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मुख्तार के करीबी पर पुलिस प्रशासन का शिकंजा
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मऊ नगर के भीटी स्थित उमेश सिंह के शापिंग काम्पलेक्स की कुर्की के दौरान मौजूद सीओ और अन्य पुलिस। अ?
- फोटो : MAU
मऊ। पुलिस प्रशासन का डंडा मंगलवार को मुख्तार के एक और करीबी पर चल गया। अहिलाद गांव के मूल निवासी और वर्तमान में सिविल लाइंस इलाके में रहने वाले मुख्तार के चहेते ठेकेदार, कोयला माफिया और ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड में मुख्तार के साथ सह अभियुक्त रहे उमेश सिंह के भीटी चौराहे के पास स्थित लगभग साढ़े पांच करोड़ के शापिंग माल को पुलिस ने जब्त कर लिया। पुलिस ने उमेश की लग्जरी कारों सहित लगभग एक करोड़ रुपये के वाहन भी जब्त कर लिया। पुलिस ने जब्ती की यह कार्रवाई 14 गैंगेस्टर एक्ट के तहत किया। सीओ सिटी नरेश कुमार के नेतृत्व में शहर के तीनों थानों की पुलिस ने डुगडुगी बजवाकर संपत्तियों की जब्ती की यह कार्रवाई की।
पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के अत्यंत नजदीकी व मन्ना सिंह हत्याकांड में सह-अभियुक्त रहे, कोयला माफिया व त्रिदेव ग्रुप के मालिक उमेश सिंह की 6.5 करोड़ की सम्पत्ति 14(1) गैंगस्टर एक्ट की तहत पुलिस द्वारा जब्त की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस के द्वारा आपराधिक माफिया व उनके गुर्गों के विरुद्ध की जा रही कार्यवाही के क्रम में मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के अत्यंत नजदीकी व मुख्तार अंसारी के साथ मन्ना सिंह हत्याकांड 2009 में सह अभियुक्त रहे त्रिदेव कंस्ट्रक्शन, त्रिदेव कोल डिपो और त्रिदेव ग्रुप के मालिक कोयला माफिया अहिलाद गांव के मूल निवासी उमेश सिंह की 14(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत लगभग 6.5 करोड़ की अपराध व अवैध रूप से अर्जित धन से बनाई गई संपत्ति जब्त की गई है।
सीओ सीटी के नेतृत्व में कोतवाली, सरायलखंसी व दक्षिणटोला के थाना प्रभारियों और स्वाट टीम के ने उमेश सिंह के द्वारा अपराध से अवैध रूप से अर्जित किए गए धन से लगभग 3400 वर्ग मीटर भूखंड पर निर्मित शापिंग मॉल, कंपलेक्स जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 5.5 करोड़ जब्त कराई गई । इसके साथ ही लगभग एक करोड़ मूल्य के आठ वाहनों (फोर्ड एनडेवर एक, हुंडई क्रेटा दो, इंडिका एक, ट्रक एक, मोटरसाइकिल -तीन) को धारा 14 (1)गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत एफआईआर नंबर 47/2010 धारा 3(1) गैंगस्टरएक्ट के तहत जब्त कराई गई।
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एसपी ने बताया कि उमेश सिंह की कुल लगभग 6.5 करोड़ कीमत की प्रॉपर्टी जब्त कराई गई है। उन्होंने बताया कि उमेश सिंह त्रिदेव कंस्ट्रक्शन कंपनी, त्रिदेव कोल डिपो, त्रिदेव ग्रुप का संचालन अपने भाई राजन सिंह उर्फ राजेश सिंह के साथ मिलकर करता है। इसके द्वारा मुख्तार अंसारी व उसके गिरोह की आर्थिक रूप से मदद पिछले 20 सालों से की जाती रही है। एसपी ने बताया कि 2009 में ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड में उमेश सिंह मुख्तार अंसारी के साथ सह अभियुक्त था। इसी केस के बाद सन 2010 में मुख्तार अंसारी, उमेश सिंह व अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध शहर कोतवाली में एफआईआर नंबर 47/2010 धारा 3 (1)गैंगस्टर एक्ट दर्ज की गई।
