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वीर नारियों की आई याद
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:22 PM IST
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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के दो दशकों में देश को पड़ोसी देशों के साथ तीन युद्घों का सामना करना पड़ा। पाक के साथ दो बार और चीन के साथ एक बार। इन तीनों युद्घों में मऊ के रहने वाले कई जवानों ने भी रणक्षेत्र में दुश्मनों से लोहा लिया। इन्हीं वीरों की 15 वीर नारियां अब भी जीवित हैं। प्रदेश सरकार ऐसी वीर नारियों के कल्याण के लिए कुछ योजनाएं बनाने जा रही है। इसके लिए इन के बारे में विस्त़ृत विवरण जुटाया जा रहा है।
देश को आजादी मिलने के बाद वर्ष 1962 में चीन के साथ, 1965 और 1971 में पाक के साथ युद्घ छिड़ा। इन तीनों युद्घों में मऊ जनपद के रणबांकुरों ने भी शहादत दी थी। इनमें से 15 शहीदों की वीर पत्नियां आज भी जीवित हैं। इनमें सबसे अधिक छह शहीदों की वीर नारियां मुहम्मदाबाद गोहना तहसील में हैं, जबकि मधुबन तहसील में चार, घोसी तहसील में दो और सदर तहसील में तीन वीर नारियां आज भी जीवित हैं।
शासन ने इनकी सुधि ली है। शासन ने ऐसी वीर नारियों का विवरण एकत्र करने का फरमान जारी किया है। सैनिक पुनर्वास कल्याण विभाग में आए इस निर्देश के अनुपालन के लिए चारों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को पत्र लिख गया है। इनका संपूर्ण पारिवारिक, आर्थिक आदि विवरण एकत्र करके दो हफ्तों में देने के लिए कहा गया है।
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युद्घों में देश के काम आने वालों की पत्नियों को सेना की ओर से वीर नारियों की संज्ञा दी गई है। सही भी है कि युवावस्था में ही देश के लिए पति को समर्पित करने वाली इन नारियों ने जिस अप्रतिम धैर्य, साहस और संयम का परिचय देते हुए देश समाज और परिवार को जोड़े रखकर ये अपना जीवन जी रही हैं,
वह वास्तव में वंदनीय, सराहनीय और प्रेरणादायी है। इन्हीं भावनाओं के दृष्टिगत रखते हुए सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी विजय प्रताप यादव के अनुसार सरकार इनके कल्याण के लिए कुछ योजना चलाने जा रही है।
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देश को आजादी मिलने के बाद वर्ष 1962 में चीन के साथ, 1965 और 1971 में पाक के साथ युद्घ छिड़ा। इन तीनों युद्घों में मऊ जनपद के रणबांकुरों ने भी शहादत दी थी। इनमें से 15 शहीदों की वीर पत्नियां आज भी जीवित हैं। इनमें सबसे अधिक छह शहीदों की वीर नारियां मुहम्मदाबाद गोहना तहसील में हैं, जबकि मधुबन तहसील में चार, घोसी तहसील में दो और सदर तहसील में तीन वीर नारियां आज भी जीवित हैं।
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शासन ने इनकी सुधि ली है। शासन ने ऐसी वीर नारियों का विवरण एकत्र करने का फरमान जारी किया है। सैनिक पुनर्वास कल्याण विभाग में आए इस निर्देश के अनुपालन के लिए चारों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को पत्र लिख गया है। इनका संपूर्ण पारिवारिक, आर्थिक आदि विवरण एकत्र करके दो हफ्तों में देने के लिए कहा गया है।
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युद्घों में देश के काम आने वालों की पत्नियों को सेना की ओर से वीर नारियों की संज्ञा दी गई है। सही भी है कि युवावस्था में ही देश के लिए पति को समर्पित करने वाली इन नारियों ने जिस अप्रतिम धैर्य, साहस और संयम का परिचय देते हुए देश समाज और परिवार को जोड़े रखकर ये अपना जीवन जी रही हैं,
वह वास्तव में वंदनीय, सराहनीय और प्रेरणादायी है। इन्हीं भावनाओं के दृष्टिगत रखते हुए सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी विजय प्रताप यादव के अनुसार सरकार इनके कल्याण के लिए कुछ योजना चलाने जा रही है।