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विद्यालयों में उधार ही बन रहा एमडीएम

Sun, 08 May 2016 11:47 PM IST
BEARU, AMAR UJALA, MAU
BEARU, AMAR UJALA, MAU Updated Sun, 08 May 2016 11:47 PM IST
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Schools have become the MDM borrowing
फेंगशुई धन
परिषदीय, माध्यमिक सहायता प्राप्त विद्यालयों में हाल ही में कराई गई जिलाधिकारी की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली। सबसे अधिक गड़बड़ी मध्याह्न भोजन योजना में मिली। कहीं एमडीएम बन ही नहीं रहा था तो कहीं उसकी गुणवत्ता बेहद घटिया थी। उधर शिक्षकों का कहना था कि प्रशासन कार्रवाई तो तुरंत कर देता है पर एमडीएम के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराता है।
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हालत यह है कि इस समय जिले में एमडीएम की पूरी व्यवस्था उधार के बल पर चल रही है। जहां उधार मिल रहा है वहां कुछ स्थिति ठीक है वरना शिक्षक अपनी जेब से पैसा लगा कर कितने दिन एमडीएम बनवाएंगे। हालत यह कि पिछले सात महीने एमडीएम का कनवर्जन कास्ट बकाया है। अधिकारी जल्दी ही धन भेजने का दावा तो काफी दिनों से कर रहे हैं पर अभी तक धन नहीं मिला है। उधर विभाग ने चार माह का कनवर्जन कास्ट 5.37 करोड़ रुपये स्कूलों को जल्द भेजने का दावा किया है।  
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बच्चों को कुपोषण से बचाने और विद्यालयों में शत प्रतिशत ठहराव के लिए मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गई है। जिले के माध्यमिक सहायता प्राप्त, परिषदीय  सहित 1716 विद्यालयों में योजना संचालित है। योजना के तहत शासन की ओर से कनवर्जन कास्ट की अग्रिम धनराशि भेजने का नियम है। लेकिन यह धनराशि महीनों बाद मिल रही है। विभाग की ओर से गत वर्ष अक्तूबर  माह तक ही कनवर्जन धनराशि का भुगतान किया मिला था। विभागीय अधिकारी अवशेष धन न होने का रोना रो रहे हैं। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से विद्यालयों की कराई गई जांच में एमडीएम में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी   उजागर हुई थी। 
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जिलाधिकारी ने बीएसए सहित 80 शिक्षकों का 15 दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया था। शासन की ओर से चार माह की कनवर्जन कास्ट रसोइयों का मानदेय सहित 5.37 करोड़ रुपया जारी कर दिया गया है। विभाग की ओर से प्रक्रिया पूरी कर स्कूलों के खाते में भेजा जाएगा। कुल मिलाकर विद्यालयों में अध्यययनरत बच्चों को महत्वाकांक्षी योजना के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। 
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