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कारगिल विजय दिवस : बाऊडीह गांव के हर दूसरे घर का बेटा सेना का जवान
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शहीद इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित प्रशिक्षण में निशुल्क सेना के लिए प्रशिक्षण लेते युवा
आज रविवार को कारगिल विजय दिवस है। मधुबन तहसील से करीब आठ किमी दूर मधुबन-मझवारा रोड पर बसे बाऊडीह गांव की कहानी खास है। दो हजार की आबादी वाले इस गांव के 100 घरों में हर दूसरे घर से एक सदस्य सेना में सेवा दे रहा है।
कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके सभी बेटे सेना में हैं। गांव में कई ऐसे परिवार भी हैं, जिनमें दादा भूतपूर्व सैनिक हैं तो बेटा सेना का जवान है। वहीं, पौत्र भी सैनिक बनने की तैयारी में जुटा हुआ है। गांव के ही राम प्रताप यादव ने बताया कि बाऊडीह गांव को जवानों का गांव कहा जाता है।
इस गांव में 50 फीसदी घरों में से कोई न कोई एक सदस्य सेना में नौकरी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गांव के विकास यादव, संतोष यादव, दिलीप यादव, राजीव यादव, अजय यादव, रोहित यादव, रामाश्रय यादव, विनय प्रकाश गुप्ता, दिलीप कुमार गुप्ता सहित 11 लोग आर्मी में हैं।
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रमेश यादव, जितेंद्र प्रजापति, सोनू यादव, मोनू यादव, राजीव गुप्ता अर्द्धसैनिक बल में सेवा दे रहे हैं। हरिशंकर यादव, गिरजा शंकर यादव, राणा प्रताप यादव, अंजनी यादव, संजय यादव, सुरेंद्र नाथ यादव, संजय यादव, काशीनाथ यादव, बृजेश कुमार, दिनेश कुमार गौतम, दीपक गौतम, हेमंत मद्धेशिया सहित कई युवाओं का नाम उन्होंने गिनाया, जो सेना में तैनात हैं।
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कई घरों के सभी बेटे सेना में दे रहे सेवा
इस गांव में ऐसे कई घर हैं, जहां घर के सभी बेटे सेना में हैं। गांव के रामअवध यादव ने बताया कि उनके दो पुत्र शैलेंद्र यादव तथा अरुण यादव दोनों ही सेना में तैनात हैं। ग्राम प्रधान झुनियां देवी ने बताया कि उन्हें इस गांव का प्रधान होने पर गर्व है, क्योंकि उन्हें जवानों के गांव का प्रधान कहकर संबोधित किया जाता है।
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कारगिल विजय के बाद सेना में बढ़ा पूर्वांचल का जुनून
बाऊडीह गांव निवासी वरुण यादव ने बताया कि वह और उनके भाई शैलेंद्र दोनों सेना में हैं। बड़े भाई शैलेंद्र सिंदूर ऑपरेशन में शामिल होने के बाद सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे हैं। वह वर्तमान में अब भी सेना में हवलदार के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि कारगिल के बाद सेना में पूर्वांचल का जुनून बढ़ा है। भले ही इस युद्ध को 27 साल होने जा रहे हैं, लेकिन आज युवाओं में सेना में जाने का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। महुवी निवासी बृजेश कुमार, जो सेना में भर्ती होने का निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं, ने बताया कि वह खुद सेना में जाना चाहते थे, लेकिन अपना सपना साकार नहीं कर सके। अब वह निशुल्क युवाओं को शहीद इंटर कॉलेज में सुबह के समय प्रशिक्षण देते हैं। नई पीढ़ी को कारगिल युद्ध के नायकों के बारे में जानकारी है, लेकिन यह जानकारी ‘बार्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ जैसी फिल्मों के चलते है। 12वीं की छात्रा अविका ने बताया कि उनकी उम्र 16 साल है। उन्हें कैप्टन बत्रा के बारे में पहले जानकारी नहीं थी। लेकिन 2003 में बनी ‘एलओसी: कारगिल’ फिल्म, जिसमें अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाई थी, उससे उन्हें इनके बारे में जानकारी हुई। वहीं, 10वीं के छात्र अमित ने बताया कि 2021 में आई ‘शेरशाह’ फिल्म, जिसमें कैप्टन बत्रा के पात्र में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने मुख्य भूमिका निभाकर उनकी वीरता को और गहराई से दिखाया, इसका असर उन पर काफी हुआ है।
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जिले में 5700 भूतपूर्व सैनिक
मऊ। जिले के रानीपुर ब्लॉक के ब्राह्मणपुरा निवासी जितेंद्रनाथ दुबे 2008 में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद आज भी सक्रिय होकर भूतपूर्व सैनिक जनकल्याण समिति के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 5700 भूतपूर्व सैनिक हैं। 1999 की सेना और वर्तमान की सेना में अंतर के सवाल पर उन्होंने कहा कि 1999 का कारगिल युद्ध पाकिस्तानियों का छद्म युद्ध था। वे पहले से पहाड़ियों पर छिपे थे, लेकिन वर्तमान समय के आधुनिक हथियारों की अपेक्षा उस समय के हथियारों से जवानों ने अपने हौसले और देश के प्रति जज्बे से पहाड़ियों पर छिपे आतंकियों को मार गिराया था। वहीं, 2021 में हवलदार पद से सेवानिवृत्त उदयराज यादव ने बताया कि आज जवानों के पास जज्बा, हौसलों के साथ आधुनिक हथियारों की सुविधा है। आधुनिक तकनीक, ड्रोन और निगरानी प्रणाली ने देश के सैनिकों की मजबूती को बढ़ा दिया है, जबकि 1999 में वर्तमान समय के सापेक्ष आधुनिक हथियार नहीं थे। संवाद
