
Updated Mon, 11 Sep 2017 01:31 AM IST
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इरमा से बचने को अमेरिका में भटक रहे लाड़ले
चिंता में घरवाले, फोन पर अपनों से बात कर ले रहे पल-पल की जानकारी
प्रभावित क्षेत्र से तो निकल गए, लेकिन नहीं मिल रहा सुरक्षित ठिकाना, होटल फुल
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। अमेरिका में आए इरमा तूफान की धमक हजारों मील तक सुनाई दे रही है। वहां तूफान प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को हटा दिया गया है। हालात ये है कि एक से दो हजार किलोमीटर के दूर भी होटल पूरी तरह भरे हुए हैं। कुछ ने अपने परिचितों के यहां शरण ली तो कुछ अभी सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। यहां उनके परिवारीजन चिंता में घिरे हुए हैं और फोन कर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
फ्लोरिड़ा, मियामी ,टैंपा और कैरिबियाई द्वीप सेंट मार्टिन से तूफान के खतरे को देखते हुए लाखों लोगों ने इन शहरों को खाली कर दिया है। ये सुरक्षित स्थानों पर पंहुच गए हैं। बिजनौर निवासी इंजीनियर अंशुल कुमार का हाल ही में मियामिंसबर्ग ओहायो से लगभग 1500 किलोमीटर दूर टैंपा में ट्रांसफर हुआ था। 28 अगस्त को कार्यभार ग्रहण किया था। परिवार सहित अभी मकान में ढंग से शिफ्ट भी नहीं हुए थे कि वहां के प्रशासन और कंपनी के आदेश के कारण उन्हें शहर छोड़ना पड़ा। वे दो दिन अटलांटा अपने एक मित्र के यहां रुके, उसके बाद दस घंटे की ड्राइव कर मियामिंसबर्ग आ गए। उन्होंने बताया कि ओहायो तक के सारे होटल भरें हैं। मजबूरन उन्हें यहां आना पड़ा। यहां काफी मित्र और साथी हैं। तूफान के गुजरने तक वे यहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि सामान घर में बिना लगाए ही टैंपा छोड़कर चले आए हैं। अब हालात सामन्य होकर जाकर देंखेंगे कि क्या हालात है।
उधर आज सवेरे सवा नौ बजे मूल रूप से झालू की रहने वाली और फलोरिड़ा में जा बसी सपना गुप्ता ने बताया कि तूफान शुरू हो गया है। उसका रुख बदलने के कारण हवा और बारिश का प्रवाह कम है, फिर भी बारिश और हवा काफी तेज है। बिजली है, लेकिन घर से निकलना बहुत ही खतरनाक है। आज पूूरे दिन ऐसा ही रहेगा।
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चिंता में घरवाले, फोन पर अपनों से बात कर ले रहे पल-पल की जानकारी
प्रभावित क्षेत्र से तो निकल गए, लेकिन नहीं मिल रहा सुरक्षित ठिकाना, होटल फुल
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। अमेरिका में आए इरमा तूफान की धमक हजारों मील तक सुनाई दे रही है। वहां तूफान प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को हटा दिया गया है। हालात ये है कि एक से दो हजार किलोमीटर के दूर भी होटल पूरी तरह भरे हुए हैं। कुछ ने अपने परिचितों के यहां शरण ली तो कुछ अभी सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। यहां उनके परिवारीजन चिंता में घिरे हुए हैं और फोन कर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
फ्लोरिड़ा, मियामी ,टैंपा और कैरिबियाई द्वीप सेंट मार्टिन से तूफान के खतरे को देखते हुए लाखों लोगों ने इन शहरों को खाली कर दिया है। ये सुरक्षित स्थानों पर पंहुच गए हैं। बिजनौर निवासी इंजीनियर अंशुल कुमार का हाल ही में मियामिंसबर्ग ओहायो से लगभग 1500 किलोमीटर दूर टैंपा में ट्रांसफर हुआ था। 28 अगस्त को कार्यभार ग्रहण किया था। परिवार सहित अभी मकान में ढंग से शिफ्ट भी नहीं हुए थे कि वहां के प्रशासन और कंपनी के आदेश के कारण उन्हें शहर छोड़ना पड़ा। वे दो दिन अटलांटा अपने एक मित्र के यहां रुके, उसके बाद दस घंटे की ड्राइव कर मियामिंसबर्ग आ गए। उन्होंने बताया कि ओहायो तक के सारे होटल भरें हैं। मजबूरन उन्हें यहां आना पड़ा। यहां काफी मित्र और साथी हैं। तूफान के गुजरने तक वे यहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि सामान घर में बिना लगाए ही टैंपा छोड़कर चले आए हैं। अब हालात सामन्य होकर जाकर देंखेंगे कि क्या हालात है।
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उधर आज सवेरे सवा नौ बजे मूल रूप से झालू की रहने वाली और फलोरिड़ा में जा बसी सपना गुप्ता ने बताया कि तूफान शुरू हो गया है। उसका रुख बदलने के कारण हवा और बारिश का प्रवाह कम है, फिर भी बारिश और हवा काफी तेज है। बिजली है, लेकिन घर से निकलना बहुत ही खतरनाक है। आज पूूरे दिन ऐसा ही रहेगा।
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