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दूसरी बार कांग्रेस का प्रत्याशी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Wed, 22 Feb 2017 11:45 PM IST
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विधानसभा क्षेत्र से तीन बाद इस सीट से चुनाव जीत चुकी कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी इस बार चुनाव में नहीं है।यह सीट सपा के गठबंधन में चली जाने से यहां पर कांग्रेस का प्रचार करने वाला कोई नहीं है। आजादी के बाद दूसरी बार यह ऐसा अवसर है, जबकि इस चुनाव में कोई कांग्रेस का झंडा लेकर नहीं चल रहा है बल्कि सपा के प्रत्याशी के पक्ष में ही पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। इसके पूर्व 1974 में समझौते के चलते यहां कांग्रेस से प्रत्याशी नहीं खड़ा था।
घोसी विधानसभा सीट से प्रमुख दलों एवं निर्दल के रूप में कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सभी अपने सिंबल का प्रचार प्रसार कर लोगों से वोट मांग रहे हैं लेकिन कांग्रेस के चुनाव चिह्न को लेकर कोई भी चुनाव प्रचार नहीं कर रहा है। इसका प्रमुख कारण यहां से गठबंधन के चलते इस बार यह सीट सपा के खाते में दी गई है और सुधाकर सिंह यहां से सपा के प्रत्याशी हैं। घोसी विधान सभा में 4 मार्च को होने वाले मतदान में इस बार कांग्रेस पार्टी ने समझौते के तहत घोसी सीट से सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह के समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसको लेकर चुनाव में भाग्य आजमाने वाले कांग्रेसी दूसरे क्षेत्रों में जाकर कांग्रेस के प्रचार में लग गए है तो कुछ सपा को समर्थन दे रहे हैं।
इससे इस बार इवीएम मतें भी कांग्रेस का चुनाव चिह्न यहां देखने को नहीं मिलेगा। इस के पूर्व 1974 में कांग्रेस पार्टी का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता होने के चलते यहां से भाकपा के जफ़र आजमी चुनाव लड़े थे और कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव में नही रहा। आजादी के बाद जितने चुनाव हुये उन सभी में कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ा। हालांकि घोसी कांग्रेस का कभी गढ़ नहीं रहा। यहां से 1969, 1985, 1989 के चुनाव में कांग्रेस को विजय मिली थी।
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घोसी विधानसभा सीट से प्रमुख दलों एवं निर्दल के रूप में कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सभी अपने सिंबल का प्रचार प्रसार कर लोगों से वोट मांग रहे हैं लेकिन कांग्रेस के चुनाव चिह्न को लेकर कोई भी चुनाव प्रचार नहीं कर रहा है। इसका प्रमुख कारण यहां से गठबंधन के चलते इस बार यह सीट सपा के खाते में दी गई है और सुधाकर सिंह यहां से सपा के प्रत्याशी हैं। घोसी विधान सभा में 4 मार्च को होने वाले मतदान में इस बार कांग्रेस पार्टी ने समझौते के तहत घोसी सीट से सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह के समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसको लेकर चुनाव में भाग्य आजमाने वाले कांग्रेसी दूसरे क्षेत्रों में जाकर कांग्रेस के प्रचार में लग गए है तो कुछ सपा को समर्थन दे रहे हैं।
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इससे इस बार इवीएम मतें भी कांग्रेस का चुनाव चिह्न यहां देखने को नहीं मिलेगा। इस के पूर्व 1974 में कांग्रेस पार्टी का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता होने के चलते यहां से भाकपा के जफ़र आजमी चुनाव लड़े थे और कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव में नही रहा। आजादी के बाद जितने चुनाव हुये उन सभी में कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ा। हालांकि घोसी कांग्रेस का कभी गढ़ नहीं रहा। यहां से 1969, 1985, 1989 के चुनाव में कांग्रेस को विजय मिली थी।
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