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Mau News: पानी के रिसाव से 12 गांवों में डूब जाती है धान की फसल
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मधुबन तहसील क्षेत्र के लौवासाथ गांव में स्थित रेगुलेटर पुलिया से पानी का रिसाव होने से दो साल से 12 गांवो में धान की फसल डूब जाती है।
बरसात के दिनों में सरयू नदी के साथ हाहा नाला का जलस्तर भी बढ़ने पर गांवो को बाढ़ से बचाने के लिए पुलिया में रेगुलेटर और फाटक लगाया गया। लेकिन उसका लाभ नहीं मिलता है।
हाहानाला और लौवासाथ गांव की पोखरी की पानी को नियंत्रित करने के लिए अहिरूपुर-लौवासाथ मार्ग पर 12 साल पहले पुलिया का निर्माण हुआ। नींव नीचे तक नहीं बनाने, सीमेंट लगाकर समतल नहीं किया गया, जिससे रेगुलेटर बंद होने पर बड़ी मात्रा में पानी का रिसाव होता है।
सुरेंद्र यादव, बुनेला सहानी, प्रदुम्न सहानी, पंचदेव आदि किसानों ने बताया कि बीते साल रिसाव होने से जब धान की फसल डूबने लगी तो, तहसील दिवस पर पहुंचकर मरम्मत कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था।
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वहां राजस्व विभाग के कर्मचारी पहुंचे, लेकिन मरम्मत नहीं हुआ। थक हार कर ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने चंदा लगाया और बालू से भरी बोरी वहां रखवाई, जिसके बाद रिसाव कुछ कम हुआ।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराने पर उन्होंने कहा रेगुलेटर के देखरेख की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।
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बरसात के दिनों में सरयू नदी के साथ हाहा नाला का जलस्तर भी बढ़ने पर गांवो को बाढ़ से बचाने के लिए पुलिया में रेगुलेटर और फाटक लगाया गया। लेकिन उसका लाभ नहीं मिलता है।
हाहानाला और लौवासाथ गांव की पोखरी की पानी को नियंत्रित करने के लिए अहिरूपुर-लौवासाथ मार्ग पर 12 साल पहले पुलिया का निर्माण हुआ। नींव नीचे तक नहीं बनाने, सीमेंट लगाकर समतल नहीं किया गया, जिससे रेगुलेटर बंद होने पर बड़ी मात्रा में पानी का रिसाव होता है।
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सुरेंद्र यादव, बुनेला सहानी, प्रदुम्न सहानी, पंचदेव आदि किसानों ने बताया कि बीते साल रिसाव होने से जब धान की फसल डूबने लगी तो, तहसील दिवस पर पहुंचकर मरम्मत कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था।
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वहां राजस्व विभाग के कर्मचारी पहुंचे, लेकिन मरम्मत नहीं हुआ। थक हार कर ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने चंदा लगाया और बालू से भरी बोरी वहां रखवाई, जिसके बाद रिसाव कुछ कम हुआ।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अवगत कराने पर उन्होंने कहा रेगुलेटर के देखरेख की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।