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Mau News: निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो तेज होगा आंदोलन
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मऊ। संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में बिजलीकर्मियों ने निजीकरण सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। इस मौके पर संघर्ष समिति वरिष्ठ नेता सूर्यदेव पांडेय ने कहा कि भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं की समस्याओं और किसानों की परेशानियों को देखते हुए बृहस्पतिवार से प्रारंभ होने वाले अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार को स्थगित किया गया। लगातार नियमानुसार कार्य आंदोलन एवं असहयोग के साथ प्रतिदिन दोपहर दो बजे से पांच बजे तक विरोध सभा का आयोजन किया जाएगा।
उपभोक्ताओं को कोई परेशानी न हो इसके मद्देेनजर विद्युत आपूर्ति सेवा बाधित होने पर उसे पर तत्काल बहाल किया जाएगा। अस्पताल, रेलवे, पेयजल व ट्रांसपोर्ट आदि बुनियादी जरूरत उपभोक्ता सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। इस दौरान यदि पूर्वांचल वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के लिए अवैधानिक रूप से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की गई तो संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश के समस्त सदस्य तत्काल बिना किसी सूचना के अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे।
उच्च अधिकार समिति में यह भी निर्णय लिया कि उक्त शांतिपूर्ण ध्यान आकर्षण कार्यक्रम के कारण संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश के किसी भी सदस्य पर कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई तो इस समय संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश द्वारा आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। इस दौरान बिजलीकर्मी, अभियंता सहित कर्मचारी शामिल रहे।
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उपभोक्ताओं को कोई परेशानी न हो इसके मद्देेनजर विद्युत आपूर्ति सेवा बाधित होने पर उसे पर तत्काल बहाल किया जाएगा। अस्पताल, रेलवे, पेयजल व ट्रांसपोर्ट आदि बुनियादी जरूरत उपभोक्ता सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। इस दौरान यदि पूर्वांचल वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के लिए अवैधानिक रूप से टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की गई तो संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश के समस्त सदस्य तत्काल बिना किसी सूचना के अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे।
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उच्च अधिकार समिति में यह भी निर्णय लिया कि उक्त शांतिपूर्ण ध्यान आकर्षण कार्यक्रम के कारण संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश के किसी भी सदस्य पर कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई तो इस समय संयुक्त संघर्ष समिति (विद्युत कर्मचारी) उत्तर प्रदेश द्वारा आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। इस दौरान बिजलीकर्मी, अभियंता सहित कर्मचारी शामिल रहे।
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