{"_id":"5c672898bdec2211d240c5c0","slug":"11550264472-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने का आह्वान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने का आह्वान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने का आह्वान
सरूरपुर। जनता इंटर कॉलेज कल्याणपुर में महान विचारक एवं समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें उनके जीवन दर्शन को छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने संभाषण, गीतों एवं नाटकों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रधानाचार्य डॉ. जय भगवान सिंह ने कहा कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर कुशल बुद्धि बालक ने किशोरावस्था में वेद-उपनिषद का चिंतन, मनन एवं अध्ययन किया। प्रेरणा के जागरण से वह घर से निकल गए और भारत भ्रमण करते हुए समस्त धार्मिक ग्रंथों में व्याप्त पाखंडों के उन्मूलन में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। योग, कुश्ती में महारथ हासिल करने वाले आचार्य विरजानंद ने उत्तराधिकारी आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सत्यार्थ प्रकाश के रचयिता, महान कर्म योगी ने भारतीय समाज को वेदों की ओर लौटो का संदेश दिया। इन्होंने समाज में व्याप्त नारी अशिक्षा, सती प्रथा, छुआछूत, मूर्ति पूजा का विरोध किया। साथ ही समाज में नारी शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, समानता व सेवा को सर्वोपरि धर्म बताया। स्वामी सत्य का ज्ञान, दया ,परोपकार एवं गौ सेवा में हिंदू मुस्लिम एकता के पक्षधर थे। गोष्ठी का संचालन मुकेश कुमार ने किया।
सरूरपुर। जनता इंटर कॉलेज कल्याणपुर में महान विचारक एवं समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें उनके जीवन दर्शन को छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने संभाषण, गीतों एवं नाटकों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रधानाचार्य डॉ. जय भगवान सिंह ने कहा कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर कुशल बुद्धि बालक ने किशोरावस्था में वेद-उपनिषद का चिंतन, मनन एवं अध्ययन किया। प्रेरणा के जागरण से वह घर से निकल गए और भारत भ्रमण करते हुए समस्त धार्मिक ग्रंथों में व्याप्त पाखंडों के उन्मूलन में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। योग, कुश्ती में महारथ हासिल करने वाले आचार्य विरजानंद ने उत्तराधिकारी आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सत्यार्थ प्रकाश के रचयिता, महान कर्म योगी ने भारतीय समाज को वेदों की ओर लौटो का संदेश दिया। इन्होंने समाज में व्याप्त नारी अशिक्षा, सती प्रथा, छुआछूत, मूर्ति पूजा का विरोध किया। साथ ही समाज में नारी शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, समानता व सेवा को सर्वोपरि धर्म बताया। स्वामी सत्य का ज्ञान, दया ,परोपकार एवं गौ सेवा में हिंदू मुस्लिम एकता के पक्षधर थे। गोष्ठी का संचालन मुकेश कुमार ने किया।
विज्ञापन