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भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी नवजागरण के अग्रदूत : डॉ. उदय प्रताप सिंह
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नगर के डीसीएसके पीजी कॉलेज सभागार में बुधवार को भारतेंदु जयंती के अवसर पर ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र और भारतबोध’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। आयोजन डीसीएसके पीजी कॉलेज, मऊ और हिन्दुस्तानी एकेडेमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
मुख्य अतिथि हिन्दुस्तानी एकेडेमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी नवजागरण का अग्रदूत बताते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने भारतेंदु युग की चार प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान के लिए भारतेंदु के प्रयासों को रेखांकित किया।
सुदृष्टि बाबा पीजी कॉलेज, रानीगंज (बलिया) के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह और जनता पीजी कॉलेज, रानीपुर के प्राध्यापक डॉ. रामप्रवेश सिंह ने भी विचार रखे।
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अध्यक्षीय संबोधन में डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सर्वेश पांडेय ने भारतेंदु के प्रसिद्ध प्रहसन ‘अंधेर नगरी’ का उल्लेख करते हुए तत्कालीन औपनिवेशिक शासन व्यवस्था पर उनके व्यंग्य और प्रहार को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्रद्युम्न कुमार पासवान ने किया, जबकि संचालन अभय कुमार राय ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक चंद्रप्रकाश राय, डॉ. आनंद प्रकाश द्विवेदी सहित शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि हिन्दुस्तानी एकेडेमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी नवजागरण का अग्रदूत बताते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने भारतेंदु युग की चार प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान के लिए भारतेंदु के प्रयासों को रेखांकित किया।
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सुदृष्टि बाबा पीजी कॉलेज, रानीगंज (बलिया) के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह और जनता पीजी कॉलेज, रानीपुर के प्राध्यापक डॉ. रामप्रवेश सिंह ने भी विचार रखे।
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अध्यक्षीय संबोधन में डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सर्वेश पांडेय ने भारतेंदु के प्रसिद्ध प्रहसन ‘अंधेर नगरी’ का उल्लेख करते हुए तत्कालीन औपनिवेशिक शासन व्यवस्था पर उनके व्यंग्य और प्रहार को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्रद्युम्न कुमार पासवान ने किया, जबकि संचालन अभय कुमार राय ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक चंद्रप्रकाश राय, डॉ. आनंद प्रकाश द्विवेदी सहित शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।