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मुक्तिधाम पर बढ़ा घाघरा का दबाव, ऐतिहासिक धरोहरों पर संकट

Thu, 13 Aug 2020 10:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 10:36 PM IST
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Ghaghra pressure increased on Muktidham, crisis on historical heritage in Mau
दोहरीघाट में उफनाई घाघरा नदी। - फोटो : MAU
दोहरीघाट। घाघरा का जलस्तर जैैसे-जैसे खतरे के निशान के ऊपर जा रहा है, वैसे-वैसे कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती जा रही हैं। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 20 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। घाघरा की तेज लहरें मुक्तिधाम स्थित भारत माता मंदिर और शवदाह स्थल से टकरा रही हैं। इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरा में पड़ गया है। घाघरा के उग्र रुप धारण करने से लोग दहशत में हैं।
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नदी का जलस्तर 20 सेमी की रफ्तार से बढ़ने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। घाघरा अब पूरी तरह से एक बार फिर अपने रौद्र रूप को धारण कर कहर बरपाने को आतुर दिख रही है। इससे नगर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही है। घाघरा की तेज लहरें मुक्तिधाम स्थित भारत माता मंदिर और शवदाह स्थल से टकरा रही है। नदी के पानी का दबाव भारत माता मंदिर पर बढ़ने से लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, संतोषी माता मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, खाकी बाबा की कुटी सहित तमाम ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से नवली, हरधौली, नई बाजार, गौरीडीह, बीबीपुर ताहिरपुर सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी मैदानी इलाकों में घुसने से लोग दहशत में जी रहे हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 70.60 मीटर रहा। बुधवार को नदी का जलस्तर 70.40 मीटर रहा। 24 घंटे में 20 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। भारत माता मंदिर की सुरक्षा में लगे बोल्डरों को नुकसान न हो इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा मरम्मत कार्य कराया गया है। मुक्तिधाम क्षेत्र में सिचाई विभाग की तरफ से कड़ी नजर रखी जा रही है। नदी में बाढ़ आने के चलते तटवर्ती इलाकों की जलमग्न हजारों एकड़ फसल नष्ट होने से पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। लेकिन अभी तक न तो प्रशासनिक अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधियों ने किसानों की सुधि ली।
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कस्बे में घुसने लगा बाढ़ का पानी
दोहरीघाट। घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ने से एक बार फिर कस्बे में घाघरा का पानी घुसना शुरू हो गया। कस्बे के मल्लाह टोला, दलित बस्ती, भगवान पुरा वार्ड के सैकड़ों लोगों में भय व्याप्त हो गया है। घाघरा के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों के साथ कस्बेवासियों को इसका दंश झेलना पड़ता है। नगर के बड़े नाले के रास्ते नदी का पानी कस्बे में घुसना शुरू हो गया।
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