{"_id":"5759b66a4f1c1b23379c5df9","slug":"nursery-paddy-farmers-working-enthusiastically-in-putting","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान की नर्सरी डालने में उत्साह से जुटे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान की नर्सरी डालने में उत्साह से जुटे किसान
mau
Updated Fri, 10 Jun 2016 12:03 AM IST
विज्ञापन
किसानों को मिलेगी राहत
- फोटो : Getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैज्ञानिकों द्वारा अच्छा मानसून आने की भविष्यवाणी करने के बाद किसानों में उत्साह का माहौल है। काफी संख्या में किसान निजी संसाधनों से धान की नर्सरी डाल रखे हैं तो कुुछ मानसून का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो खाद बीज का की उपलब्धता लक्ष्य से अधिक है।
जिले में 94 हजार हेक्टेयर कृषि उपयोगी भूमि है। जिसमें 87306 हेक्टेयर उपजाऊं जमीन पर धान की खेती की जाती है। जिले में लगातार दो साल से सूूखा पड़ने से किसानों की कमर ही टूट गई है। वैज्ञानिकों द्वारा अच्छी बारिश की संभावना जताने के बाद किसान उत्साहित नजर आ रहे हैं। नहर व राजकीय नलकूपों के जवाब देने के बाद भी निजी संसाधनों से धान की नर्सरी डालने में किसान जुट गए हैं। गत वर्ष सूखा के चलते 85683 हेक्टेयर में ही धान की खेती हो पाई थी। इस वर्ष धान की फसल बुआई का लक्ष्य 87306 हेक्टेयर रखा गया है। जिले में खाद बीज का पर्याप्त स्टाक बताया जा रहा है। पूर्वांचल में धान के नकली बीज की आपूर्ति से किसान परेशान नजर आ रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से 86 सैंपल लेने के साथ ही 11दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं। जनपद में 92 साधन सहकारी समितियां हैं।
40 साधन सहकारी समितियों पर नगद पैसा जमा करने पर खाद की बिक्री की जाती है। जबकि 52 साधन सहकारी समितियों पर ऋण के माध्यम से खाद का वितरण किया जाता है।
खरीफ सीजन में यूरिया का लक्ष्य 7962 एमटी है। जिसके सापेक्ष 1121 एमटी यूरिया की उपलब्धता है। इसी तरह डीएपी का लक्ष्य 2084 एमटी के सापेक्ष 7450 एमटी की उपलब्धता है। समितियों पर 99.90 कुंतल धान का बीज उपलब्ध है। ला कृषि अधिकारी विकेश कुमार पटेल ने बताया कि जनपद में खाद बीज का पर्याप्त उपलब्धता है। उर्वरक, बीज विक्रेताओं पर नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में 94 हजार हेक्टेयर कृषि उपयोगी भूमि है। जिसमें 87306 हेक्टेयर उपजाऊं जमीन पर धान की खेती की जाती है। जिले में लगातार दो साल से सूूखा पड़ने से किसानों की कमर ही टूट गई है। वैज्ञानिकों द्वारा अच्छी बारिश की संभावना जताने के बाद किसान उत्साहित नजर आ रहे हैं। नहर व राजकीय नलकूपों के जवाब देने के बाद भी निजी संसाधनों से धान की नर्सरी डालने में किसान जुट गए हैं। गत वर्ष सूखा के चलते 85683 हेक्टेयर में ही धान की खेती हो पाई थी। इस वर्ष धान की फसल बुआई का लक्ष्य 87306 हेक्टेयर रखा गया है। जिले में खाद बीज का पर्याप्त स्टाक बताया जा रहा है। पूर्वांचल में धान के नकली बीज की आपूर्ति से किसान परेशान नजर आ रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से 86 सैंपल लेने के साथ ही 11दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं। जनपद में 92 साधन सहकारी समितियां हैं।
विज्ञापन
40 साधन सहकारी समितियों पर नगद पैसा जमा करने पर खाद की बिक्री की जाती है। जबकि 52 साधन सहकारी समितियों पर ऋण के माध्यम से खाद का वितरण किया जाता है।
खरीफ सीजन में यूरिया का लक्ष्य 7962 एमटी है। जिसके सापेक्ष 1121 एमटी यूरिया की उपलब्धता है। इसी तरह डीएपी का लक्ष्य 2084 एमटी के सापेक्ष 7450 एमटी की उपलब्धता है। समितियों पर 99.90 कुंतल धान का बीज उपलब्ध है। ला कृषि अधिकारी विकेश कुमार पटेल ने बताया कि जनपद में खाद बीज का पर्याप्त उपलब्धता है। उर्वरक, बीज विक्रेताओं पर नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन