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Mau News: छह महीने बाद खुला पोर्टल, 645 में से 182 ग्राम पंचायतों ने भेजी कार्ययोजना
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पंचायत चुनाव की उहापोह में गांवों का विकास एक साल पिछड़ने की आशंका है। हर साल जनवरी माह में खुलने वाला कार्ययोजना का पोर्टल इस बार जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में खुला है।
पोर्टल खुलने के 12 दिन के भीतर 645 में से 182 ग्राम पंचायतों ने कार्ययोजना भेज दी है। अभी कार्ययोजना जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की गई है।
बीते 26 मई को प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसे देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग के 10 जून को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के फैसले के बाद चुनाव टल गए।
पंचायत मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी और पिछड़ा आयोग का गठन नहीं हो पाने के कारण पंचायत चुनाव छह माह आगे बढ़ा दिए गए। 26 मई को ही प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही उनके नए विकास कार्य कराने पर रोक लगा दी गई।
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अब नए विकास कार्यों के लिए उन्हें डीएम से अनुमति लेनी होगी। हर वर्ष 31 मार्च तक जिले की 645 ग्राम पंचायतों के प्रधान आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विकास कार्यों की कार्ययोजना पोर्टल पर दर्ज कर देते थे।
पोर्टल पर कार्ययोजना दर्ज होने के बाद जून से अक्तूबर तक उन कार्यों के लिए धनराशि भी स्वीकृत हो जाती थी। 15वें वित्त आयोग से जिले की 645 ग्राम पंचायतों को हर वर्ष 52 करोड़ रुपये चार किश्तों में दिए जाते थे।
प्रधान इस धनराशि को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों में खर्च कर सकते थे। वहीं, टाइड फंड सशर्त अनुदान है, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और पुनर्चक्रण पर तथा शेष 50 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता और ओडीएफ की स्थिति बनाए रखने पर अनिवार्य रूप से खर्च किया जाता है।
15वें वित्त आयोग से अलग राज्य सरकार पांचवें वित्त आयोग के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को हर वर्ष 54 करोड़ रुपये का अनुदान देती थी। इस अनुदान से 645 ग्राम पंचायतों के लिए हर माह 4.33 करोड़ रुपये भेजे जाते थे, जिन्हें प्रधान अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च कर सकते थे।
अब पांच वर्ष पूरे होने के बाद वित्त आयोग भी बदल जाएगा। इस वर्ष विकास कार्यों के लिए 16वें और छठे वित्त आयोग से अधिक धनराशि मिलने की बात कही जा रही है।
कोट-- -
जुलाई माह में कार्ययोजना का पोर्टल खुला है। इसके लिए अक्तूबर 2025 में ही बैठक हुई थी, लेकिन पंचायत चुनाव और अन्य कारणों से पोर्टल नहीं खुल सका। अब तक 182 ग्राम पंचायतों से कार्ययोजना प्राप्त हो चुकी है। -किरन वर्मा, प्रभारी जिला पंचायतीराज अधिकारी, मऊ
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पोर्टल खुलने के 12 दिन के भीतर 645 में से 182 ग्राम पंचायतों ने कार्ययोजना भेज दी है। अभी कार्ययोजना जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की गई है।
बीते 26 मई को प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसे देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग के 10 जून को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के फैसले के बाद चुनाव टल गए।
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पंचायत मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी और पिछड़ा आयोग का गठन नहीं हो पाने के कारण पंचायत चुनाव छह माह आगे बढ़ा दिए गए। 26 मई को ही प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही उनके नए विकास कार्य कराने पर रोक लगा दी गई।
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अब नए विकास कार्यों के लिए उन्हें डीएम से अनुमति लेनी होगी। हर वर्ष 31 मार्च तक जिले की 645 ग्राम पंचायतों के प्रधान आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विकास कार्यों की कार्ययोजना पोर्टल पर दर्ज कर देते थे।
पोर्टल पर कार्ययोजना दर्ज होने के बाद जून से अक्तूबर तक उन कार्यों के लिए धनराशि भी स्वीकृत हो जाती थी। 15वें वित्त आयोग से जिले की 645 ग्राम पंचायतों को हर वर्ष 52 करोड़ रुपये चार किश्तों में दिए जाते थे।
प्रधान इस धनराशि को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों में खर्च कर सकते थे। वहीं, टाइड फंड सशर्त अनुदान है, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और पुनर्चक्रण पर तथा शेष 50 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता और ओडीएफ की स्थिति बनाए रखने पर अनिवार्य रूप से खर्च किया जाता है।
15वें वित्त आयोग से अलग राज्य सरकार पांचवें वित्त आयोग के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को हर वर्ष 54 करोड़ रुपये का अनुदान देती थी। इस अनुदान से 645 ग्राम पंचायतों के लिए हर माह 4.33 करोड़ रुपये भेजे जाते थे, जिन्हें प्रधान अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च कर सकते थे।
अब पांच वर्ष पूरे होने के बाद वित्त आयोग भी बदल जाएगा। इस वर्ष विकास कार्यों के लिए 16वें और छठे वित्त आयोग से अधिक धनराशि मिलने की बात कही जा रही है।
कोट
जुलाई माह में कार्ययोजना का पोर्टल खुला है। इसके लिए अक्तूबर 2025 में ही बैठक हुई थी, लेकिन पंचायत चुनाव और अन्य कारणों से पोर्टल नहीं खुल सका। अब तक 182 ग्राम पंचायतों से कार्ययोजना प्राप्त हो चुकी है। -किरन वर्मा, प्रभारी जिला पंचायतीराज अधिकारी, मऊ