{"_id":"57dc34894f1c1bf504d48887","slug":"raise-the-water-of-ghagra","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा का जलस्तर फिर बढ़ा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा का जलस्तर फिर बढ़ा
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Fri, 16 Sep 2016 11:36 PM IST
विज्ञापन
दोहरीघाट में घाघरा नदी में बढ़ जलस्तर को दर्शाता गौरीशंकर घाट पर लगा गेज।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
दोहरीघाट।
घाघरा के जलस्तर में अचानक 24 घंटे में 85 सेंटी मीटर जलस्तर बढ़ने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर से भय व्याप्त हो गया है। पानी के बढ़ने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों पर जहां संकट के बादल मंडराने लगे हैं वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाकों में दहशत व्याप्त हो गया हैै।
घाघरा की लहरें भारत माता मंदिर पर टक्कर मार रही हैं। जिससे मंदिर पर खतरा बढ़ता जा रहा है। नगर के एतिहासिक धरोहरों में मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, डीह बाबा का मंदिर आदि पुन: खतरे की जद में आ गये हैं। घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाके के लोगों का सुख चैन छीन लिया है।
तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, चिउटीडाड़, बहादुरपुर, सरयां, पतनई, गोधनी, बीबीपुर, ताहिरपुर, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, पाउस, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवों में पानी घुसने से भय व्याप्त हो गया है। इस बार धान की फसल डूबी तो बची खुची आशा भी समाप्त हो जाएगी। पहले ही घाघरा के बाढ़ ने तटवर्ती इलाकों के हजारों एकड़ फसल डूब जाने से धान की फसल बर्बाद हो गई है।
विज्ञापन
पिछले वर्ष जो बाढ़ से तबाही हुई थी उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला। गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर 69.15 मीटर रहा जबकि गुरुवार को 68.30 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे मे घाघरा का जलस्तर 85 सेमी. बढ़ा है। खतरा बिंदू 69.90 मीटर से 75 सेमी. नीचे बह रही है। घाघरा अगर इसी तरह से जलस्तर बढ़ा तो शुक्रवार को घाघरा खतरा बिंदू पार कर जाएगी। इससे लोगों को एक बार फिर से डर समा गया है।
विज्ञापन
दोहरीघाट।
घाघरा के जलस्तर में अचानक 24 घंटे में 85 सेंटी मीटर जलस्तर बढ़ने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर से भय व्याप्त हो गया है। पानी के बढ़ने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों पर जहां संकट के बादल मंडराने लगे हैं वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाकों में दहशत व्याप्त हो गया हैै।
घाघरा की लहरें भारत माता मंदिर पर टक्कर मार रही हैं। जिससे मंदिर पर खतरा बढ़ता जा रहा है। नगर के एतिहासिक धरोहरों में मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, डीह बाबा का मंदिर आदि पुन: खतरे की जद में आ गये हैं। घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाके के लोगों का सुख चैन छीन लिया है।
विज्ञापन
तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, चिउटीडाड़, बहादुरपुर, सरयां, पतनई, गोधनी, बीबीपुर, ताहिरपुर, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, पाउस, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवों में पानी घुसने से भय व्याप्त हो गया है। इस बार धान की फसल डूबी तो बची खुची आशा भी समाप्त हो जाएगी। पहले ही घाघरा के बाढ़ ने तटवर्ती इलाकों के हजारों एकड़ फसल डूब जाने से धान की फसल बर्बाद हो गई है।
विज्ञापन
पिछले वर्ष जो बाढ़ से तबाही हुई थी उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला। गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर 69.15 मीटर रहा जबकि गुरुवार को 68.30 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे मे घाघरा का जलस्तर 85 सेमी. बढ़ा है। खतरा बिंदू 69.90 मीटर से 75 सेमी. नीचे बह रही है। घाघरा अगर इसी तरह से जलस्तर बढ़ा तो शुक्रवार को घाघरा खतरा बिंदू पार कर जाएगी। इससे लोगों को एक बार फिर से डर समा गया है।