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Mau News: आयुर्वेद, यूनानी पद्धति से इलाज, दवाएं लिख रहे ऐलोपैथ की

Fri, 04 Apr 2025 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 12:51 AM IST
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Treatment through Ayurveda and Unani method, allopathic medicines are prescribed
मऊ। जिला अस्पताल में संचालित आयुष विंग में पहुंचने वाले मरीजों को बीते पांच साल से दवाइयां नहीं मिल रही हैं। ऐसे में यहां तैनात आयुर्वेद, यूनानी के चिकित्सक मरीजों को ऐलोपैथ की दवाएं लिख रहे हैं। यहां सिर्फ मरीजों को परामर्श मिलता है और ऐलोपैथ की दवाएं खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ता है।
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वहीं इसके ठीक बगल में संचालित होमियोपैथ विभाग से संचालित होमियोपैथी क्लीनिक में दवाइयां मिलती दिखी। इसे लेकर जिला अस्पताल के सीएमएस ने सीएमओ की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया, वहीं सीएमओ ने इसके लिए बजट न होने की बात कही तो क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी ने इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान स्वास्थ्य विभाग को मिलना होना बताया।
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उधर इस मामले को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष और सीडीओ प्रशांत नागर ने इसकी जांच कराने की बात कही।
शासन का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी अस्पतालों में बाहर से दवा नहीं लिखनी है, लेकिन यह नियम जिला अस्पताल परिसर में संचालित आयुष विंग में पांच साल से हर दिन टूट रहा है। दरअसल इस विंग में आयुर्वेद, होमियोपैथ और यूनानी विधा के तीन डाक्टरों की तैनाती है लेकिन दवा न होने से यह परामर्श तो अपने विधा में देते हैं, लेकिन दवाएं ऐलौपेथ का सुझाव देते हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की पड़ताल में यह खामी सामने आई। यहां तैनात चिकित्सकोंं ने जिम्मेदारों को अवगत कराने की बात कही। इस विंग में प्रतिदिन दिन इन चिकित्सकों के यहां 100 से ज्यादा मरीजाें की ओपीडी है, लेकिन बीते कई सालों से बिना दवा के संचालित इस विंग की शिकायत होने के बाद भी अब तक इसको लेकर जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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इस संबंध में सीएमएस डॉ. धनज्जय कुमार ने बताया कि यह विंग अस्पताल प्रबंधन द्वारा संचालित नहीं की जाती है, यह जिला अस्पताल परिसर में संचालित होते हुए इसकी जिम्मेदार सीएमओ की है। वहीं सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि हमारे यहां इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं है, इसकी जिम्मेदारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एंव यूनानी अधिकारी की है।
इस संबंध में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एंव यूनानी अधिकारी डॉ. सत्येंद्र साहू ने कहा कि एमओसीएच के तहत यह विंग है। जिसका संचालन सीएमओ द्वारा किया जाता है। आयुष विभाग केवल जिले में तैनाती करता है जबकि सीएमओ अपने हिसाब से तैनाती करते हैं।
रही बात दवाओं के बजट की तो स्वास्थ्य विभाग जहां एमओसीएच के हिसाब से बजट की मांग करता है, इसके लिए शासन अलग से बजट देता है। ऐसे में यहां दवाएं वितरित करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। वहीं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष और सीडीओ प्रशांत नागर का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में आया है, इस संबंध में तीनाें जिम्मेदारों से जानकारी ली जाएगी।

36 चिकित्सकों की तैनाती का दावा
मऊ। डाक्टरों की कमी दूर करने के साथ हर आयुष विधा को बढ़ावा देने के लिए हर अस्पताल पर एक मेडिकल ऑफिसर कम्युनिटी डाॅक्टर की तैनाती की जाती है, जिसमें 80 फीसदी आयुर्वेद होती है तो 20 फीसदी यूनानी के चिकित्सक होते हैं। जिसका संचालन सीएमओ द्वारा किया जाता है। आयुष विभाग केवल जिले में केवल तैनाती करता है जबकि सीएमओ अपने हिसाब से तैनाती करते है। इन चिकित्सकों का वेतन भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिया जाता है, लेकिन नियोक्ता होने के चलते ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार आयुष विभाग की है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 36 ऐसे चिकित्सकों की तैनाती की गई है। क्षेत्रीय आयुर्वेद एंव यूनानी अधिकारी द्वारा इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को प्रति चिकित्सक के हिसाब से 50 हजार रुपये का बजट का प्रावधान क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी द्वारा कहा जा रहा है।
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