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तालाब
Updated Thu, 31 Aug 2017 03:07 AM IST
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242 लापता तालाबों की तलाश
- मंडलायुक्त ने शुरू कराई जांच, कहां कब्जा हटाना ही होगा
- तालाबों पर कब्जा करने वाले कई बड़े बिल्डर रडार पर
- जिले भर में 5119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं।
- महानगर में 242 लापता तालाबों में से 18 एमडीए, 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के ।
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महानगर में देखते ही देखते लापता हो गए 242 तालाबाें की तलाश शुरू हो गई है। खास तौर पर उन तालाबों को खोजा जा रहा है, जिन पर बिल्डरों की बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गई हैं। कई तालाबों पर स्कूल, कालेज खड़े कर दिए गए हैं। मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने साफ कहा है कि तालाबों को खाली करना होगा। यदि नहीं किया तो फिर प्रशासन अपने तरीके से तालाब कब्जा मुक्त कराएगा।
तालाबों को कब्जा मुक्त कराने और उनके संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे रखे हैं पर धरातल पर ये आदेश बेमानी ही साबित हुए। तालाबों पर कब्जे हो गए। आलीशान कोठियां और मार्केट खड़े हो गए। कई जगह कालोनी बनी तो तालाबा का अस्तित्व समाप्त हो गया।
जिले में हैं पांच हजार से ज्यादा तालाब
जिले भर में 05 हजार 119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा विलुप्त हो चुके हैं। जो बचे हैं, उन पर भी कब्जे किए जा रहे हैं। महानगर में 242 तालाब लापता हैं। इनमें से 18 एमडीए की कालोनियों में थे। कुल 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के हैं। एमडीए की कई कालोनियां इन्हीं तालाबों पर बन गई हैं।
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तहसीलों में भी हाल है बुरा
तहसील स्तर पर तालाबों की स्थिति पर नजर डालें तो सदर तहसील क्षेत्र के 126, मवाना के 112 और सरधना के 85 तालाबों पर कब्जे हैं। इनमें कई तो ऐसे हैं जिनका अस्तित्व खत्म ही हो चुका है।
सबसे पहले नगर पर फोकस
मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने इस बाबत सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। एक इंस्टीट्यूट के दो तालाबाें को कब्जा मुक्त करने के लिए स्पष्ट रूप से कह दिया है। इधर जागृति विहार, श्रद्धापुरी, गंगानगर, और पल्लवपुरम आदि ऐसी बड़ी योजनाएं हैं, जहां तालाबों का भी अधिग्रहण हो गया। बिल्डरों ने इन तालाबों पर आलीशान कालोनियां विकसित कर दी हैं।
जहां बन गई गगनचुंबी इमारत वहां क्या होगा?
तालाबों को खाली कराने में प्रशासन के सामने बड़ी अड़चने सामने आने वाली हैं। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जहां गगनचुंबी इमारत बन गई है और वहां लोग रह रहे हैं। कई जगह तालाब पर कब्जा कर आवास बेचने के बाद बिल्डर का अता पता ही नहीं है। ऐसे में आम जनता ही कोप का भाजन बनने वाली है। हालांकि सबसे पहले तैयारी यह है कि बिल्डर या कब्जा करने वाले मुख्य व्यक्ति को ही पकड़ा जाए।
वर्जन
सुप्रीम कोर्ट तालाबाें पर कब्जों को लेकर बेहद सख्त है। सबसे पहले उन तालाबों को कब्जा मुक्त किया जाएगा जिनमें आम लोग सीधे प्रभावित न हो रहे हों। ऐसे कई तालाब टारगेट पर हैं जिन्हें जल्द ही कब्जामुक्त किया जाएगा।
- डा. प्रभात कुमार, मंडलायुक्त
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- मंडलायुक्त ने शुरू कराई जांच, कहां कब्जा हटाना ही होगा
- तालाबों पर कब्जा करने वाले कई बड़े बिल्डर रडार पर
- जिले भर में 5119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं।
- महानगर में 242 लापता तालाबों में से 18 एमडीए, 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के ।
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महानगर में देखते ही देखते लापता हो गए 242 तालाबाें की तलाश शुरू हो गई है। खास तौर पर उन तालाबों को खोजा जा रहा है, जिन पर बिल्डरों की बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गई हैं। कई तालाबों पर स्कूल, कालेज खड़े कर दिए गए हैं। मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने साफ कहा है कि तालाबों को खाली करना होगा। यदि नहीं किया तो फिर प्रशासन अपने तरीके से तालाब कब्जा मुक्त कराएगा।
तालाबों को कब्जा मुक्त कराने और उनके संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे रखे हैं पर धरातल पर ये आदेश बेमानी ही साबित हुए। तालाबों पर कब्जे हो गए। आलीशान कोठियां और मार्केट खड़े हो गए। कई जगह कालोनी बनी तो तालाबा का अस्तित्व समाप्त हो गया।
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जिले में हैं पांच हजार से ज्यादा तालाब
जिले भर में 05 हजार 119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा विलुप्त हो चुके हैं। जो बचे हैं, उन पर भी कब्जे किए जा रहे हैं। महानगर में 242 तालाब लापता हैं। इनमें से 18 एमडीए की कालोनियों में थे। कुल 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के हैं। एमडीए की कई कालोनियां इन्हीं तालाबों पर बन गई हैं।
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तहसीलों में भी हाल है बुरा
तहसील स्तर पर तालाबों की स्थिति पर नजर डालें तो सदर तहसील क्षेत्र के 126, मवाना के 112 और सरधना के 85 तालाबों पर कब्जे हैं। इनमें कई तो ऐसे हैं जिनका अस्तित्व खत्म ही हो चुका है।
सबसे पहले नगर पर फोकस
मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने इस बाबत सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। एक इंस्टीट्यूट के दो तालाबाें को कब्जा मुक्त करने के लिए स्पष्ट रूप से कह दिया है। इधर जागृति विहार, श्रद्धापुरी, गंगानगर, और पल्लवपुरम आदि ऐसी बड़ी योजनाएं हैं, जहां तालाबों का भी अधिग्रहण हो गया। बिल्डरों ने इन तालाबों पर आलीशान कालोनियां विकसित कर दी हैं।
जहां बन गई गगनचुंबी इमारत वहां क्या होगा?
तालाबों को खाली कराने में प्रशासन के सामने बड़ी अड़चने सामने आने वाली हैं। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जहां गगनचुंबी इमारत बन गई है और वहां लोग रह रहे हैं। कई जगह तालाब पर कब्जा कर आवास बेचने के बाद बिल्डर का अता पता ही नहीं है। ऐसे में आम जनता ही कोप का भाजन बनने वाली है। हालांकि सबसे पहले तैयारी यह है कि बिल्डर या कब्जा करने वाले मुख्य व्यक्ति को ही पकड़ा जाए।
वर्जन
सुप्रीम कोर्ट तालाबाें पर कब्जों को लेकर बेहद सख्त है। सबसे पहले उन तालाबों को कब्जा मुक्त किया जाएगा जिनमें आम लोग सीधे प्रभावित न हो रहे हों। ऐसे कई तालाब टारगेट पर हैं जिन्हें जल्द ही कब्जामुक्त किया जाएगा।
- डा. प्रभात कुमार, मंडलायुक्त