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Mau News: 400 की क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 13 यूनिट खून
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मऊ। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की कमी। 400 क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 13 यूनिट ही खून बचा है। इसी ब्लड बैंक के भरोसे जिला अस्पताल के अलावा महिला अस्पताल के साथ दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। उधर दूसरी तरफ नगर के तीन निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में खून है। खून नहीं होने से 10 से ज्यादा मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में 400 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक हैं, बुधवार की देर शाम कोपागंज से आए मनोज अपनी थेलेेसिमिया से पीड़ित बेटी को लेकर एक यूनिट बी पॉजीटिव खून लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे तो उन्हें बी पॉजीटिव ब्लड न होने की बात कही गई। जिसके बाद वह निजी अस्पताल पहुंचे, यहां एक डोनर से ब्लड डोनेट करवाकर बी पॉजीटिव ब्लड लेकर अपनी बेटी केा चढ़वाया।
इसी तरह से बीते तीन दिन में बी पॉजीटिव ब्लड लेने करीब 15 जरूरतमंद मरीजों के परिजनों को ब्लड बैंक कर्मियों ने लौटाया है, इसमें तो पांच मरीज जिला अस्पताल से पहुंचे थे। ब्लड बैंक कर्मियों के माने तो वर्तमान में चार ग्रुप में केवल दो ग्रुप ओ पॉजीटिव का 9 और एबी पॉजीटिव ग्रुप का 3 यूनिट ही खून बचा है, जबकि बी पॉजीटिव के साथ ए पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड बीते कई दिन से यहां नहीं है।
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सूत्रों की माने तो ब्लड बैंक केवल खुद से यहां आने वाले जागरूक संस्थाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि ब्लड बैंक में कई कर्मचारियों की तैनाती की गई है जो कि फील्ड में रहकर ब्लड डोनेशन कैंप के लिए संस्थाओं को जागरूक कर सकें। उधर बृहस्पवितार को बेहद कम स्टॉक के बाद ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सरिता द्वारा एक इमरजेंसी मीटिंग कर इस समस्या के समाधान पर चर्चा की गई। उधर ब्लड न होने से रोजाना 10 से ज्यादा मरीजों को नगर के निजी ब्लड बैंक पहुंचना पड़ रहा है।
दस से ज्यादा खपत, आवक दो से तीन यूनिट
मऊ। जिला अस्पताल में हर दिन 10 यूनिट से ज्यादा ब्लड की खपत होती है, लेकिन इसमें अधिकांश या तो फ्री वाले होते हैं या सिफारिश वाले, जिनके बदले में यह ब्लड डोनेट नहीं करते हैं। दस के बदले यहां केवल दो से तीन ही ब्लड यूनिट डोनेट कर ब्लड किया जाता है। वहीं इससे सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं के साथ सड़क हादसों में घायल होकर आने वाले मरीजों को होती है। प्रसव के दौरान करीब तीस फीसदी गर्भवती महिलाओं को ब्लड की जरूरत होती है।
ब्लड की कमी की बात सही है, बेहद कम स्टाॅक को लेकर बैठक कर शिविर लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में बिना डोनर के किसी को खून नहीं दिया जा रहा है। - डॉ. धनज्जय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल परिसर में 400 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक हैं, बुधवार की देर शाम कोपागंज से आए मनोज अपनी थेलेेसिमिया से पीड़ित बेटी को लेकर एक यूनिट बी पॉजीटिव खून लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे तो उन्हें बी पॉजीटिव ब्लड न होने की बात कही गई। जिसके बाद वह निजी अस्पताल पहुंचे, यहां एक डोनर से ब्लड डोनेट करवाकर बी पॉजीटिव ब्लड लेकर अपनी बेटी केा चढ़वाया।
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इसी तरह से बीते तीन दिन में बी पॉजीटिव ब्लड लेने करीब 15 जरूरतमंद मरीजों के परिजनों को ब्लड बैंक कर्मियों ने लौटाया है, इसमें तो पांच मरीज जिला अस्पताल से पहुंचे थे। ब्लड बैंक कर्मियों के माने तो वर्तमान में चार ग्रुप में केवल दो ग्रुप ओ पॉजीटिव का 9 और एबी पॉजीटिव ग्रुप का 3 यूनिट ही खून बचा है, जबकि बी पॉजीटिव के साथ ए पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड बीते कई दिन से यहां नहीं है।
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सूत्रों की माने तो ब्लड बैंक केवल खुद से यहां आने वाले जागरूक संस्थाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि ब्लड बैंक में कई कर्मचारियों की तैनाती की गई है जो कि फील्ड में रहकर ब्लड डोनेशन कैंप के लिए संस्थाओं को जागरूक कर सकें। उधर बृहस्पवितार को बेहद कम स्टॉक के बाद ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सरिता द्वारा एक इमरजेंसी मीटिंग कर इस समस्या के समाधान पर चर्चा की गई। उधर ब्लड न होने से रोजाना 10 से ज्यादा मरीजों को नगर के निजी ब्लड बैंक पहुंचना पड़ रहा है।
दस से ज्यादा खपत, आवक दो से तीन यूनिट
मऊ। जिला अस्पताल में हर दिन 10 यूनिट से ज्यादा ब्लड की खपत होती है, लेकिन इसमें अधिकांश या तो फ्री वाले होते हैं या सिफारिश वाले, जिनके बदले में यह ब्लड डोनेट नहीं करते हैं। दस के बदले यहां केवल दो से तीन ही ब्लड यूनिट डोनेट कर ब्लड किया जाता है। वहीं इससे सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं के साथ सड़क हादसों में घायल होकर आने वाले मरीजों को होती है। प्रसव के दौरान करीब तीस फीसदी गर्भवती महिलाओं को ब्लड की जरूरत होती है।
ब्लड की कमी की बात सही है, बेहद कम स्टाॅक को लेकर बैठक कर शिविर लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में बिना डोनर के किसी को खून नहीं दिया जा रहा है। - डॉ. धनज्जय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल