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चुनाव निपटा, अब चलेगा भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान
Updated Fri, 24 Nov 2017 08:22 PM IST
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मेरठ।
नगर निगम चुनाव के चलते जनपद में भूमाफिया के साथ अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान थम गया था। प्रशासनिक हलके में चर्चा थी कि भाजपा के दबाव में शासन स्तर से चुनाव के मद्देनजर कार्रवाई स्थगित करने का इशारा हुआ था। अब चुनाव निपटने के साथ फिर से फाइलों को खंगालने की कार्रवाई शुरू हो गई है। ऐसे में शीघ्र ही अभियान शुरू होने उम्मीद की जा रही है।
जनपद में भूमाफिया और अवैध निर्माणों को चिह्नित किया गया परंतु कुछ पर कार्रवाई को छोड़ बाकी जांच में अटके हैं। जिन अधिकारियों को जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माणों की जांच सौंपी गई थी, वेे स्थानीय निकाय चुनाव में व्यस्त हो गए। जिन मामलों की जांच पूरी हो चुकी थी, उन पर भी चुनाव के कारण कार्रवाई रोक दी थी। चुनाव निपटते ही फिर से सारे मामले अफसरों की मेज पर आने शुरू हो गए हैं।
ये हैं मुख्य लंबित मामले
एनएच-58 स्थित एक कॉलेज में सरकारी जमीन पर कब्जे की जांच लगभग पूरी होकर कार्रवाई के इंतजार में है। वहीं, एक कॉलोनी में चारागाह कब्जाने पर कार्रवाई अधर में है। इसके अतिरिक्त शहर के भीतर गुलमर्ग सिनेमा के निकट स्थित एक होटल नजूल की जमीन पर बना है। उसकी जांच भी अटकी है। ऐसे में उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। शहर के तमाम अवैध निर्माण ऐसे हैं, जिन पर मंडलायुक्त की नजर है। स्थानीय निकाय चुनाव के चलते उन पर कार्रवाई रुकी थी। ऐसे तमाम मामलों पर अब कार्रवाई तय होगी।
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होटल पर हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
गुलमर्ग के निकट स्थित होटल नजूल की भूमि पर है। इसका खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसकी जांच मंडलायुक्त ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंपी हुई है। इस मामले में तहसील की रिपोर्ट को लेकर उस समय खेल शुरू हुआ था। जिसमें होटल मालिक ने तहसील के एक लेखपाल और कानूनगो से मिलकर रिपोर्ट में नजूल का रिकार्ड नहीं होने की साठगांठ की थी। हालांकि कलक्ट्रेट में मौजूद नजूल के रिकार्ड में यह जमीन दर्ज है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक तरफ जहां होटल पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जल्दी तय होगी। वहीं, तहसील कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
वन विभाग की जमीन भी होगी मुक्त
खादर क्षेत्र में वन विभाग की करीब 700 बीघा जमीन पर भूमाफिया का कब्जा है। उन्होंने फर्जी आदेश के जरिए जमीन अपने नाम करा ली थी। हालांकि सरकारी अभिलेखों में ऐसे आदेश की प्रति कहीं नहीं मिली। इस मामले की भी जांच पूरी हो चुकी है। अब जिला प्रशासन वन विभाग को इस जमीन पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई तय करेगा।
मुख्य बातें
बाईपास स्थित एक कालेज, चारागाह की जमीन, गुलमर्ग सिनेमा के निकट स्थित होटल और ग्रीन बेल्ट पर निर्माण के खिलाफ चलेगा अभियान
नगर निकाय चुनाव के चलते रोक दिया गया था अभियान
अब लंबित सभी जांच पूरी कर तेजी से होगा एक्शन
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नगर निगम चुनाव के चलते जनपद में भूमाफिया के साथ अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान थम गया था। प्रशासनिक हलके में चर्चा थी कि भाजपा के दबाव में शासन स्तर से चुनाव के मद्देनजर कार्रवाई स्थगित करने का इशारा हुआ था। अब चुनाव निपटने के साथ फिर से फाइलों को खंगालने की कार्रवाई शुरू हो गई है। ऐसे में शीघ्र ही अभियान शुरू होने उम्मीद की जा रही है।
जनपद में भूमाफिया और अवैध निर्माणों को चिह्नित किया गया परंतु कुछ पर कार्रवाई को छोड़ बाकी जांच में अटके हैं। जिन अधिकारियों को जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माणों की जांच सौंपी गई थी, वेे स्थानीय निकाय चुनाव में व्यस्त हो गए। जिन मामलों की जांच पूरी हो चुकी थी, उन पर भी चुनाव के कारण कार्रवाई रोक दी थी। चुनाव निपटते ही फिर से सारे मामले अफसरों की मेज पर आने शुरू हो गए हैं।
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ये हैं मुख्य लंबित मामले
एनएच-58 स्थित एक कॉलेज में सरकारी जमीन पर कब्जे की जांच लगभग पूरी होकर कार्रवाई के इंतजार में है। वहीं, एक कॉलोनी में चारागाह कब्जाने पर कार्रवाई अधर में है। इसके अतिरिक्त शहर के भीतर गुलमर्ग सिनेमा के निकट स्थित एक होटल नजूल की जमीन पर बना है। उसकी जांच भी अटकी है। ऐसे में उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। शहर के तमाम अवैध निर्माण ऐसे हैं, जिन पर मंडलायुक्त की नजर है। स्थानीय निकाय चुनाव के चलते उन पर कार्रवाई रुकी थी। ऐसे तमाम मामलों पर अब कार्रवाई तय होगी।
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होटल पर हो सकती है ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
गुलमर्ग के निकट स्थित होटल नजूल की भूमि पर है। इसका खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसकी जांच मंडलायुक्त ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंपी हुई है। इस मामले में तहसील की रिपोर्ट को लेकर उस समय खेल शुरू हुआ था। जिसमें होटल मालिक ने तहसील के एक लेखपाल और कानूनगो से मिलकर रिपोर्ट में नजूल का रिकार्ड नहीं होने की साठगांठ की थी। हालांकि कलक्ट्रेट में मौजूद नजूल के रिकार्ड में यह जमीन दर्ज है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक तरफ जहां होटल पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जल्दी तय होगी। वहीं, तहसील कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
वन विभाग की जमीन भी होगी मुक्त
खादर क्षेत्र में वन विभाग की करीब 700 बीघा जमीन पर भूमाफिया का कब्जा है। उन्होंने फर्जी आदेश के जरिए जमीन अपने नाम करा ली थी। हालांकि सरकारी अभिलेखों में ऐसे आदेश की प्रति कहीं नहीं मिली। इस मामले की भी जांच पूरी हो चुकी है। अब जिला प्रशासन वन विभाग को इस जमीन पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई तय करेगा।
मुख्य बातें
बाईपास स्थित एक कालेज, चारागाह की जमीन, गुलमर्ग सिनेमा के निकट स्थित होटल और ग्रीन बेल्ट पर निर्माण के खिलाफ चलेगा अभियान
नगर निकाय चुनाव के चलते रोक दिया गया था अभियान
अब लंबित सभी जांच पूरी कर तेजी से होगा एक्शन