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आरोपियों के खिलाफ सरकार लेगी जल्द फैसला : डिप्टी सीएम
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:32 AM IST
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि के पूर्व कुलपति और वर्तमान कुलपति समेत 13 अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अनुमोदन मांगा गया है। इस मामले में शासन भी गंभीर दिख रहा है। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय आए डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने इसको लेकर कहा कि इस मसले में जल्द न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी। आरोपी चाहे जो भी हों। वहीं, इस मामले में एक आरोपी द्वारा जनवरी महीने में हाईकोर्ट में रिट डाले जाने पर कोर्ट ने भी तीन महीने में विवेचना पूरी करने के आदेश दिए थे।
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर मेरठ ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में तत्कालीन वीसी प्रो. एसके काक, तत्कालीन कुलसचिव वीके सिन्हा, तत्कालीन कुलसचिव प्रभात रंजन, तत्कालीन उप कुलसचिव प्रशासन नारायण प्रसाद, तत्कालीन कुलसचिव प्रशासन रामकुमार, तत्कालीन सहायक लेखा अधीक्षक हरवंश लाल, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अरविंद कुमार, प्रभारी सामान्य एसएस शर्मा, पीए शिव कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार, तत्कालीन प्रवक्ता अर्थशास्त्र प्रो. एनके तनेजा वर्तमान में कुलपति, प्रवक्ता डॉॅ. शिखा चतुर्वेदी, रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट के सचिव अमित गिरि के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है।
इस मामले की गूंज बृहस्पतिवार को लखनऊ तक रही। हालांकि कैंपस आए डिप्टी सीएम से जब इसको लेकर पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अभी ये प्रकरण पूरी तरह से उनकी जानकारी में नहीं है। उनके सामने जैसे ही इसकी फाइल आएगी, वे इस पर उचित कार्रवाई कराएंगे। वहीं, 25 जुलाई को शासन में एक अहम बैठक होने जा रही है। इसमें कई विश्वविद्यालयों के प्रकरण रखे जाने हैं। ऐसे में ये प्रकरण भी बैठक में उठ सकता है।
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जनवरी में दिए थे हाईकोर्ट ने आदेश
इस प्रकरण में एक आरोपी ने हाईकोर्ट में पिटीशन डाली थी। इसमें गिरफ्तारी पर स्टे मांगा था। जिस पर हाईकोर्ट ने 25 जनवरी 2018 को इस संबंध में स्पष्ट आदेश दिए थे कि इस मामले में आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा। साथ ही जांच एजेंसी से आर्डर की कॉपी मिलने के बाद तीन महीने में विवेचना पूरी करने के आदेश दिए थे।
ये है मामला
विजिलेंस मेरठ सेक्टर की तरफ से 06 दिसंबर 2017 को मेडिकल थाने में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप थे कि कुलपति प्रो. एसके काक ने पद पर रहते हुए आपसी हित लाभ देखकर कर्मचारियों की नियुक्तियां कीं। 22 कॉलेजों को गलत तरीके से संस्तुति दी। रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मामले में सत्र 2009-10 के लिए 100 सीटों की मंजूरी बिना भवन के दी। इन तमाम मामलों में वर्तमान कुलपति प्रो. एनके तनेजा समेत 13 अफसरों-कर्मचारियों पर आरोप थे।
गिरफ्तारी की पावर
विजिलेंस की तरफ से गृह सचिव के यहां से आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अनुमोदन मांगने के बाद सचिव न्याय विभाग से फैसला लिया जाएगा। शासन से अनुमोदन का अधिकतम समय चार महीने है। अगर चार महीने बाद भी शासन की तरफ कोई जवाब नहीं आता है तो सुप्रीमकोर्ट के एक केस में दिए गए आदेशों के परिप्रेक्ष्य में इसे आरोप पत्र दाखिल करने की संस्तुति ही मान लिया जाएगा। ऐसे मेें विजिलेंस को गिरफ्तारी की पावर भी मिल जाएगी।
