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Mau News: नहर किनारे फेंकी मिलीं कीड़ी मारने वाली दवाइयां, जांच में जुटा स्वास्थ्य विभाग
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मऊ-रतनपुरा। जिले का रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। कारण एक बार यहां करउत ग्राम पंचायत के तिलक ठाकुर गांव में नहर के पास मिट्ठी के ढेर में दबी सरकारी दवाइयां मिलीं। जांच में यह दवा सरकारी अस्पताल की है। दवाइयां मई 2022 में ही एक्सपायर हो चुकी हैं।
बृहस्पतिवार को रतनपुरा सीएचसी प्रभारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। दावा किया गया कि दवाइयां रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बैच से मिलान नहीं कर रही हैं। यह दवाइयां किसी अन्य अस्पताल की हैं।उधर, इस बार फिर से सरकारी दवाइयां को डंप करने की घटना को लेकर पूरे जिले में चर्चा है।
रतनपुरा सीएचसी प्रभारी डॉ. रामबदन यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार को तिलक ठाकुर के पास नहर किनारे दवाइयां मिलने की सूचना पर वह चीफ फार्मासिस्ट बीबी सिंह तथा फार्मासिस्ट मिथिलेश प्रसाद के साथ मौके पर पहुंचकर दवाइयों को संग्रहित किया। बताया कि दवाइयां बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन करीब दो पॉलीथिन में एकत्रित की गई। बताया कि दवाइयों की जांच करने पर पाया गया कि यह कीड़ी मारने की दवा है तो वहीं एक इनहेलर भी मिला।
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कीड़ी मारने वाली दवाइयों का बैच टीए 21107 तो इनहेलर का बैच नंबर एस02340 है। दोनों दवाइयां की एक्सपायर डेट मई 2022 है। बताया कि यह दवाईयां रतनपुरा सामुदायिक स्वास्क्य केंद्र की नहीं हैं। विभाग के आलाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह दवाइयां रतनपुरा सीएचसी की नहीं है तो घटनास्थल से 10 किमी दूर हलधरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सीमावर्ती जिले बलिया या गाजीपुर जिले के किसी सरकारी अस्पताल की हैं।
वर्जन
दवाइयां डंप करने का मामला संज्ञान में आते ही तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम में एक एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ के साथ चीफ फार्मासिस्ट शामिल हैं। इस मामले में टीम की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। - डॉ. नंदकुमार, सीएमओ, मऊ
गुलौरी प्रकरण की यादें हुईं ताजा, जिम्मेदारों की सक्रियता पर उठा सवाल
मऊ। रतनपुरा ब्लॉक के गुलौरी गांव में बीते 25 नवंबर 2022 में एक किसान के खेत में बने कुएं में बड़ी संख्या में सरकारी दवाइंयों की खेप मिली थी। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन विभाग की जांच में उस समय 36 से ज्यादा प्रकार की दवाइयों का मिलान किया गया था। इस मामले में जागरूक खेत के मालिक और किसान अरुण के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने तथा अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करने के बाद इस मामले को खुद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लेकर तत्कालीन सीएमओ डॉ. नरेश अग्रवाल को दिशा निर्देश जारी किया गया था।
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बृहस्पतिवार को रतनपुरा सीएचसी प्रभारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। दावा किया गया कि दवाइयां रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बैच से मिलान नहीं कर रही हैं। यह दवाइयां किसी अन्य अस्पताल की हैं।उधर, इस बार फिर से सरकारी दवाइयां को डंप करने की घटना को लेकर पूरे जिले में चर्चा है।
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रतनपुरा सीएचसी प्रभारी डॉ. रामबदन यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार को तिलक ठाकुर के पास नहर किनारे दवाइयां मिलने की सूचना पर वह चीफ फार्मासिस्ट बीबी सिंह तथा फार्मासिस्ट मिथिलेश प्रसाद के साथ मौके पर पहुंचकर दवाइयों को संग्रहित किया। बताया कि दवाइयां बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन करीब दो पॉलीथिन में एकत्रित की गई। बताया कि दवाइयों की जांच करने पर पाया गया कि यह कीड़ी मारने की दवा है तो वहीं एक इनहेलर भी मिला।
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कीड़ी मारने वाली दवाइयों का बैच टीए 21107 तो इनहेलर का बैच नंबर एस02340 है। दोनों दवाइयां की एक्सपायर डेट मई 2022 है। बताया कि यह दवाईयां रतनपुरा सामुदायिक स्वास्क्य केंद्र की नहीं हैं। विभाग के आलाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह दवाइयां रतनपुरा सीएचसी की नहीं है तो घटनास्थल से 10 किमी दूर हलधरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सीमावर्ती जिले बलिया या गाजीपुर जिले के किसी सरकारी अस्पताल की हैं।
वर्जन
दवाइयां डंप करने का मामला संज्ञान में आते ही तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम में एक एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ के साथ चीफ फार्मासिस्ट शामिल हैं। इस मामले में टीम की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। - डॉ. नंदकुमार, सीएमओ, मऊ
गुलौरी प्रकरण की यादें हुईं ताजा, जिम्मेदारों की सक्रियता पर उठा सवाल
मऊ। रतनपुरा ब्लॉक के गुलौरी गांव में बीते 25 नवंबर 2022 में एक किसान के खेत में बने कुएं में बड़ी संख्या में सरकारी दवाइंयों की खेप मिली थी। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन विभाग की जांच में उस समय 36 से ज्यादा प्रकार की दवाइयों का मिलान किया गया था। इस मामले में जागरूक खेत के मालिक और किसान अरुण के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने तथा अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करने के बाद इस मामले को खुद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लेकर तत्कालीन सीएमओ डॉ. नरेश अग्रवाल को दिशा निर्देश जारी किया गया था।