दो की हत्या में मुख्तार के साथ सहअभियुक्त है करीबी
एसपी ने बताया कि मन्ना सिंह हत्याकांड में गवाह राम सिंह मौर्य व उनकी सुरक्षा में लगे सिपाही सतीश की सन 2010 में गोली मारकर कर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में थाना दक्षिण टोला में दर्ज एफआईआर नम्बर 399/2010 में उमेश सिंह का भाई राजन सिंह मुख्तार अंसारी के साथ सह अभियुक्त था। इस हत्याकांड के संबंध में थाना दक्षिणटोला में एफआईआर नम्बर 891/2010 धारा 3(1) गैंगस्टर एक्ट का अभियोग विरुद्ध मुख्तार अंसारी, राजन सिंह व अन्य आरोपियों के विरुद्ध 2010 में दर्ज किया गया। एसपी ने बताया कि इसके अलावा भी उमेश सिंह व राजन सिंह के विरुद्ध छह मुकदमे दर्ज है।
मुख्तार के नाम पर कोयला कारोबार में बनाई मोनोपोली
मऊ। एसपी ने बताया कि पिछले दो दशकों के दौरान उमेश सिंह व राजन सिंह ने मुख्तार अंसारी व गिरोह के मुख्यशरणदाता व आर्थिक मददगार के रूप में अत्यंत सक्रिय व अग्रणी भूमिका में रहे है। माफिया मुख्तार से संबंधों का फायदा उठाकर इंदारा में कोल डिपो स्थापित कर मोनोपोली बनाते हुए कोयला माफिया के रूप में इन दोनों के द्वारा अर्जित धन से मुख्तार अंसारी गिरोह की फंडिंग लंबे समय से की जाने की भी बात प्रकाश में आई है।
उमेश और राज ने माफिया मुख्तार और उसके गिरोह से संबंध का इस्तेमाल करते हुए कोयले के व्यापार में अपनी मोनोपोली स्थापित करते हुए जनपद के अन्य व्यापारियों में भय व आतंक का माहौल पैदा कर दिया जिससे अन्य कोई व्यक्ति कोयला व्यापार में नहीं आया। इस प्रकार गैंग के रूप में जघन्य अपराधों के माध्यम से उमेश और राजन ने अवैध धन का इस्तेमाल अपराधियों को संरक्षण देने के साथ साथ अपने बिजनेस में लगा कर त्रिदेव के नाम से अलग अलग कंपनियां खोलकर किया।
एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि इनके द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति की जांच विभिन्न विभागों व एजेंसियों के माध्यम से भी कराई जा रही है। एसपी ने बताया कि पिछले 50 दिनों में जनपद की पुलिस गैंग संचालित करने वाले माफिया तत्वों के विरुद्ध 14(1) गैंगस्टर एक्ट में अब तक लगभग 16 करोड़ के मूल्य की सम्पत्ति जब्त कराई जा चुकी है।
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पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के अत्यंत नजदीकी व मन्ना सिंह हत्याकांड में सह-अभियुक्त रहे, कोयला माफिया व त्रिदेव ग्रुप के मालिक उमेश सिंह की 6.5 करोड़ की सम्पत्ति 14(1) गैंगस्टर एक्ट की तहत पुलिस द्वारा जब्त की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस के द्वारा आपराधिक माफिया व उनके गुर्गों के विरुद्ध की जा रही कार्यवाही के क्रम में मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के अत्यंत नजदीकी व मुख्तार अंसारी के साथ मन्ना सिंह हत्याकांड 2009 में सह अभियुक्त रहे त्रिदेव कंस्ट्रक्शन, त्रिदेव कोल डिपो और त्रिदेव ग्रुप के मालिक कोयला माफिया अहिलाद गांव के मूल निवासी उमेश सिंह की 14(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत लगभग 6.5 करोड़ की अपराध व अवैध रूप से अर्जित धन से बनाई गई संपत्ति जब्त की गई है।
