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Mau News: सात वर्षों से अधूरा है राजकीय बालिका इंटर काॅलेज
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चिरैयाकोट। कस्बे से मात्र एक किमी दूर भिखमपुर गांव के मिडल स्कूल के पास एक हेक्टेअर से अधिक की जमीन में राजकीय बालिका इंटर काॅलेज का निर्माण सात वर्षों से अधूरा है। भवन बनाने की कवायद जुलाई 2016 में मुख्यमंत्री के निर्देश पर नाबार्ड ने निर्माण प्रारंभ किया। पूर्व सपा विधायक बैजनाथ पासवान ने 24 जुलाई 2016 में भूमिपूजन और शिलान्यास किया। क्षेत्र के लोगों का अपनी बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलवाने की आस जगी। कार्यदायी संस्था को जून 2018 में कार्य को पूरा करने का लक्ष्य दिया था। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण निर्माण आज तक अधूरा है। इससे क्षेत्र की छात्राओं और उनके अभिभावकों में उदासी छा गई। चिरैयाकोट के भिखमपुर गांव में राजकीय बालिका विद्यालय को बनने के लिए तीन करोड़ दो लाख की धनराशि आंवटित की गई थी। राजकीय बालिका विद्यालय का बाहरी और कुछ अंदर तक का कार्य पूरा हो चुका है। विद्यालय के निर्माण के लिए जो अवधि निर्धारित थी वह खत्म हो चुकी है। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कई आवश्यक कार्य को पूरा किए बिना छोड़ दिया गया है। आज उसमें गंदगी का अंबार है, कई जगहों पर तो फर्श और खिड़की टूट गई है। उसके आस-पास झाड़ियां उग आई हैं। काॅलेज में अभी विद्युत वायरिंग पानी दीवार का सुंदरीकरण, फर्नीचर आदि की कुछ भी व्यवस्था नहीं हुई है।
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गांव से मात्र एक किमी दूर बालिका विद्यालय खुलने से छात्राओं व अभिभावकों में उममीद जगी थी। विद्यालय समय से प्रारंभ न होने के कारण जो बच्चियां हाईस्कूल में हैं वह इसका लाभ नही ले पाएंगी।
- राकेश कुमार वर्मा
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हमारा गांव विद्यालय से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। विद्यालय बनने से उम्मीद जगी थी कि अब बच्चियों को दूर नहीं भेजना पड़ेगा। इससे हमारी आर्थिक व दूर भेजने में हो रही परेशानियों से छुटकारा मिल सकेगी। लेकिन विद्यालय के निर्माणाधीन पड़े रहने से उदासी है।
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- अरविंद कुमार मौर्य
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उम्मीद जागी कि बालिका विद्यालय बनने से मात्र शिक्षा ही सुलभ नहीं होगी बल्कि हमारे गांव का शैक्षिक वातावरण भी बदल जाएगा।
- इदरीस अंसारी
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क्षेत्र में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को होती है। सभी अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने में सक्षम नहीं हो पाता। विद्यालय के अधूरे कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
- अब्दुल बसर अंसारी
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गांव से मात्र एक किमी दूर बालिका विद्यालय खुलने से छात्राओं व अभिभावकों में उममीद जगी थी। विद्यालय समय से प्रारंभ न होने के कारण जो बच्चियां हाईस्कूल में हैं वह इसका लाभ नही ले पाएंगी।
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- राकेश कुमार वर्मा
हमारा गांव विद्यालय से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। विद्यालय बनने से उम्मीद जगी थी कि अब बच्चियों को दूर नहीं भेजना पड़ेगा। इससे हमारी आर्थिक व दूर भेजने में हो रही परेशानियों से छुटकारा मिल सकेगी। लेकिन विद्यालय के निर्माणाधीन पड़े रहने से उदासी है।
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- अरविंद कुमार मौर्य
उम्मीद जागी कि बालिका विद्यालय बनने से मात्र शिक्षा ही सुलभ नहीं होगी बल्कि हमारे गांव का शैक्षिक वातावरण भी बदल जाएगा।
- इदरीस अंसारी
क्षेत्र में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को होती है। सभी अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने में सक्षम नहीं हो पाता। विद्यालय के अधूरे कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
- अब्दुल बसर अंसारी