ओपीडी में समय से नहीं मिलते चिकित्सक
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जिला अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होने से मरीजों की परेशानी हो रही है। ओपीडी कक्ष से चिकित्सकों के नदारद रहने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। ईएनटी का एक पद रहने से ईएनटी ओपीडी हफ्ते में तीन दिन ही खुलता है। शुक्रवार को ओपीडी कक्ष संख्या-28, कक्ष संख्या चार तो खुला रहा, लेकिन चिकित्सक नदारद रहे। इसी तरह ओपीडी कक्ष संख्या एक बंद रहा। यह तो एक बानगी है।
ओपीडी कक्ष में चिकित्सकों के इधर उधर घूमते रहने से पीएचसी, सीएचसी के रेफर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल के ओपीडी हाल में 43 दवाओं का नाम दर्शाया गया है। इसमें 10 दवाओं के आगे क्रास लगाया गया है। कई दवाओं के आगे चाक से बनाया गया हां या नहीं का निशान मिट गया है। दवा काउंटर पर फार्मासिस्ट सभी मरीजों को एक, दो दवाएं देकर बाहर से दवा लेने के लिए कहा देते हैं।
अस्पताल में एमआर और पैथॉलाजी के दलालों का जमावड़ा लगा रहता है। चिकित्सक बाहर की महंगी दवाएं तो लिखते ही हैं। जांच भी बाहर कराने की सलाह देते हैं। अस्पताल में मधुबन से आई ममता यादव, फूलमती का कहना था कि अस्पताल में सुविधाओं का अभाव है। काउंटर से केवल दो दवा ही मिल रही है। बढुआगोदाम से आए विजय कुमार, रतनपुरा से सुखराम, शिवनाथ शर्मा का कहना है कि आपरेशन कराना है, लेकिन जिला अस्पताल में 15 दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके पांडेय का कहना है कि मरीजों को शासन से प्रदत्त सभी सुविधाएं दी जा रही हैं।