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जिले में आज से शुरू होनी है गेहूं की खरीद
ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 31 Mar 2016 11:37 PM IST
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शासन से जारी निर्देश के मुताबिक एक अप्रैल से गेहूं की खरीद की जानी है, लेकिन जिले में इसकी तैयारियां सिर्फ कागज पर ही नजर आ रही हैं। हालत यह है कि आला अधिकारी शासन की ओर से गेहूं खरीद नीति के संबंध में विस्तृत जानकारी देने तक की स्थिति में नहीं हैं। तैयारी आधी अधूरी ही नजर आ रही है। विभागीय अधिकारी खरीद नीति का इंतजार कर रहे हैं। विभाग की ओर से जिले में 35 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। खरीद संबंधी दिशा निर्देश न आने से किसान भी उहापोह में हैं।
जिले में गेहूं की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। मौसम में आए दिन परिवर्तन से जहां किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। वहीं सरकार की ओर से अन्नदाताओं की समस्याओं को कम करने की बजाय बढ़ाई ही जा रही है। किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए गेेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू की जानी है। लेकिन कागज पर ही विभागीय तैयारी चल रही है। किसानों की मानें तो खरीद शुरू होने के सप्ताह पूर्व ही तैयारी पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन सब कुछ कागज पर ही चल रहा है। हालत यह है कि विभागीय अधिकारियों को खरीद लक्ष्य तक की जानकारी नहीं है। गेहूं खरीद संबंधित दिशा निर्देश जारी न होने से विभागीय तैयारी आधी अधूरी ही नजर आ रही है।
विभाग की ओर से जिले में 35 क्रय केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। प्रस्तावित क्रय केंद्रों के निर्धारण पर नजर डाला जाए तो विपणन के नौ, पीसीएफ के 18, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, एग्रो के एक तथा भारतीय खाद्य निगम के दो शामिल हैं। गत वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 19500 एमटी निर्धारित किया गया था।
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इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, लोकदल के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, भाजपा नेता राकेश सिंह का कहना है कि कई वर्षों से शासन प्रशासन की ढुलमुल नीति से किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होनी है लेकिन अभी तक गेहूं खरीद नीति जारी नहीं की जा सकी है। खरीद संबंधित कब दिशा निर्देश जारी होगा पता नहीं चल पा रहा है। मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो हम लोग धरना प्रदर्शन करने को बाध्य हो जाएंगे। इस बाबत जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि अपर जिलाधिकारी ने गेहूं खरीद के संबंध में समीक्षा बैठक ली है। रिपोर्ट मांगी गई है।
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जिले में गेहूं की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। मौसम में आए दिन परिवर्तन से जहां किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। वहीं सरकार की ओर से अन्नदाताओं की समस्याओं को कम करने की बजाय बढ़ाई ही जा रही है। किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए गेेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू की जानी है। लेकिन कागज पर ही विभागीय तैयारी चल रही है। किसानों की मानें तो खरीद शुरू होने के सप्ताह पूर्व ही तैयारी पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन सब कुछ कागज पर ही चल रहा है। हालत यह है कि विभागीय अधिकारियों को खरीद लक्ष्य तक की जानकारी नहीं है। गेहूं खरीद संबंधित दिशा निर्देश जारी न होने से विभागीय तैयारी आधी अधूरी ही नजर आ रही है।
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विभाग की ओर से जिले में 35 क्रय केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। प्रस्तावित क्रय केंद्रों के निर्धारण पर नजर डाला जाए तो विपणन के नौ, पीसीएफ के 18, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, एग्रो के एक तथा भारतीय खाद्य निगम के दो शामिल हैं। गत वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 19500 एमटी निर्धारित किया गया था।
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इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, लोकदल के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, भाजपा नेता राकेश सिंह का कहना है कि कई वर्षों से शासन प्रशासन की ढुलमुल नीति से किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होनी है लेकिन अभी तक गेहूं खरीद नीति जारी नहीं की जा सकी है। खरीद संबंधित कब दिशा निर्देश जारी होगा पता नहीं चल पा रहा है। मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो हम लोग धरना प्रदर्शन करने को बाध्य हो जाएंगे। इस बाबत जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि अपर जिलाधिकारी ने गेहूं खरीद के संबंध में समीक्षा बैठक ली है। रिपोर्ट मांगी गई है।