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Mau News: कटाई-मड़ाई के दौरान आंखों में धूल जाने से जलन, चुभन और लालिमा के बढ़े मरीज
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इन दिनों गेहूं की फसलों की कटाई-मड़ाई का सीजन चल रहा है। कटाई-मड़ाई के दौरान निकलने वाले धूल के बारीक कण काम के दौरान किसानों की आंखों में चले जाने से जलन, चुभन और लालिमा की समस्या बढ़ रही है।
ऐसे में जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में इस समय रोजाना सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टर किसानों को कटाई-मड़ाई के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
सप्ताह भर से नेत्र विभाग की ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। वहीं धूप और धूल उड़ने की वजह से जिले में आई फ्लू के मामले भी बढ़ने लगे हैं।
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नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि कटाई-मड़ाई के दौरान उड़ने वाली धूल, मिट्टी और तिनके किसानों की आंखों में चले जाते हैं। इससे आंख की पारदर्शी झिल्ली में सूजन व संक्रमण की समस्या हो रही है।
आंखों में सूजन, पानी आना और चिपचिपाहट जैसे लक्षण दिख रहे हैं। इसे ठीक होने में लगभग एक सप्ताह का समय लग रहा है। मरीजों को दवाएं देते हुए सलाह दी कि कपड़े में बर्फ रखकर आंखों की सिकाई करें। ताजे पानी से आंखों में छींटे मारने के बाद ही दवा डालें।
उन्होंने बताया कि गर्मियों में आंखों में लालिमा और दाने भी हो जाते हैं। कुछ मरीज बिना परामर्श और जांच के स्वयं दवा ले लेते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। मरीजों को एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड वाले ड्रॉप बिना चिकित्सक की सलाह के आंखों में नहीं डालने चाहिए। इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा रहता है।
बताया कि धूप से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय चश्मा पहनें। बाहर से आने के बाद साफ पानी से आंखों को धोएं। गंदे कपड़े या संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों से आंखों को न पोंछें। यदि आंखों में किसी तरह की समस्या हो, तो चिकित्सक को दिखाकर ही दवा लें।
ऐसे करें आंखों की देखभाल
कटाई-मड़ाई के दौरान चश्मा पहनें
बाइक चलाते समय मुंह को रुमाल से बांधकर रखें
तेज हवा में बाइक चलाते समय हेल्मेट व चश्मा पहनें
आंखों पर ठंडे पानी के छींटे बार-बार मारते रहें
डॉक्टर की सलाह से ही आई ड्रॉप डालें
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ऐसे में जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में इस समय रोजाना सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टर किसानों को कटाई-मड़ाई के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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सप्ताह भर से नेत्र विभाग की ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। वहीं धूप और धूल उड़ने की वजह से जिले में आई फ्लू के मामले भी बढ़ने लगे हैं।
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नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि कटाई-मड़ाई के दौरान उड़ने वाली धूल, मिट्टी और तिनके किसानों की आंखों में चले जाते हैं। इससे आंख की पारदर्शी झिल्ली में सूजन व संक्रमण की समस्या हो रही है।
आंखों में सूजन, पानी आना और चिपचिपाहट जैसे लक्षण दिख रहे हैं। इसे ठीक होने में लगभग एक सप्ताह का समय लग रहा है। मरीजों को दवाएं देते हुए सलाह दी कि कपड़े में बर्फ रखकर आंखों की सिकाई करें। ताजे पानी से आंखों में छींटे मारने के बाद ही दवा डालें।
उन्होंने बताया कि गर्मियों में आंखों में लालिमा और दाने भी हो जाते हैं। कुछ मरीज बिना परामर्श और जांच के स्वयं दवा ले लेते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। मरीजों को एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड वाले ड्रॉप बिना चिकित्सक की सलाह के आंखों में नहीं डालने चाहिए। इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा रहता है।
बताया कि धूप से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय चश्मा पहनें। बाहर से आने के बाद साफ पानी से आंखों को धोएं। गंदे कपड़े या संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों से आंखों को न पोंछें। यदि आंखों में किसी तरह की समस्या हो, तो चिकित्सक को दिखाकर ही दवा लें।
ऐसे करें आंखों की देखभाल
कटाई-मड़ाई के दौरान चश्मा पहनें
बाइक चलाते समय मुंह को रुमाल से बांधकर रखें
तेज हवा में बाइक चलाते समय हेल्मेट व चश्मा पहनें
आंखों पर ठंडे पानी के छींटे बार-बार मारते रहें
डॉक्टर की सलाह से ही आई ड्रॉप डालें