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Mau News: गुटखा-पान मसाला ने जकड़ा जबड़ा, रोज आ रहे छह पीड़ित

Wed, 23 Sep 2026 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:39 PM IST
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Gutkha and pan masala grip the jaw; six victims reporting daily.
कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग ने जबड़ा लॉक होने की समस्या का जांच करती दंत रोग विशेष
गुटखा, पान मसाला और तंबाकू की लत अब केवल अधेड़ उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र में इनका सेवन शुरू करने वाले युवाओं में भी इसके दुष्प्रभाव सामने आने लगे हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के दंत चिकित्सकों के पास रोज 10 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनका मुंह कम खुल रहा है। स्थिति बिगड़ने पर खाना चबाने और बड़े निवाले लेने तक में परेशानी होने लगती है।
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जिला अस्पताल के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी आर्या ने बताया कि हर दिन पांच से छह ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिनका जबड़ा लॉक हो चुका है। बताया कि गुटखा और पान मसाला में मौजूद तंबाकू एवं अन्य पदार्थों का लंबे समय तक सेवन मुंह के अंदर के ऊतकों को प्रभावित होने से ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसी गंभीर समस्या देखने को मिल रही है।
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बताया कि इससे मरीज के मुंह के अंदर के ऊतक धीरे-धीरे सख्त होने लगते हैं और मुंह खोलने की क्षमता कम हो सकती है। वहीं कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित दिवेदी के मुताबिक चिंता की बात यह है कि अब किशोरावस्था के बाद की कम उम्र और 20-30 वर्ष के युवा वर्ग में भी तंबाकू उत्पादों के सेवन की आदत देखने को मिल रही है। उनके यहां हर दिन ऐसे में छह से सात मामले आ रहे हैं, इसमें तीन से चार मामले युवाओं से जुड़े हैं जिनकी उम्र 35 वर्ष के अंदर के हैं।
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शुरू में होती है जलन
मऊ। मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती ने बताया इस समस्या की शुरुआत अक्सर मामूली लक्षणों से होती है। गुटखा या पान मसाला खाने पर मुंह में जलन होना, मसालेदार भोजन खाने में परेशानी, मुंह के अंदर खिंचाव महसूस होना और धीरे-धीरे मुंह कम खुलना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
केस-1 : भीटी निवासी एक युवा मरीज ने बताया कि उसकी उम्र 22 वर्ष है, उसने 16 वर्ष की उम्र में गुटखा खाना शुरू किया था। शुरुआत में उसे मुंह में जलन होती थी, कुछ समय बाद उसे मुंह खोलने में परेशानी होने लगी। जांच में मुंह खोलने की क्षमता कम मिली।

केस-2 : मधुबन निवासी 35 वर्षीय युवक ने बताया कि वह मुंबई में काम करता है। काम के दौरान गुटखा और पान मसाला खाने की आदत डाली थी। धीरे-धीरे सेवन दिन में कई बार तक पहुंच गया। अब उसे मुंह पूरी तरह खोलने में परेशानी होती है और बड़े निवाले लेने में भी दिक्कत होती है।
केस-3 : रानीपुर निवासी युवक ने बताया कि उसकी उम्र 28 वर्ष है। बीते डेढ़ माह से जलन की सामान्य समझता रहा। एक अन्य मरीज लंबे समय से गुटखा खा रहा था। कई महीनों से मुंह में जलन और मसालेदार भोजन खाने पर परेशानी थी, लेकिन उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बाद में मुंह खोलने में परेशानी बढ़ने लगी। चिकित्सक से जांच कराने पर समस्या का पता चला।

घाव या सफेद-लाल निशान को न करें नजरअंदाज
मऊ। डॉ. सीपी आर्या के अनुसार मुंह कम खुलना ही एकमात्र चेतावनी संकेत नहीं है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बा, लगातार जलन, दर्द, निगलने में परेशानी या आवाज में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। तंबाकू और गुटखा छोड़ना मुंह की गंभीर बीमारियों से बचाव की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। गुटखा-पान मसाला को केवल दांतों की खराबी से जोड़कर देखना सही नहीं है। लंबे समय तक सेवन मुंह के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और तंबाकू का सेवन मुंह के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।
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