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Mau News: जान जोखिम में डालकर स्नान करते हैं लोग
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दोहरीघाट। पौराणिक नगरी होने के बाद भी कस्बा स्थित सरयू नदी पर पक्का घाट का निर्माण नहीं किया जा सका है। कस्बा स्थित मुक्तिधाम गौरीशंकर स्नान घाट की स्थिति दिन पर दिन भयावह होती जा रही है। शव यात्री जान जोखिम में डालकर 50 फीट नीचे सरयू नदी में स्नान करने उतर रहे हैं। जबकि यहां पर स्नान करना मौत को दावत देना है। जबकि इस गंभीर समस्या से प्रशासन भी मौन साधे हुए है। जबकि किसी भी दिन बड़ी घटना हो सकती है। गौरीशंकर स्नान घाट की स्थिति पूरी तरह भयावह होती जा रही है। घाट के पास गहरी खाई बनती जा रही है। उसके बाद भी लोग बोल्डर पत्थर को पकड़कर कर गहरी नदी में उतरकर शव यात्री स्नान कर रहे हैं, जो खुद मौत को दावत दे रहे हैं। नदी में उतरते समय अगर बोल्डर खिसक गया तो भी इन शव यात्रीयो की जा जा सकती है। जबकि घाट की सीढि़या पूरी तरह से नदी की धारा मे विलिन हो गई हैं। उसके बाद भी लोग इस घाट पर स्नान कर रहे है ।गौरीशंकर घाट पर नदी की गहराई करीब 50 फीट होगी जो देखने से गहरी झील दिखाई दे रही है। जबकि नगर पंचायत चेतावनी बोर्ड भी नही लगा रहा है।मुक्तिधाम श्मशान घाट पर प्रतिदिन करीब पांच से छ हजार के करीब शवयात्री स्नान करने आते है दुर्भाग्य है कि इस पौराणिक नगरी का। यहां पर एक भी पक्का स्नान घाट नहीं है।
इस संबंध में मुक्तिधाम सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. बीके श्रीवास्तव ने का कहना था कि गौरीशंकर स्नान घाट को संस्थान द्वारा बनवाया गया था लेकिन नदी की सीधे धारा यहीं पर आकर टकराने से यह घाट नदी की धारा में विलीन हो गया। शव यात्रियों के स्नान के लिए ऊपर झरना लगाया गया है। स्नान करने के लिए फिर भी लोग गहरी नदी में उतर कर स्नान कर मौत को दावद दे रहे है नदी में उतरते समय फिसल भी सकते हैं। बोल्डर भी गिर सकते हैं। उधर 60 करोड़ खर्च करने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है। यदि ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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इस संबंध में मुक्तिधाम सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. बीके श्रीवास्तव ने का कहना था कि गौरीशंकर स्नान घाट को संस्थान द्वारा बनवाया गया था लेकिन नदी की सीधे धारा यहीं पर आकर टकराने से यह घाट नदी की धारा में विलीन हो गया। शव यात्रियों के स्नान के लिए ऊपर झरना लगाया गया है। स्नान करने के लिए फिर भी लोग गहरी नदी में उतर कर स्नान कर मौत को दावद दे रहे है नदी में उतरते समय फिसल भी सकते हैं। बोल्डर भी गिर सकते हैं। उधर 60 करोड़ खर्च करने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है। यदि ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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