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कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके सभी बेटे सेना में हैं। गांव में कई ऐसे परिवार भी हैं, जिनमें दादा भूतपूर्व सैनिक हैं तो बेटा सेना का जवान है। वहीं, पौत्र भी सैनिक बनने की तैयारी में जुटा हुआ है। गांव के ही राम प्रताप यादव ने बताया कि बाऊडीह गांव को जवानों का गांव कहा जाता है।
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इस गांव में 50 फीसदी घरों में से कोई न कोई एक सदस्य सेना में नौकरी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गांव के विकास यादव, संतोष यादव, दिलीप यादव, राजीव यादव, अजय यादव, रोहित यादव, रामाश्रय यादव, विनय प्रकाश गुप्ता, दिलीप कुमार गुप्ता सहित 11 लोग आर्मी में हैं।
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रमेश यादव, जितेंद्र प्रजापति, सोनू यादव, मोनू यादव, राजीव गुप्ता अर्द्धसैनिक बल में सेवा दे रहे हैं। हरिशंकर यादव, गिरजा शंकर यादव, राणा प्रताप यादव, अंजनी यादव, संजय यादव, सुरेंद्र नाथ यादव, संजय यादव, काशीनाथ यादव, बृजेश कुमार, दिनेश कुमार गौतम, दीपक गौतम, हेमंत मद्धेशिया सहित कई युवाओं का नाम उन्होंने गिनाया, जो सेना में तैनात हैं।
कई घरों के सभी बेटे सेना में दे रहे सेवा
इस गांव में ऐसे कई घर हैं, जहां घर के सभी बेटे सेना में हैं। गांव के रामअवध यादव ने बताया कि उनके दो पुत्र शैलेंद्र यादव तथा अरुण यादव दोनों ही सेना में तैनात हैं। ग्राम प्रधान झुनियां देवी ने बताया कि उन्हें इस गांव का प्रधान होने पर गर्व है, क्योंकि उन्हें जवानों के गांव का प्रधान कहकर संबोधित किया जाता है।
कारगिल विजय के बाद सेना में बढ़ा पूर्वांचल का जुनून
बाऊडीह गांव निवासी वरुण यादव ने बताया कि वह और उनके भाई शैलेंद्र दोनों सेना में हैं। बड़े भाई शैलेंद्र सिंदूर ऑपरेशन में शामिल होने के बाद सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे हैं। वह वर्तमान में अब भी सेना में हवलदार के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि कारगिल के बाद सेना में पूर्वांचल का जुनून बढ़ा है। भले ही इस युद्ध को 27 साल होने जा रहे हैं, लेकिन आज युवाओं में सेना में जाने का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। महुवी निवासी बृजेश कुमार, जो सेना में भर्ती होने का निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं, ने बताया कि वह खुद सेना में जाना चाहते थे, लेकिन अपना सपना साकार नहीं कर सके। अब वह निशुल्क युवाओं को शहीद इंटर कॉलेज में सुबह के समय प्रशिक्षण देते हैं। नई पीढ़ी को कारगिल युद्ध के नायकों के बारे में जानकारी है, लेकिन यह जानकारी ‘बार्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ जैसी फिल्मों के चलते है। 12वीं की छात्रा अविका ने बताया कि उनकी उम्र 16 साल है। उन्हें कैप्टन बत्रा के बारे में पहले जानकारी नहीं थी। लेकिन 2003 में बनी ‘एलओसी: कारगिल’ फिल्म, जिसमें अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाई थी, उससे उन्हें इनके बारे में जानकारी हुई। वहीं, 10वीं के छात्र अमित ने बताया कि 2021 में आई ‘शेरशाह’ फिल्म, जिसमें कैप्टन बत्रा के पात्र में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने मुख्य भूमिका निभाकर उनकी वीरता को और गहराई से दिखाया, इसका असर उन पर काफी हुआ है।
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जिले में 5700 भूतपूर्व सैनिक
मऊ। जिले के रानीपुर ब्लॉक के ब्राह्मणपुरा निवासी जितेंद्रनाथ दुबे 2008 में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद आज भी सक्रिय होकर भूतपूर्व सैनिक जनकल्याण समिति के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि जिले में 5700 भूतपूर्व सैनिक हैं। 1999 की सेना और वर्तमान की सेना में अंतर के सवाल पर उन्होंने कहा कि 1999 का कारगिल युद्ध पाकिस्तानियों का छद्म युद्ध था। वे पहले से पहाड़ियों पर छिपे थे, लेकिन वर्तमान समय के आधुनिक हथियारों की अपेक्षा उस समय के हथियारों से जवानों ने अपने हौसले और देश के प्रति जज्बे से पहाड़ियों पर छिपे आतंकियों को मार गिराया था। वहीं, 2021 में हवलदार पद से सेवानिवृत्त उदयराज यादव ने बताया कि आज जवानों के पास जज्बा, हौसलों के साथ आधुनिक हथियारों की सुविधा है। आधुनिक तकनीक, ड्रोन और निगरानी प्रणाली ने देश के सैनिकों की मजबूती को बढ़ा दिया है, जबकि 1999 में वर्तमान समय के सापेक्ष आधुनिक हथियार नहीं थे। संवाद