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नगर में जल जमाव के कारण डेंगू, मलेरिया का बढ़ा खतरा
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नगर के मठियाटोला मुहल्ले में हुआ जलजमाव।संवाद
- फोटो : MAU
नगर के सोलह मुहल्लों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। इसकी वजह से मच्छरों का प्रकोप है लेकिन एंटी लार्वा दवा का छिड़काव और फागिंग नहीं कराई जा रही है। नगर पालिका प्रशासन की ओर से कुछ स्थानों पर जलनिकासी की व्यवस्था कराई गई है। ऐसे में मलेरिया और डेंगू का खतरा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले में कोई डेंगू और मलेरिया से पीड़ित मरीज नहीं मिला है।
नगर में जलभराव के चलते मच्छरों का प्रकोप होने से लोगों को डेंगू और मलेरिया बीमारी का खतरा सताने लगा है। जलभराव और कीचड़ के चलते संक्रामक बीमारियां और जलजनित रोगों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग की आंकड़े में अभी तक एक भी डेंगू या मलेरिया का रोगी नहीं मिला है। चिकित्सकों की मानें तो मानसून के बाद वायरल फीवर, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया बीमारी तेजी से बढ़ती है। डेंगू और चिकनगुनिया एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने पर होता है। यह मच्छर साफ पानी में ही पैदा होते हैं। वहीं मलेरिया एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है जो गंदे और साफ दोनों पानी में प्रजनन कर सकते हैं।
नगर का इमिलिया मुहल्ला, निजामुद्दीनपुरा, मलिकटोला, पठानटोला, ओम नगर कालोनी, मुंशीपुरा, भीटी नई बस्ती, बुनकर कालोनी, औरंगाबाद, रघुनाथपुरा कल्याण सागर, मठियाटोला, सहादतपुरा, घासबाजार, मलिकटोला, न्याजपुरा, हट्ठीमदारी आदि कुल सोलह मुहल्लों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कुछ ही स्थानों पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से पंपिग सेट से जलनिकासी कराई जा रही है। वहीं मच्छरों से बचाव के लिए एंटी लार्वा दवा का छिड़काव नहीं किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि मच्छर जनित बीमारी का खतरा जुलाई से नवंबर के बीच होता है लेकिन इस बार मानसून के देरी से समाप्त होने के कारण इस बीमारी की आशंका दिसंबर तक बने रहने की है।
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कोट
मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहर के कई मुहल्लों में एंटी लार्वा दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही मुहल्लों में फागिंग कराई जा रही है।-दिनेश कुमार, ईओ नगर पालिका, मऊ।
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नगर में जलभराव के चलते मच्छरों का प्रकोप होने से लोगों को डेंगू और मलेरिया बीमारी का खतरा सताने लगा है। जलभराव और कीचड़ के चलते संक्रामक बीमारियां और जलजनित रोगों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग की आंकड़े में अभी तक एक भी डेंगू या मलेरिया का रोगी नहीं मिला है। चिकित्सकों की मानें तो मानसून के बाद वायरल फीवर, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया बीमारी तेजी से बढ़ती है। डेंगू और चिकनगुनिया एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने पर होता है। यह मच्छर साफ पानी में ही पैदा होते हैं। वहीं मलेरिया एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है जो गंदे और साफ दोनों पानी में प्रजनन कर सकते हैं।
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नगर का इमिलिया मुहल्ला, निजामुद्दीनपुरा, मलिकटोला, पठानटोला, ओम नगर कालोनी, मुंशीपुरा, भीटी नई बस्ती, बुनकर कालोनी, औरंगाबाद, रघुनाथपुरा कल्याण सागर, मठियाटोला, सहादतपुरा, घासबाजार, मलिकटोला, न्याजपुरा, हट्ठीमदारी आदि कुल सोलह मुहल्लों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कुछ ही स्थानों पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से पंपिग सेट से जलनिकासी कराई जा रही है। वहीं मच्छरों से बचाव के लिए एंटी लार्वा दवा का छिड़काव नहीं किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि मच्छर जनित बीमारी का खतरा जुलाई से नवंबर के बीच होता है लेकिन इस बार मानसून के देरी से समाप्त होने के कारण इस बीमारी की आशंका दिसंबर तक बने रहने की है।
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मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहर के कई मुहल्लों में एंटी लार्वा दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। साथ ही मुहल्लों में फागिंग कराई जा रही है।-दिनेश कुमार, ईओ नगर पालिका, मऊ।