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मनोविज्ञान
Updated Sun, 10 Dec 2017 02:34 AM IST
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समाज मनोविज्ञान में शोध अत्यंत जटिल
मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि के मनोविज्ञान विभाग में कार्यशाला के दूसरे दिन मनोविज्ञान पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इसमें आईसीएसएसआर मेंबर सेक्रेटरी प्रो. वीके मल्होत्रा ने कहा कि समाज मनोविज्ञान में विज्ञान की अपेक्षा होने वाले शोध अत्यंत जटिल इसलिए होते हैं क्योेंकि हमें उनमें समाज एवं मानव व्यवहार का अध्ययन करना होता है। उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध की भांति सदैव तीसरा रास्ता जो भी समाज कल्याण की ओर जाता है को चुनना चाहिए। उसके द्वारा ही समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम स्वयं की कमियों को स्वीकार कर अपना मूल्यांकन करते हैं एवं समाज के सामने स्वयं को खुले रूप में प्रस्तुत करते हैं तभी सत्य परिभाषित होता है। चौ. चरण सिंह विवि के वीसी प्रो. एचएस सिंह रहे। प्रो. वीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. अल्पना अग्रवाल, यशिका वर्मा, प्रो. पीके शर्मा, डॉ. शिवराज सिंह, पूजा मलिक, चित्रा, मीना और मुकेश आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि के मनोविज्ञान विभाग में कार्यशाला के दूसरे दिन मनोविज्ञान पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इसमें आईसीएसएसआर मेंबर सेक्रेटरी प्रो. वीके मल्होत्रा ने कहा कि समाज मनोविज्ञान में विज्ञान की अपेक्षा होने वाले शोध अत्यंत जटिल इसलिए होते हैं क्योेंकि हमें उनमें समाज एवं मानव व्यवहार का अध्ययन करना होता है। उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध की भांति सदैव तीसरा रास्ता जो भी समाज कल्याण की ओर जाता है को चुनना चाहिए। उसके द्वारा ही समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम स्वयं की कमियों को स्वीकार कर अपना मूल्यांकन करते हैं एवं समाज के सामने स्वयं को खुले रूप में प्रस्तुत करते हैं तभी सत्य परिभाषित होता है। चौ. चरण सिंह विवि के वीसी प्रो. एचएस सिंह रहे। प्रो. वीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. अल्पना अग्रवाल, यशिका वर्मा, प्रो. पीके शर्मा, डॉ. शिवराज सिंह, पूजा मलिक, चित्रा, मीना और मुकेश आदि मौजूद रहे।