{"_id":"589227da4f1c1b5a42e805d3","slug":"train-cancelled-public-perplexed","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार प्रमुख ट्रेनें बंद होने से जिलेवासियों को परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार प्रमुख ट्रेनें बंद होने से जिलेवासियों को परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
Updated Wed, 01 Feb 2017 11:54 PM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ से दिल्ली और कानपुर जाने वाली एक भी ट्रेन नहीं होने से जनपदवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मऊ से आनंद विहार के लिए शुरू हुई साप्ताहिक ट्रेन के साथ ही यहां से होकर गुजरने वाली दिल्ली के लिए प्रमुख ट्रेन लिच्छवी एक्सप्रेस को भी दो महीनों के लिए बंद कर दिया गया है। इसके अलावा छपरा से वाराणसी जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को बंद कर दिया गया है। गोरखपुर से कानपुर के बीच चलने वाली चौरी चौरा एक्सप्रेस ट्रेन भी दो महीनों के लिए केवल इलाहाबाद तक चलाया जा रहा है। इन सभी प्रमुख ट्रेनों के नहीं चलने से दिल्ली जाने वाले लोगों को अब वाराणसी अथवा मुगलसराय से ट्रेन पकड़ने पड़ रहा है।
इससे दिल्ली में पढ़ाई करने वाले छात्रों के समक्ष काफी मुसीबतें बढ़ गई हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कार्यों से दिल्ली की यात्रा करने वालों को वाराणसी , मुगलसराय अथवा आजमगढ़ जाना पड़ रहा है। जनपदवासियों की मांगों के बाद यहां से दिल्ली के लिए मऊ आनंद विहार एक्सप्रेस और छपरा से बलिया मऊ होते हुए वाराणसी के लिए इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन चलाई गई। हालांकि मऊ आनंद विहार एक्सप्रेस अभी यह साप्ताहिक ही चलती थी। फिर भी इससे काफी संख्या में मऊ और आस पास के जिलों के सैकड़ों यात्री सफर कर अपनी मंजिल तक पहुंचते थे।
इसी प्रकार लिच्छवी एक्सप्रेस से भी रोजाना दो सौ से अधिक यात्री दिल्ली जाते थे। जनपदवासियों के लंबे संघर्ष के बाद रेलवे ने छपरा वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू किया लेकिन इसे भी बंद कर दिया गया। इन सभी ट्रेनों को 16 दिसंबर 2016 से बंद कर दिया गया है। ये सभी ट्रेनें 15 फरवरी तक बंद रहेंगी। इस अवधि में जनपद सहित आसपास के लोगों को दिल्ली, कानपुर और वाराणसी छपरा तक यात्रा करने के लिए परेशानियां उठानी पड़ीं। रेलवे को इस अवधि में करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही सो अलग। इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति , अधिवक्ता शिवनारायण राय, किसान नेता देव प्रकाश राय , व्यापारी नेता डा. राम गोपाल गुप्ता और शिक्षक नेता कृष्णानंद सिंह तुगलकी फरमान बताते हैं। इन लोगों का कहना है कि कोहरा को आधार बनाकर रेलवे इन महत्वपूर्ण ट्रेनों को बंद कर दिया है। हालांकि इस वर्ष कोहरा भी नहीं पड़ा। छपरा वाराणसी इंटरसिटी के बंद कर देने से क्षेत्रवासियों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। इस बाबत डीएसआई राजशेखर मिश्र का कहना है कि यह निर्णय उच्चाधिकारियों का है इस पर कोई टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे दिल्ली में पढ़ाई करने वाले छात्रों के समक्ष काफी मुसीबतें बढ़ गई हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कार्यों से दिल्ली की यात्रा करने वालों को वाराणसी , मुगलसराय अथवा आजमगढ़ जाना पड़ रहा है। जनपदवासियों की मांगों के बाद यहां से दिल्ली के लिए मऊ आनंद विहार एक्सप्रेस और छपरा से बलिया मऊ होते हुए वाराणसी के लिए इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन चलाई गई। हालांकि मऊ आनंद विहार एक्सप्रेस अभी यह साप्ताहिक ही चलती थी। फिर भी इससे काफी संख्या में मऊ और आस पास के जिलों के सैकड़ों यात्री सफर कर अपनी मंजिल तक पहुंचते थे।
विज्ञापन
इसी प्रकार लिच्छवी एक्सप्रेस से भी रोजाना दो सौ से अधिक यात्री दिल्ली जाते थे। जनपदवासियों के लंबे संघर्ष के बाद रेलवे ने छपरा वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू किया लेकिन इसे भी बंद कर दिया गया। इन सभी ट्रेनों को 16 दिसंबर 2016 से बंद कर दिया गया है। ये सभी ट्रेनें 15 फरवरी तक बंद रहेंगी। इस अवधि में जनपद सहित आसपास के लोगों को दिल्ली, कानपुर और वाराणसी छपरा तक यात्रा करने के लिए परेशानियां उठानी पड़ीं। रेलवे को इस अवधि में करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही सो अलग। इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति , अधिवक्ता शिवनारायण राय, किसान नेता देव प्रकाश राय , व्यापारी नेता डा. राम गोपाल गुप्ता और शिक्षक नेता कृष्णानंद सिंह तुगलकी फरमान बताते हैं। इन लोगों का कहना है कि कोहरा को आधार बनाकर रेलवे इन महत्वपूर्ण ट्रेनों को बंद कर दिया है। हालांकि इस वर्ष कोहरा भी नहीं पड़ा। छपरा वाराणसी इंटरसिटी के बंद कर देने से क्षेत्रवासियों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। इस बाबत डीएसआई राजशेखर मिश्र का कहना है कि यह निर्णय उच्चाधिकारियों का है इस पर कोई टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
विज्ञापन