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गर्मी का प्रकोप जारी, जनजीवन बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:41 PM IST
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गर्मी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहने से लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। आसमान में बादल देख किसान भी धूप की परवाह किए बगैर कटाई, मड़ाई में व्यस्त नजर आए। गर्मी से राहत के लिए लोग तरह तरह के विकल्प तलाशने लगे हैं। गर्मी से पशु पक्षी से लेकर आम जन बेहाल हैं।
अप्रैल माह में ही मई-जून जैसा तापमान हो गया है। ताल तलैये सूखने के कगार पर हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग सत्तू, बेल का शर्बत, आम का पन्ना, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन कर रहे हैं। वहीं बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए जिन पोखरों और नदियों में पानी है वहां जी भर के तैराकी के मजे लेते हुए गर्मी से राहत पाने का प्रयत्न कर रहे हैं। तालाबों और नदियों के किनारे पशु पक्षियों ने भी अपना डेरा डाल लिया है।
गर्मी से बचने के लिए लोग दोपहर में घर और आफिसों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। लड़कियां जहां धूप से बचने के लिए स्कार्फ और छतरी का इस्तेमाल कर रही हैं। बाजारों में भी दोपहर को सन्नाटा पसर जा रहा है। बहुत जरूरी होने पर ही लोग अपने घरों से निकल रहे हैं। इन्सान के साथ जीव जंतु भी ठौर की तलाश में पेड़ों के नीचे सुस्ताते दिख जा रहे हैं। धूप से बचने के लिए लोग छांव की तलाश कर रहे हैं। उधर आकाश में बादल देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही थी। धूप व गर्मी की परवाह किए बगैर खेतों में कटाई, मड़ाई करने में लगे रहे।
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अप्रैल माह में ही मई-जून जैसा तापमान हो गया है। ताल तलैये सूखने के कगार पर हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग सत्तू, बेल का शर्बत, आम का पन्ना, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन कर रहे हैं। वहीं बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए जिन पोखरों और नदियों में पानी है वहां जी भर के तैराकी के मजे लेते हुए गर्मी से राहत पाने का प्रयत्न कर रहे हैं। तालाबों और नदियों के किनारे पशु पक्षियों ने भी अपना डेरा डाल लिया है।
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गर्मी से बचने के लिए लोग दोपहर में घर और आफिसों से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। लड़कियां जहां धूप से बचने के लिए स्कार्फ और छतरी का इस्तेमाल कर रही हैं। बाजारों में भी दोपहर को सन्नाटा पसर जा रहा है। बहुत जरूरी होने पर ही लोग अपने घरों से निकल रहे हैं। इन्सान के साथ जीव जंतु भी ठौर की तलाश में पेड़ों के नीचे सुस्ताते दिख जा रहे हैं। धूप से बचने के लिए लोग छांव की तलाश कर रहे हैं। उधर आकाश में बादल देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही थी। धूप व गर्मी की परवाह किए बगैर खेतों में कटाई, मड़ाई करने में लगे रहे।
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