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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Medicinal farming will be promoted in Bundelkhand

बुंदेलखंड के औषधीय पौधों को मिलेगी 'संजीवनी', केन्द्र सरकार ने स्वीकृत की परियोजना

Wed, 24 Oct 2018 04:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Updated Wed, 24 Oct 2018 04:06 PM IST
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Medicinal farming will be promoted in Bundelkhand
प्रतीकात्मक तस्वीर
बुंदेलखंड में औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों के साथ- साथ इससे महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें खेतों के अलावा घर के अंदर या खेत की मेड़ पर औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
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औषधि पौधों की गुणवत्ता की भी नि:शुल्क जांच की जाएगी। इसके बाद दवा बनाने वाली कंपनियों को औषधि बेचकर सीधे किसानों व महिलाओं के खाते में पैसा भेजा जाएगा। केंद्र सरकार ने इस परियोजना की जिम्मेदारी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपी है।
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बुंदेलखंड में कई औषधीय पौधे पाए जाते हैं, बावजूद इसके यहां के किसानों में औषधीय खेती को लेकर रुचि कम है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ाने का प्रयास किया है। 
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इसके लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को ‘हर्बल इंडस्ट्री के लिए औषधीय पौधों की खेती एवं गुणवत्ता संवर्धन’ विषयक परियोजना दी है। इसमें किसानों के साथ ग्रामीण महिलाओं से औषधीय पौधों की खेती कराने पर जोर दिया गया है। 

कम लागत, कम भूमि और कम पानी की जरूरत होने की वजह से महिलाएं घर के अंदर या खेत की मेड़ पर औषधीय पौधों की खेती कर सकती हैं।

बीज केंद्रीय औषध एवं संगध पौधा संस्थान लखनऊ और बैद्यनाथ द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। जो पौधे तैयार होंगे, उनका बीयू की लैब में परीक्षण होगा। यदि कोई कमी मिलेगी तो कारण किसानों को बताए जाएंगे। फिर दोबारा उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करवाए जाएंगे। औषधि की बिक्री के लिए पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री से करार हो चुका है।
-डॉ. रामवीर सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोमेडिकल साइंस विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय

कई औषधीय पौधों की उपज
बुंदेलखंड में कई प्रकार के औषधीय पौधे जैसे तुलसी, एलोवेरा, सफेद मूसली, शतावरी, अश्वगंधा, शंखपुष्पी, गिलोय, सर्पगंधा, खस आदि होते हैं। बरुआसागर के आसपास तुलसी और सफेद मूसली अच्छी मात्रा में हो रही है लेकिन इनकी गुणवत्ता ज्यादा अच्छी नहीं है। इससे किसानों को पौधे बेचने पर अच्छा मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

हाल ही में बीयू ने इनके सैंपल लिए हैं, जिनकी प्रयोगशाला में जांच चल रही है। ललितपुर में तो सफेद मूसली की बड़े पैमाने पर खेती होती आई है, लेकिन अब वहां लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहां के जंगलों में कई जड़ी बूटी के पौधे हैं।

Medicinal farming will be promoted in Bundelkhand
प्रतीकात्मक तस्वीर
बाजार में होती अच्छी बिक्री 
औषधीय पौधों से बने उत्पादों, दवाइयों आदि की बाजार में अच्छी बिक्री होती है। लोग स्वस्थ और सुंदर दिखने के लिए तुलसी अर्क व शतावर के पाउडर तो तनाव से छुटकारा पाने के लिए अश्वगंधा के पाउडर का सेवन करते हैं। 

इसी प्रकार, खासकर बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के लिए शंखपुष्पी, मधुमेह या संक्रमण नियंत्रण के लिए गिलोय, उच्च रक्तचाप के लिए सर्पगंधा, वजन कम करने के लिए एलोवेरा आदि का सेवन किया जाता है। ऐसे में जितना अधिक व गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधे होंगे, उतना किसानों को लाभ होगा।
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