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सांप डसे तो अंधविश्वास का कुचलें फन, इलाज कराकर बचाएं जान

Sat, 29 Aug 2020 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 11:09 PM IST
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If the snake bites, save your life by getting treatment
मऊ। बरसात के दिनों में सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा होती हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल से लेकर ग्रामीण अंचलों की सीएचसी और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी वेनम उपलब्ध है। इसके बाद भी लोग सर्पदंश का शिकार होने के बाद झाड़फूंक का सहारा लेकर अपनी जान गंवा रहें हैं। बीते एक सप्ताह में जिले में सर्पदंश से चार की मौत हुई है। झांड़फूंक से निराशा होने पर मरीज उपचार कराने के लिए अस्पताल पहुंचता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सीएमओ डॉ. एससी सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम को देखते हुए जिले में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है।
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जिले में सर्पदंश से हर साल करीब 15 से अधिक मौतें होती हैं। इसमें कुछ मरीजों को देर से उपचार मिलता है तो अधिकांश झाड़फूंक में अपनी आस्था रखते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण इनकी जागरुकता का अभाव और अंधविश्वास का परचम है। लोग सर्पदंश होने पर झाड़फूंक कराने के लिए अमवा के सती माई जैसे स्थानों पर जाते हैं। डाक्टरों का कहना है कि सर्पदंश का शिकार व्यक्ति का यदि समय से उपचार किया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। वर्तमान में जिले के दोहरीघाट, सूरजपुर, रसूलपुर, मधुबन के देवरांचल का क्षेत्र तो बाढ़ से ग्रसित है। इससे इन क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा हो रहीं हैं। इस माह सर्पदंश के दस से ज्यादा मामले आ चुके हैं, जिसमें 30 फीसदी मरीजों की मौत झाड़फूंक के चक्कर में हुई।
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हदस में लोग गवां देतेेे हैं जान
सदर अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि कोई जरूरी नहीं की हर सांप जहरीला हो, सांपों की बहुत सी प्रजाति विष रहित होती है। बहुत से सांप ऐसे होते है जिनका जहर सिर्फ चूहे और पक्षियों पर होता है। हालांकि इनका जहर पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए घातक हो सकता है पर जान नहीं ले सकता है। ग्रीन वाइन स्नेक तथा कैट स्नेक। जब ये किसी को काटते हैं, तो काटे हुए स्थान में 3-4 घंटे दर्द और सूजन रहता है। सांपों में केवल नाग, करैत और वाईपर की 13 प्रजातियां की खतनराक और जानलेवा होती है। जबकि अजगर, धामिन, ड़ोढ़िया, हुरहुरिया सांप बिना जहर के होते है। इन सांपों के काटने पर भी लोग हदस कर अपनी जान गंवा देते है।
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मरीज सर्पदंश होने पर कभी न घबराएं
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्प दंश के शिकार मरीज को यदि समय से उपचार मिले, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन पूर्वांचल में अधिकांश लोग सर्प दंश होने पर अंधविश्वास की जद में आकर ओझा-सोखा और झाड़-फूंक के चक्कर में फंस जाते हैं। डॉ. अनिल कुमार की माने तो सांप काटने के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। ऐसे में सर्प दंश के बाद मरीज कत्तई न घबराए, क्योंकि घबराने पर शरीर में रक्त का संचार तेज होता है, ऐसे में जहर तेजी से रक्त में घुलने लगता है। दौड़े न कम चले, क्योंकि दौड़ने या तेज चलने पर भी शरीर में रक्त का संचरण तेज होता है। काटने वाले सांप पर फोकस करें, ताकि पता चल सकें डंसने वाला सांप किस प्रजाति का था, उसके दंश से कितना जहर शरीर में प्रविष्ट हुआ होगा।
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