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मऊ: भाजपा के दो विधायक, एक मंत्री, मिली सिर्फ दो सीटें
Fri, 07 May 2021 10:38 PM IST
गीतार्जुन गौतम
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 07 May 2021 10:38 PM IST
सार
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सबसे अधिक बसपा को मिली सात सीटेें
आगामी विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में भाजपा के जनाधार को लेकर हो रही चर्चा
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मऊ के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य की 34 सीटों में से सिर्फ दो सीटें भाजपा के खाते में आई हैं। जबकि विधान सभावार देखा जाए तो मऊ में भाजपा के तीन विधायक हैं जिनमें एक कैबिनेट मंत्री हैं। बावजूद इसके जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। विपक्षियों का कहना है कि भाजपा शासन से लोगों का मोह भंग हो चुका है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सबसे अधिक सात सीटों पर बसपा और दो पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कराई है।
जिला पंचायत सदस्य के परिणाम पर नजर डाला जाए तो विजयी भाजपा प्रत्याशी मनोज राय सहरोज और धवरियासाथ वार्ड से विजयी अखिलेश राजभर के क्षेत्र का कुछ हिस्सा सदर विधान सभा में पड़ता है। ऐसे में इस सीट पर घोसी विधान सभा के कद्दावर नेताओं को क्रेडिट नहीं दी जा सकती। जिला पंचायत सदस्य की सिर्फ दो सीटें भाजपा मिलनो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव लिए खतरे की घंटी हैं। वहीं जिले के तीनों विधान सभा में मौजूद विधायकों के प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाने का काम किया है। इसमें वन मंत्री दारा सिंह चौहान के क्षेत्र में जनता ने सबसे ज्यादा बसपा प्रत्याशियों को पहली पसंद किया। इस तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा विधायक अपने क्षेत्र में एक भी जिला पंचायत सदस्य को जिताने में सफल नहीं रहे। इतना ही नहीं मुख्तार से जोड़कर जिस संजय सागर की पुलिस तलाश कर रही थी, वह सपा के टिकट से परदहां वार्ड से अपनी पत्नी पुष्पा सागर को विजयी बनाने में सफल रहा।
पूर्व के लोक सभा और विधान सभा चुनावों पर नजर डालें तो मऊ जिले की राजनीतिक जमीन कभी भी भाजपा के लिए मुफीद नहीं रही है। बीते 2014 के लोकसभा में मोदी लहर में यहां से पहली बार भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण राजभर ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तीन विधायक चुने गए, इन परिणामों से जिले में भाजपा के लिए राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का काम किया था। लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आए परिणामों ने भाजपा की मजबूत नींव को हिलाने का कार्य किया है। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में जिले के घोसी, मधुबन और मुहम्मदाबाद विधान सभा से भाजपा ने जीत दर्ज की। जबकि वर्ष 2019 में संपन्न हुए लोक सभा चुनाव में घोसी लोकसभा से बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई जबकि मधुबन विधान सभा के विधायक दारा सिंह चौहान प्रदेश में कैबिनेट मंत्री भी हैं।
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लोक सभा के बाद हुए जिला पंचायत चुनाव में ये विधायक अपनी पार्टी को जीत दिलाने में बहुत सफल नहीं रहे। सबसे खराब हालत मुहम्मदाबाद गोहना और मधुबन विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की रही। मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र के खैराबाद वार्ड से घोषित भाजपा प्रत्याशी एक सप्ताह पहले ही हथियार डाल दिया था। वह चुनाव में मात्र सैकड़ा का ही अंक छू सके। इसी तरह क्षेत्र के सुरहुरपुर जिला पंचायत क्षेत्र से घोषित प्रत्याशी ने पहले ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया, हालांकि बाद में उनकी कोरोना के चलते मृत्यु हो गई। कमोवेश अन्य विधान सभा क्षेत्रों में भी भाजपा अधिकृत प्रत्याशियों की यही हाल रहा। पार्टीवार आंकड़ा देखा जाए तो जनपद में सपा ने भी उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं किया जितना की बसपा अधिकृत प्रत्याशियों ने किया। सपा के केवल दो ही अधिकृत उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं ।
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जिला पंचायत सदस्य के परिणाम पर नजर डाला जाए तो विजयी भाजपा प्रत्याशी मनोज राय सहरोज और धवरियासाथ वार्ड से विजयी अखिलेश राजभर के क्षेत्र का कुछ हिस्सा सदर विधान सभा में पड़ता है। ऐसे में इस सीट पर घोसी विधान सभा के कद्दावर नेताओं को क्रेडिट नहीं दी जा सकती। जिला पंचायत सदस्य की सिर्फ दो सीटें भाजपा मिलनो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव लिए खतरे की घंटी हैं। वहीं जिले के तीनों विधान सभा में मौजूद विधायकों के प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाने का काम किया है। इसमें वन मंत्री दारा सिंह चौहान के क्षेत्र में जनता ने सबसे ज्यादा बसपा प्रत्याशियों को पहली पसंद किया। इस तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा विधायक अपने क्षेत्र में एक भी जिला पंचायत सदस्य को जिताने में सफल नहीं रहे। इतना ही नहीं मुख्तार से जोड़कर जिस संजय सागर की पुलिस तलाश कर रही थी, वह सपा के टिकट से परदहां वार्ड से अपनी पत्नी पुष्पा सागर को विजयी बनाने में सफल रहा।
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पूर्व के लोक सभा और विधान सभा चुनावों पर नजर डालें तो मऊ जिले की राजनीतिक जमीन कभी भी भाजपा के लिए मुफीद नहीं रही है। बीते 2014 के लोकसभा में मोदी लहर में यहां से पहली बार भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण राजभर ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तीन विधायक चुने गए, इन परिणामों से जिले में भाजपा के लिए राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का काम किया था। लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आए परिणामों ने भाजपा की मजबूत नींव को हिलाने का कार्य किया है। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में जिले के घोसी, मधुबन और मुहम्मदाबाद विधान सभा से भाजपा ने जीत दर्ज की। जबकि वर्ष 2019 में संपन्न हुए लोक सभा चुनाव में घोसी लोकसभा से बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई जबकि मधुबन विधान सभा के विधायक दारा सिंह चौहान प्रदेश में कैबिनेट मंत्री भी हैं।
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लोक सभा के बाद हुए जिला पंचायत चुनाव में ये विधायक अपनी पार्टी को जीत दिलाने में बहुत सफल नहीं रहे। सबसे खराब हालत मुहम्मदाबाद गोहना और मधुबन विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की रही। मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र के खैराबाद वार्ड से घोषित भाजपा प्रत्याशी एक सप्ताह पहले ही हथियार डाल दिया था। वह चुनाव में मात्र सैकड़ा का ही अंक छू सके। इसी तरह क्षेत्र के सुरहुरपुर जिला पंचायत क्षेत्र से घोषित प्रत्याशी ने पहले ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया, हालांकि बाद में उनकी कोरोना के चलते मृत्यु हो गई। कमोवेश अन्य विधान सभा क्षेत्रों में भी भाजपा अधिकृत प्रत्याशियों की यही हाल रहा। पार्टीवार आंकड़ा देखा जाए तो जनपद में सपा ने भी उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं किया जितना की बसपा अधिकृत प्रत्याशियों ने किया। सपा के केवल दो ही अधिकृत उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं ।