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शोध परिणामों को किसानों तक पहुंचाना जरूरी : डॉ. एससी
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कुशमौर राष्ट्रीय सूक्ष्म जीव ब्यूरो में कार्यक्रम समाप्ति के बाद कृषि वैज्ञानिक। संवाद
भारतीय पादप रोग विज्ञान सोसायटी के तत्वावधान में राष्ट्रीय सम्मेलन और मिड ईस्टर्न जोनल मीट का आयोजन आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो कुश्मौर में किया गया। इसमें वक्ताओं ने शोध परिणामों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
सम्मेलन का मुख्य विषय पैथोजेंस, माइक्रोब्स एंड प्लांट डिफेंस ब्रिजिंग रिसर्च एंड एप्लिकेशंस था। सम्मेलन का उद्घाटन 28 जनवरी को हुआ था। समापन शुक्रवार को किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. एससी दुबे, कुलपति, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची रहे।
उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों और शोध निष्कर्षों को प्रभावी ढंग से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाना चाहिए। कहा कि कई बार प्रयोगशालाओं में प्राप्त सकारात्मक परिणाम किसानों के खेतों में उसी प्रभावशीलता के साथ परिलक्षित नहीं हो पाते।
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इस अंतर को कम करने के लिए शोध की तकनीकी और अनुप्रयोगिक कमियों को दूर करना आवश्यक है। डॉ. पीके चक्रवर्ती ने वैज्ञानिकों और कृषि-जैव उत्पाद निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर डॉ. एनके दुबे, डॉ. आर. विश्वनाथन, डॉ.. एचबी. सिंह, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव, डॉ. ए आनंदन उपस्थित रहे। संवाद
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सम्मेलन का मुख्य विषय पैथोजेंस, माइक्रोब्स एंड प्लांट डिफेंस ब्रिजिंग रिसर्च एंड एप्लिकेशंस था। सम्मेलन का उद्घाटन 28 जनवरी को हुआ था। समापन शुक्रवार को किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. एससी दुबे, कुलपति, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों और शोध निष्कर्षों को प्रभावी ढंग से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाना चाहिए। कहा कि कई बार प्रयोगशालाओं में प्राप्त सकारात्मक परिणाम किसानों के खेतों में उसी प्रभावशीलता के साथ परिलक्षित नहीं हो पाते।
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इस अंतर को कम करने के लिए शोध की तकनीकी और अनुप्रयोगिक कमियों को दूर करना आवश्यक है। डॉ. पीके चक्रवर्ती ने वैज्ञानिकों और कृषि-जैव उत्पाद निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर डॉ. एनके दुबे, डॉ. आर. विश्वनाथन, डॉ.. एचबी. सिंह, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव, डॉ. ए आनंदन उपस्थित रहे। संवाद