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Mau News: जीवामृत से सुधर रही रासायनिक खादों से बिगड़ी खेती, अमृत उगा रहे 524 किसान

Sat, 31 Aug 2024 01:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 01:18 AM IST
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Jeevamrit is improving farming which was spoiled due to chemical fertilizers, 524 farmers are growing Amrit
परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत कोपागंज और घोसी ब्लॉक के 524 किसानों को अनुदान देकर जैविक खाद तैयार कराई जा रही है। इससे रासायनिक खादों से उपजाऊ मिट्टी को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके। एक साल पहले कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किए गए मृदा परीक्षण में कहीं 12 तो कहीं 15 फीसदी नाइट्रोजन की पुष्टी हुई थी। जबकि मिट्टी में नाइट्रोजन की अधिकतम मात्रा छह फीसदी होनी चाहिए।
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रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी कड़ी होती जा रही है। खेतों को नरम करने के लिए किसान रोटावेटर से जोताई कराते हैं। इससे किसानों के मित्र कीट कहे जाने वाले केंचुए मारे जाते हैं। यही कारण है कि ये खेतों से गायब हो चुके हैं। इन सब समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा कोपागंज के 269 और घोसी के 255 किसानों को अनुदान देकर जौविक खाद तैयार कराई जा रही है। ये एक तरह का प्रयोग है जो तीन साल तक चलेगा। प्रयोग सफल होने पर इन्हीं किसानों द्वारा अधिक मात्रा में जैविक खाद तैयार कराया जाएगा। पहले साल किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में एक हेक्टेयर जमीन के लिए खाद तैयार करने के लिए 12 हजार रुपये दिए गए थे। दूसरे वर्ष में 10 हजार और तीसरे वर्ष नौ हजार रुपये दिए जाएंगे। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत एएफसी इंडिया लिमिटेड द्वारा कोपागंज ब्लॉक के आठ और घोसी ब्लॉक के सात ग्राम पंचायतों में 524 किसानों से जैविक खेती कराई जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों के सहयोग से किसान हरी खाद, बीजामृत, जीवामृत और गोबर की सड़ी खाद से जैविक खेती में धान, बाजरा, गन्ना, सब्जी का अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। संवाद
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योजना का उद्देश्य
- पर्यावरण को प्रदूषण से बचाते हुए कम लागत वाली कृषि तकनीकी अपनाकर खेती करना।
- रसायनयुक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन और खेत की गुणवत्ता में सुधार करना।
- कृषि को लाभकारी बनाना और किसानों के आर्थिक स्तर को सुधारकर खेती को सम्मानजनक बनाना।
- जैविक खेती अपनाकर कृषि उत्पादन को स्थायित्व प्रदान करना।
- कृषि निवेश के मामले में किसान को आत्मनिर्भर बनाना।
- रसायन और पेस्टीसाइड्स मुक्त कृषि उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना।
इन गांवो के किसान कर रहे हैं जैविक खेती

कोपागंज और घोसी ब्लॉक के 15 ग्राम पंचायतों में किसानों के 20 समूह बनाए गए हैं। ब्लॉक स्तरीय कृषि अधिकारियों द्वारा हर सप्ताह इन समूहों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें कोपागंज ब्लॉक के धवरियासाथ, कुतुबपुर, अन्नुपार, पारा मुबारकपुर, बर्जला, जोगरी, मीरपुर, गौहरपुर के किसान जैविक खेती कर रहे हैं। घोसी ब्लॉक के लाड़नपुर, कल्याणपुर, हाजीपुर, लाखीपुर, दादनपुर और अरियासो में किसान जैविक खाद तैयार कर रहे हैं।
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आज से 30-35 वर्ष पहले किसान जैविक खेती करते थे। उस समय किसानों के पास रसायन नहीं था। बिना रसायन के पैदा अनाज खाकर लोग स्वस्थ रहते थे। रासायनिक खादों से खेतों की उर्वरा शक्ति समाप्त होती जा रही है। फिर से जैविक खेती का प्रचलन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किसानों को अनुदान धनराशि दी जा रही है। -उमेश यादव, वरिष्ठ सहायक, कृषि विभाग
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