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सर्वशिक्षा अभियान का नहीं दिखा कोई असर
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:33 PM IST
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नगर क्षेत्र के शिक्षा विभाग कालोनी स्थित प्राथमिक स्कूल में शिक्षा सत्र के प्रथम दिन इस तरह की रही उपस्थिति, संयुक्त रुप से चली कक्षाएं।
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सर्वशिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी सरकार की मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। शिक्षण सत्र के पहले ही दिन जिले के दर्जनों परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नाम मात्र की रही। कुछ एक स्कूलों पर गिनती के छात्र पहुंचे थे।
सत्र शुरू होने के पूर्व ही शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय के परिवेश को बेहतर बनाने का फरमान भी पहले दिन बेअसर दिखा। 30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तो निर्धारित किया गया है, लेकिन विद्यालयों पर मानक के अनुरूप बच्चे नजर नहीं आ रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तैयारी की पोल शिक्षा सत्र के पहले ही दिन खुल गई। कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल तक नहीं किया जा सका है। यही नहीं कई विद्यालयों के कक्षों के दरवाजे टूटे मिले। अध्यापक रैली निकालने और घर-घर संपर्क करने के बजाय स्कूल पर कुछ समय बिताकर घर का रास्ता नाप लिए।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शासन की ओर से शिक्षा सत्र के पहलेे दिन से ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत रैली निकालकर शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर विद्यालय मेें बच्चों को भेजने के लिए जागरूक किया जाना था। सत्र के पहले दिन जिले के दर्जनों परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नाम मात्र रही। विभिन्न ब्लाकों के विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नगण्य रही। कागज पर गत वर्ष नामांकन तो ज्यादा दिखाया गया था, लेकिन मौके पर बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र रही।
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आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2014 में 172617 बच्चों का नामांकन किया गया था। जबकि 2015 में 164588 बच्चों का नामांकन हुआ था। विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि बच्चे स्कूल चलो अभियान की रैली में चले गए हैं।
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सत्र शुरू होने के पूर्व ही शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय के परिवेश को बेहतर बनाने का फरमान भी पहले दिन बेअसर दिखा। 30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तो निर्धारित किया गया है, लेकिन विद्यालयों पर मानक के अनुरूप बच्चे नजर नहीं आ रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तैयारी की पोल शिक्षा सत्र के पहले ही दिन खुल गई। कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल तक नहीं किया जा सका है। यही नहीं कई विद्यालयों के कक्षों के दरवाजे टूटे मिले। अध्यापक रैली निकालने और घर-घर संपर्क करने के बजाय स्कूल पर कुछ समय बिताकर घर का रास्ता नाप लिए।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शासन की ओर से शिक्षा सत्र के पहलेे दिन से ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत रैली निकालकर शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर विद्यालय मेें बच्चों को भेजने के लिए जागरूक किया जाना था। सत्र के पहले दिन जिले के दर्जनों परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नाम मात्र रही। विभिन्न ब्लाकों के विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नगण्य रही। कागज पर गत वर्ष नामांकन तो ज्यादा दिखाया गया था, लेकिन मौके पर बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र रही।
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आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2014 में 172617 बच्चों का नामांकन किया गया था। जबकि 2015 में 164588 बच्चों का नामांकन हुआ था। विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि बच्चे स्कूल चलो अभियान की रैली में चले गए हैं।