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हजारों एकड़ जमीन को निगल चुकी है घाघरा

Sun, 16 Jul 2017 11:25 PM IST
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mau news Updated Sun, 16 Jul 2017 11:25 PM IST
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 Ghaghra has swallowed thousands of acres of land
दोहरीघाट में घाघरा नदी में आई बाढ़ के बाद ऊफनाई नदी।
मऊ।  घाघरा की विनाश लीला को रोकने के लिए की जा रही तमाम कवायद विभागीय उदासीनता के चलते बेअसर साबित हो रही है। बारिश होने के बाद घाघरा का तांडव जारी रहने से लोग दहशत में जी रहे हैं। दोहरीघाट कस्बा के मुक्तिधाम के पास शवदाह घाट का एक पिलर बह गया। दोहरीघाट क्षेत्र तथा मधुबन तहसील क्षेत्र में लगभग 2900 एकड़ उपजाऊ  जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। नदी के उग्र तेवर से     
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इससे प्राचीन धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है।
दोहरीघाट कस्बा के मुक्तिधाम को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ नौ करोड़ की लागत से 150 मीटर पीचिंग के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। बजट न मिलने से मामला ठंडे बस्ते में है। बचाव के नाम पर खानापूर्ति इतिश्री कर ली जा रही है। घाघरा में बाढ़ आने पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। लेकिन बाढ़ समस्या का स्थाई समाधान ढूंढा नहीं जा सका है।  घाघरा में बढ़ाव  मुक्तिधाम, भारतमाता सहित ऐतिहासिक धरोहरों को लीलने को बेताब दिख रही है। गत दिनों मुक्तिधाम के पास शवदाह घाट का एक पिलर नदी में विलीन हो गया था।
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 दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र में लगभग 2800 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। गत वर्ष मधुबन तहसील क्षेत्र केेे दुबारी, धर्मपुर, मोलनापुर सहित विभिन्न गांवों के 50 किसानों की 100 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई थी, बावजूद प्रशासन और सिंचाई विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
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नदी में प्रतिवर्ष बाढ़ आने से  नई बाजार, नौली, धनौली रामपुर, हरधौली, चिऊंटीडांड़ बुढावर, बहादुरपुर, बीबीपुर, अमीरा, चौराडीह, बेलौली, कोरौली, रसूलपुर, सूरजपुर सहित मधुबन तहसील के लोग प्रतिवर्ष बाढ़  की विभीषिका झेलने को विवश हैं। बाढ़ और कटान  झेलना इनकी आदत बन चुकी है। सब कुछ भगवान भरोसे छोड़कर गांववासी अपने भाग्य को कोसते रहते हैं।  कृषि भूमि न होने के कारण मधुबन तहसील के कटान पीड़ित लोग नौकरी, मजदूरी कर अपना गुजर बसर करने को विवश हैं। देवारे इलाके की हालत और भी खराब है। लोग देवारा इलाके में रिश्तेदारी करना भी मुनासिब नहीं समझते। देवारा इलाके में शिक्षा का प्रतिशत बहुत की कम है।             

      
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र पासवान का कहना है कि शवदाह घाट का पिलर  गिर गया था। कटान नहीं हो रही है।  मुक्तिधाम को बचाने के लिए बनाए जाने वाले प्रोजेक्ट को संशोधित कर शासन को भेजा जाएगा।
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