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पड़ोसी मुल्क से कह दो न फेंके तंज के हम पर पत्थर
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:14 AM IST
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नगर के ब्लॉक के पास आश्रम मैदान में घोसी संघर्ष समिति के तत्वाधान में सोमवार को कवि सम्मलेन और मुशायरे का आयोजन किया गया। मुंबई से आए हास्य टीवी कलाकार शफीक रंगरेज ने लोगों को खूब गुदगुदाया। कवियों और शायरों ने गंगा जमुनी तहजीब की बयार बहायी।
मऊ के युवा शायर फारूक दिलकश ने अपने कलाम में कहा कि पड़ोसी मुल्क से कह दो न फेंके तंज के पत्थर ,हम अपने दिल के शीशे में ये हिंदुस्तान रखते हैं।
इससे पहले कार्यक्रम के शुरूआत में मुंबई के टीवी कलाकार शफीक रंगरेज ने सनी देओल, मिथुन चक्रवर्ती आदि अभिनेताओं की आवाज की नकल करने के साथ ट्रेन और पक्षियों की आवाज निकाल कर भीड़ को खूब हँसाया।
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लखीमपुर खीरी से आईं कवित्री रंजना सिंह ने भली होती है जमाने में महक देने को, तुम इनसे प्यार करो तोड़ने की मत सोचो सुनाया। अंबेडकर नगर की चांदनी शबनम ने अपने दिलकश अंदाज में अपने शेर से प्रेम का संदेश दिया।
उन्होंने सुनाया जरा सी बात पर मुझसे खफा नहीं होना, तेरे लिए ही तो दुनिया भुला के बैठी हूँ, तुझे कसम है कि कभी बेवफा नहीं होना। शायर ख़ैराबादी ने अपने कलाम मुल्क तेरे नाम पर मेरी शहादत हो गई, मौत मेरी जिंदगी से खूबसूरत हो गई। संचालन कर रहे अकमल अदीम ने यूं बया किया।
मैं मुहब्बत हूँ मेरा नाम है उर्दू साहब, मेरा हो जाएगा जो अपना बनाये मुझको। इसके अलावा विपीन बिहारी पाठक, आमिर फ़ैजाबादी, गुड्डू यादव, अजमुल होदा, ख़ैरुलबशर, तारिक, तनवीर ने कवियों व शायरों ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम के आयोजक अरविंद पांडेय व नौशाद अजीम ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
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मऊ के युवा शायर फारूक दिलकश ने अपने कलाम में कहा कि पड़ोसी मुल्क से कह दो न फेंके तंज के पत्थर ,हम अपने दिल के शीशे में ये हिंदुस्तान रखते हैं।
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इससे पहले कार्यक्रम के शुरूआत में मुंबई के टीवी कलाकार शफीक रंगरेज ने सनी देओल, मिथुन चक्रवर्ती आदि अभिनेताओं की आवाज की नकल करने के साथ ट्रेन और पक्षियों की आवाज निकाल कर भीड़ को खूब हँसाया।
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लखीमपुर खीरी से आईं कवित्री रंजना सिंह ने भली होती है जमाने में महक देने को, तुम इनसे प्यार करो तोड़ने की मत सोचो सुनाया। अंबेडकर नगर की चांदनी शबनम ने अपने दिलकश अंदाज में अपने शेर से प्रेम का संदेश दिया।
उन्होंने सुनाया जरा सी बात पर मुझसे खफा नहीं होना, तेरे लिए ही तो दुनिया भुला के बैठी हूँ, तुझे कसम है कि कभी बेवफा नहीं होना। शायर ख़ैराबादी ने अपने कलाम मुल्क तेरे नाम पर मेरी शहादत हो गई, मौत मेरी जिंदगी से खूबसूरत हो गई। संचालन कर रहे अकमल अदीम ने यूं बया किया।
मैं मुहब्बत हूँ मेरा नाम है उर्दू साहब, मेरा हो जाएगा जो अपना बनाये मुझको। इसके अलावा विपीन बिहारी पाठक, आमिर फ़ैजाबादी, गुड्डू यादव, अजमुल होदा, ख़ैरुलबशर, तारिक, तनवीर ने कवियों व शायरों ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम के आयोजक अरविंद पांडेय व नौशाद अजीम ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।