खास बातें:
- सीसीएसयू प्रकरण में शासन गंभीर, जल्द लिया जा सकता है फैसला
- हाईकोर्ट ने भी दिए थे तीन महीने में विवेचना पूरी करने के आदेश
- विजिलेंस ने आरोप पत्र दाखिल करने के लिए शासन से मांगी है अनुमति
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उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर मेरठ ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में तत्कालीन वीसी प्रो. एसके काक, तत्कालीन कुलसचिव वीके सिन्हा, तत्कालीन कुलसचिव प्रभात रंजन, तत्कालीन उप कुलसचिव प्रशासन नारायण प्रसाद, तत्कालीन कुलसचिव प्रशासन रामकुमार, तत्कालीन सहायक लेखा अधीक्षक हरवंश लाल, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अरविंद कुमार, प्रभारी सामान्य एसएस शर्मा, पीए शिव कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार, तत्कालीन प्रवक्ता अर्थशास्त्र प्रो. एनके तनेजा वर्तमान में कुलपति, प्रवक्ता डॉॅ. शिखा चतुर्वेदी, रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट के सचिव अमित गिरि के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है।
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इस मामले की गूंज बृहस्पतिवार को लखनऊ तक रही। हालांकि कैंपस आए डिप्टी सीएम से जब इसको लेकर पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अभी ये प्रकरण पूरी तरह से उनकी जानकारी में नहीं है। उनके सामने जैसे ही इसकी फाइल आएगी, वे इस पर उचित कार्रवाई कराएंगे। वहीं, 25 जुलाई को शासन में एक अहम बैठक होने जा रही है। इसमें कई विश्वविद्यालयों के प्रकरण रखे जाने हैं। ऐसे में ये प्रकरण भी बैठक में उठ सकता है।
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जनवरी में दिए थे हाईकोर्ट ने आदेश
इस प्रकरण में एक आरोपी ने हाईकोर्ट में पिटीशन डाली थी। इसमें गिरफ्तारी पर स्टे मांगा था। जिस पर हाईकोर्ट ने 25 जनवरी 2018 को इस संबंध में स्पष्ट आदेश दिए थे कि इस मामले में आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा। साथ ही जांच एजेंसी से आर्डर की कॉपी मिलने के बाद तीन महीने में विवेचना पूरी करने के आदेश दिए थे।
ये है मामला
विजिलेंस मेरठ सेक्टर की तरफ से 06 दिसंबर 2017 को मेडिकल थाने में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप थे कि कुलपति प्रो. एसके काक ने पद पर रहते हुए आपसी हित लाभ देखकर कर्मचारियों की नियुक्तियां कीं। 22 कॉलेजों को गलत तरीके से संस्तुति दी। रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मामले में सत्र 2009-10 के लिए 100 सीटों की मंजूरी बिना भवन के दी। इन तमाम मामलों में वर्तमान कुलपति प्रो. एनके तनेजा समेत 13 अफसरों-कर्मचारियों पर आरोप थे।
गिरफ्तारी की पावर
विजिलेंस की तरफ से गृह सचिव के यहां से आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अनुमोदन मांगने के बाद सचिव न्याय विभाग से फैसला लिया जाएगा। शासन से अनुमोदन का अधिकतम समय चार महीने है। अगर चार महीने बाद भी शासन की तरफ कोई जवाब नहीं आता है तो सुप्रीमकोर्ट के एक केस में दिए गए आदेशों के परिप्रेक्ष्य में इसे आरोप पत्र दाखिल करने की संस्तुति ही मान लिया जाएगा। ऐसे मेें विजिलेंस को गिरफ्तारी की पावर भी मिल जाएगी।
खास बातें:
- सीसीएसयू प्रकरण में शासन गंभीर, जल्द लिया जा सकता है फैसला
- हाईकोर्ट ने भी दिए थे तीन महीने में विवेचना पूरी करने के आदेश
- विजिलेंस ने आरोप पत्र दाखिल करने के लिए शासन से मांगी है अनुमति