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सीओ सीटी के नेतृत्व में कोतवाली, सरायलखंसी व दक्षिणटोला के थाना प्रभारियों और स्वाट टीम के ने उमेश सिंह के द्वारा अपराध से अवैध रूप से अर्जित किए गए धन से लगभग 3400 वर्ग मीटर भूखंड पर निर्मित शापिंग मॉल, कंपलेक्स जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 5.5 करोड़ जब्त कराई गई । इसके साथ ही लगभग एक करोड़ मूल्य के आठ वाहनों (फोर्ड एनडेवर एक, हुंडई क्रेटा दो, इंडिका एक, ट्रक एक, मोटरसाइकिल -तीन) को धारा 14 (1)गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत एफआईआर नंबर 47/2010 धारा 3(1) गैंगस्टरएक्ट के तहत जब्त कराई गई।
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एसपी ने बताया कि उमेश सिंह की कुल लगभग 6.5 करोड़ कीमत की प्रॉपर्टी जब्त कराई गई है। उन्होंने बताया कि उमेश सिंह त्रिदेव कंस्ट्रक्शन कंपनी, त्रिदेव कोल डिपो, त्रिदेव ग्रुप का संचालन अपने भाई राजन सिंह उर्फ राजेश सिंह के साथ मिलकर करता है। इसके द्वारा मुख्तार अंसारी व उसके गिरोह की आर्थिक रूप से मदद पिछले 20 सालों से की जाती रही है। एसपी ने बताया कि 2009 में ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड में उमेश सिंह मुख्तार अंसारी के साथ सह अभियुक्त था। इसी केस के बाद सन 2010 में मुख्तार अंसारी, उमेश सिंह व अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध शहर कोतवाली में एफआईआर नंबर 47/2010 धारा 3 (1)गैंगस्टर एक्ट दर्ज की गई।
दो की हत्या में मुख्तार के साथ सहअभियुक्त है करीबी
एसपी ने बताया कि मन्ना सिंह हत्याकांड में गवाह राम सिंह मौर्य व उनकी सुरक्षा में लगे सिपाही सतीश की सन 2010 में गोली मारकर कर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में थाना दक्षिण टोला में दर्ज एफआईआर नम्बर 399/2010 में उमेश सिंह का भाई राजन सिंह मुख्तार अंसारी के साथ सह अभियुक्त था। इस हत्याकांड के संबंध में थाना दक्षिणटोला में एफआईआर नम्बर 891/2010 धारा 3(1) गैंगस्टर एक्ट का अभियोग विरुद्ध मुख्तार अंसारी, राजन सिंह व अन्य आरोपियों के विरुद्ध 2010 में दर्ज किया गया। एसपी ने बताया कि इसके अलावा भी उमेश सिंह व राजन सिंह के विरुद्ध छह मुकदमे दर्ज है।
मुख्तार के नाम पर कोयला कारोबार में बनाई मोनोपोली
मऊ। एसपी ने बताया कि पिछले दो दशकों के दौरान उमेश सिंह व राजन सिंह ने मुख्तार अंसारी व गिरोह के मुख्यशरणदाता व आर्थिक मददगार के रूप में अत्यंत सक्रिय व अग्रणी भूमिका में रहे है। माफिया मुख्तार से संबंधों का फायदा उठाकर इंदारा में कोल डिपो स्थापित कर मोनोपोली बनाते हुए कोयला माफिया के रूप में इन दोनों के द्वारा अर्जित धन से मुख्तार अंसारी गिरोह की फंडिंग लंबे समय से की जाने की भी बात प्रकाश में आई है।
उमेश और राज ने माफिया मुख्तार और उसके गिरोह से संबंध का इस्तेमाल करते हुए कोयले के व्यापार में अपनी मोनोपोली स्थापित करते हुए जनपद के अन्य व्यापारियों में भय व आतंक का माहौल पैदा कर दिया जिससे अन्य कोई व्यक्ति कोयला व्यापार में नहीं आया। इस प्रकार गैंग के रूप में जघन्य अपराधों के माध्यम से उमेश और राजन ने अवैध धन का इस्तेमाल अपराधियों को संरक्षण देने के साथ साथ अपने बिजनेस में लगा कर त्रिदेव के नाम से अलग अलग कंपनियां खोलकर किया।
एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि इनके द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति की जांच विभिन्न विभागों व एजेंसियों के माध्यम से भी कराई जा रही है। एसपी ने बताया कि पिछले 50 दिनों में जनपद की पुलिस गैंग संचालित करने वाले माफिया तत्वों के विरुद्ध 14(1) गैंगस्टर एक्ट में अब तक लगभग 16 करोड़ के मूल्य की सम्पत्ति जब्त कराई जा चुकी है।