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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   Life imprisonment to two, three years to one in case of murder and destruction of evidence.

Mau News: हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दो को आजीवन कारावास, एक को तीन साल की सजा

Mon, 08 Jun 2026 11:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:38 PM IST
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Life imprisonment to two, three years to one in case of murder and destruction of evidence.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1 बाकर शमीम रिजवी ने हत्या कर साक्ष्य मिटाने के मामले में नामजद तीन लोगों में से दो को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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वहीं एक आरोपी को साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा और 5 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया है। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही आदेश दिया गया है कि अर्थदंड की राशि में से 75 प्रतिशत मृतक सोनू साहनी के पिता जवाहर साहनी को दी जाएगी।
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अभियोजन के अनुसार, पारा कुर्थीजाफरपुर गांव निवासी जवाहर साहनी पुत्र स्व. कतवारू की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया था। वादी का आरोप था कि उसका पुत्र सोनू साहनी 25 फरवरी 2018 को घर से लापता हो गया था। उसके मोबाइल पर मेसेज आया था कि 8 लाख 32 हजार रुपये दे दो, नहीं तो तुम्हारे लड़के को मार दिया जाएगा।
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आरोप है कि बाद में उसके पुत्र की हत्या कर शव को छिपा दिया गया। पुलिस ने जांच के दौरान शव बरामद किया। विवेचना में शहर कोतवाली क्षेत्र के अंधा मोड़ भीटी निवासी रवि प्रकाश साहनी उर्फ रवि, चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के असलपुर निवासी राहुल सिंह उर्फ मृगेंद्र सिंह और दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी धीरज सोनकर का नाम सामने आया।
पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी फौजदारी ने आठ गवाह पेश कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की दलील दी।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर रवि प्रकाश साहनी और राहुल सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाया। दोनों को आजीवन कारावास के साथ 15-15 हजार रुपये अर्थदंड (हत्या के मामले में) तथा सात-सात वर्ष की सजा और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड (साक्ष्य मिटाने के मामले में) सुनाई गई।

अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास का आदेश भी दिया गया। वहीं धीरज सोनकर को साक्ष्य मिटाने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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