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घाघरा नदी स्थिर, कटान तेज
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:07 AM IST
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दोहरीघाट स्थित मुक्तिधाम के श्मशान घाट को काट रही घाघरा।
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घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी मुक्तिधाम के पास तथा खाकी बाबा के पास कटान तेज हो रही है। कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाकों सहित कस्बे की ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। घाघरा नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव से तटवर्ती इलाके के लोगों के लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता बढ़ती ही जा रही है।
बुधवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। जो कि मंगलवार को 69.90 मीटर पर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है। खतरा बिंदु पर नदी का जलस्तर पहुंचने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में खतरा बना हुआ है।
मुक्तिधाम के पास श्मशान घाट तथा खाकी बाबा कुटी के पास कटान जारी रहने से दोहरीघाट कस्बा के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई विभाग की ओर से बोरियों में ईट भरकर नदी में डंपिंग तो किया जा रहा है, लेकिन कटान को रोका नहीं जा सका है। कटान जारी रहने से नगर के ऐतिहासिक धरोहरे, मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर, डीह बाबा मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों के विलीन होने का खतरा बढ़ गया है।
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घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, बहादुरपुर, ताहिरपुर, बीवीपुर, गौरी डीह, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, पाउस, रसूलपुर, सूरजपुर आदि दर्जनों गांवों के मैदानी इलाके पानी घुस जाने से हजारों एकड़ फसल डूब गयी है। किसानों को फसन नष्ट होने की चिंता सताने लगी है।
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बुधवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। जो कि मंगलवार को 69.90 मीटर पर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है। खतरा बिंदु पर नदी का जलस्तर पहुंचने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में खतरा बना हुआ है।
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मुक्तिधाम के पास श्मशान घाट तथा खाकी बाबा कुटी के पास कटान जारी रहने से दोहरीघाट कस्बा के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई विभाग की ओर से बोरियों में ईट भरकर नदी में डंपिंग तो किया जा रहा है, लेकिन कटान को रोका नहीं जा सका है। कटान जारी रहने से नगर के ऐतिहासिक धरोहरे, मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर, डीह बाबा मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों के विलीन होने का खतरा बढ़ गया है।
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घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नौली, बहादुरपुर, ताहिरपुर, बीवीपुर, गौरी डीह, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, पाउस, रसूलपुर, सूरजपुर आदि दर्जनों गांवों के मैदानी इलाके पानी घुस जाने से हजारों एकड़ फसल डूब गयी है। किसानों को फसन नष्ट होने की चिंता सताने लगी है।