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100 कालोनियों में सीवर का ‘ट्रीटमेंट’

Fri, 15 Jul 2016 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Fri, 15 Jul 2016 02:26 AM IST
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100 coloney me
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
शहर की लगभग 100 कालोनियों में बिल्डरों ने एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान) की जमीन ही बेच डाली। कुछ जगह एसटीपी लगाया भी, तो वह ठप है। ऐसे में इन कालोनियों में जल निकासी का कोई सही इंतजाम नहीं है। खाली प्लॉटों तक में पानी बहाया जा रहा है। बारिश में इन कालोनियों में जलभराव का संकट है। एमडीए टीम ने इस बाबत जांच की, तो पाया कि काफी जगह तो केवल फाइलों में ही एसटीपी है। अब अर्से बाद जांच कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
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यह है नियमानुसार व्यवस्था
मेरठ विकास प्राधिकरण अपनी आवासीय कालोनियों में जल निकासी का इंतजाम करता है। कालोनियों को सीवर लाइन के माध्यम से एसटीपी से जोड़ा जाता है। अधिकतर कालोनियों में एसटीपी लगे हैं। जहां नहीं हैं, उस कालोनी का सीवर सिस्टम पास की कालोनी के एसटीपी से जोड़ा गया है। निजी कालोनियों में भी यही नियम है। किसी भी टाउनशिप का ले आउट एमडीए से तभी स्वीकृत होगा, जब उसमें एसटीपी लगाने की भी व्यवस्था हो। निजी कालोनाइजरों को भी अपनी कालोनियों में जल निकासी का मजबूत प्रबंधन करने का नियम है।
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केवल नक्शे में ही एसटीपी
हैरत की बात यह है कि लगभग 100 कालोनियों में केवल ले आउट पर ही एसटीपी शो किया गया है, मौके पर है ही नहीं। कालोनाइजरों का दावा है कि वे वाटर ट्रीटमेंट कर उसका निस्तारण करते हैं। यदि जमीन के भीतर भी पानी उतारा जा रहा है, तो ट्रीटमेंट के बाद। बड़ा घोटाला यह है कि इन कालोनियों में एसटीपी की जमीन तक बेच दी गई है। एमडीए ने इस बाबत ले आउट चेक कराए, तो यह सच सामने आया। ऐसी भी कालोनियां हैं, जहां एसटीपी तो है पर बंद है। ऐसे में सीवर का गंदा पानी खाली पड़े भूखंडों में बहाया जा रहा है। दरअसल यदि एमडीए अधिकारियों ने पहले ही मौके पर जाकर जांच की होती, तो यह जमीन बेची नहीं जा सकती थी। उन्हीं की शह पर इस कारनामे को अंजाम दिया गया है।
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नालों से भी नहीं कनेक्ट
इनमें से अधिकतर कालोनियों की कनेक्टिविटी नालों से भी नहीं है। दरअसल निजी कालोनियां गहरी हो गई हैं और नालों का लेवल ऊंचा है। सड़क भी ऊंची है। ऐसे में कालोनियों का सीवर सिस्टम नाले तक जाता ही नहीं है। ऐसे में इन कालोनियों में पानी की निकासी का इंतजाम नहीं हो रहा है। कई रोड पर तो नाला ही नहीं है। जैसे रोहटा रोड पर अभी नाले का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। बागपत रोड पर नाला बनाकर उसे बाईपास से जोड़ा गया है पर वह नीचा रह गया है। ऐसे में इसमें बारिश में उल्टा फ्लो होने की आशंका है। कालोनियों में पानी भर सकता है।
बारिश में क्या होगा हाल
बारिश शुरू हो गई है। ऐसे में इन कालोनियों के लोगों को चिंता सताने लगी है। इस बाबत एमडीए में भी कई बार कहा जा चुका है, पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

यहां की लगभग इतनी कालोनियों में गड़बड़
मवाना रोड - 11 कालोनी
गढ़ रोड- 10
रुड़की रोड-12
बागपत रोड- 10
रोहटा रोड-11
दिल्ली रोड- 13
एनएच 58 बाईपास -12
लावड़ रोड -7
शताब्दीनगर में निजी - 5
गंगानगर में निजी -6
 
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