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जिले में 66 स्कूलों का ही हुआ ‘कायाकल्प’
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मऊ। आपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के जिले के 1052 विद्यालयों मेें काम शुरू हुआ था लेकिन दो वर्ष में सिर्फ 66 परिषदीय विद्यालयों का ही कायाकल्प हो सका है । हालांकि जिलाधिकारी ने कायाकल्प योजना के तहत अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी सेक्रेटरी तथा एडीओ पंचायत कार्य को पूरा कराने में रुचि ही नहीं ले रहे हैं। वित्तीय वर्ष में मात्र 15 दिन ही शेष हैं। वहीं दूसरी तरफ जिला पंचायतराज अधिकारी बजट की कमी बताई है।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। परिषदीय विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं से लैस करने के लिए वर्ष 2019 में आपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई। इसके तहत पानी, शौचालय, रैंप, रेलिंग, वाशिंग यूनिट, श्यामपट्ट, रंगाई पुताई, फर्श पर टाइल्ट लगाने के कार्य किए जाने थे। जिले में अभी तक सिर्फ 66 परिषदीय विद्यालयों का ही कायाकल्प हो सका है जबकि 1052 विद्यालयों मेें काम शुरू हुआ था। तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने योजना में रुचि ही नहीं ली। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रत्येक ब्लाक में एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया गया और गांवों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही सेक्रेटरी को भी जिम्मेदारी दी गई। स्थिति यह है कि विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराने की जगह सिर्फ नाले की सफाई, नाला निर्माण आदि कार्य ही कराए जा रहे हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी घनश्याम सागर ने बताया कि शासन की प्राथमिकता के तहत सामुदायिक शौचालयों निर्माण कार्य चल रहा है। बजट मिलते ही आपरेशन कायाकल्प के तहत अधूरे कार्यों को पूरा करा दिया जाएगा।
इन स्कूलों में अधर में लटके हैं कार्य
मऊ। परदहां ब्लाक क्षेत्र के बहरीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में कायाकल्प योजना के तहत कार्य शुरू किया गया लेकिन आधा अधूरा कार्य ही हुआ है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में दिव्यांग शौचालय बना ही नहीं है। जो शौचालय बना है उसपर ताला लटका रहता है। रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के दौलसपुुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कायाकल्प योजना के तहत माडल शौचालय बनाया गया जो मानक के प्रतिकूल बताया जा रहा है। यही हाल दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के शाहपुर गोठा स्थित कंपोजिट स्कूल का है। पानी की टंकी सहित अन्य कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं।
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आपरेशन कायाकल्प योजना के तहत अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए जिला पंचायतराज अधिकारी को पत्र भेजा गया है। - अशोक गौतम, प्रभारी बीएसए।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। परिषदीय विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं से लैस करने के लिए वर्ष 2019 में आपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई। इसके तहत पानी, शौचालय, रैंप, रेलिंग, वाशिंग यूनिट, श्यामपट्ट, रंगाई पुताई, फर्श पर टाइल्ट लगाने के कार्य किए जाने थे। जिले में अभी तक सिर्फ 66 परिषदीय विद्यालयों का ही कायाकल्प हो सका है जबकि 1052 विद्यालयों मेें काम शुरू हुआ था। तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने योजना में रुचि ही नहीं ली। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रत्येक ब्लाक में एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया गया और गांवों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही सेक्रेटरी को भी जिम्मेदारी दी गई। स्थिति यह है कि विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराने की जगह सिर्फ नाले की सफाई, नाला निर्माण आदि कार्य ही कराए जा रहे हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी घनश्याम सागर ने बताया कि शासन की प्राथमिकता के तहत सामुदायिक शौचालयों निर्माण कार्य चल रहा है। बजट मिलते ही आपरेशन कायाकल्प के तहत अधूरे कार्यों को पूरा करा दिया जाएगा।
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इन स्कूलों में अधर में लटके हैं कार्य
मऊ। परदहां ब्लाक क्षेत्र के बहरीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में कायाकल्प योजना के तहत कार्य शुरू किया गया लेकिन आधा अधूरा कार्य ही हुआ है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में दिव्यांग शौचालय बना ही नहीं है। जो शौचालय बना है उसपर ताला लटका रहता है। रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के दौलसपुुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कायाकल्प योजना के तहत माडल शौचालय बनाया गया जो मानक के प्रतिकूल बताया जा रहा है। यही हाल दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के शाहपुर गोठा स्थित कंपोजिट स्कूल का है। पानी की टंकी सहित अन्य कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं।
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आपरेशन कायाकल्प योजना के तहत अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए जिला पंचायतराज अधिकारी को पत्र भेजा गया है। - अशोक गौतम, प्रभारी बीएसए।