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Mau News: सरकारी कार्यालयों में लगे हैं नॉन काॅमर्शियल नंबर के निजी वाहन

Thu, 18 Jul 2024 12:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2024 12:47 AM IST
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Private vehicles with non-commercial numbers are used in government offices
मऊ। जनपद के सरकारी कार्यालयों में ठेका प्रथा पर चल रहे अधिकांश वाहन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। बावजूद धड़ल्ले से अफसरों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। लेकिन परिवहन विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है।
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सरकारी कार्यालयों में वाहन स्वामी नॉन काॅमर्शियल नंबर पर वाहनों को विभाग में चलवा रहे हैं। जबकि इसके लिए वाहनों का कामर्शियल नंबर होना आवश्यक है। अधिकांश अधिकारी अपने विभाग में प्राइवेट वाहनों का कॉमर्शियल उपयोग कर रहे हैं। जिससे सरकार को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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इसको लेकर परिवहन विभाग ने डेढ़ साल पहले एडीएम मऊ को पत्र देकर अवगत कराया था। लेकिन उसके बाद से न तो परिवहन विभाग ने सक्रियता नहीं दिखाई। जिले भर के अलग-अलग विभागों में करीब 40 प्राइवेट वाहन लगाए गए हैं। लेकिन इनमें से पांच या छह को छोड़ दें तो अधिकांश प्राइवेट वाहनों का कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा है।
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इनका कॉमर्शियल वाहन की दर से भुगतान होता है। संबंधित अधिकारी के प्रभाव में आकर वाहन स्वामियों से कोई कार्रवाई नहीं करता है।
प्राइवेट और कामर्शियल वाहनों में अंतर की बात करें तो प्राइवेट वाहन का नंबर प्लेट सफेद और काला होता है। जबकि कामर्शियल वाहन का नंबर पीला और काला होता है। कॉमर्शियल वाहन का इस्तेमाल किराया या व्यवसायिक रूप से किया जाता है। कॉमर्शियल वाहनों में राज्यों के हिसाब से परमिट जारी होता है। परमिट लेने के लिए वाहन मालिकों को टैक्स देना पड़ता है। प्राइवेट वाहन का फिटनेस 15 सालों का होता है। जबकि कॉमर्शियल वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसमें भी उन्हें टैक्स भरना पड़ता है। प्राइवेट वाहन में सिर्फ वाहन का इंश्योरेंस होता है। जबकि कामर्शियल वाहन में यात्री के सीट के हिसाब से इंश्योंरेस होता है। साथ ही कामर्शियल वाहनों को हर साल टैक्स जमा करना पड़ता है। जबकि प्राइवेट वाहनों का एक ही बार में टैक्स जमा हो जाता है।


बीते दो माह से टैक्स जमा नहीं करने वाले वाहनों को सीज करके टैक्स जमा कराया गया था। यदि सरकारी विभागों में नॉन कामर्शियल नंबर प्लेट के वाहन चल रहे हैं तो नोटिस देकर सुधार करने को कहा जाएगा। डेढ़ साल पहले एडीएम मऊ को प्रार्थनापत्र देकर अवगत कराया गया था। - सुहेल अहमद, एआरटीओ, मऊ
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