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घाघरा ने बदल दी कटान की दिशा
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:47 PM IST
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दोहरीघाट में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मुक्तिधाम की सीिढ़यों पर चढ़ा घाघरा नदी का पानी। अमर उजाला
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घाघरा नदी इस समय 32 वर्षों बाद नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित भूमि काट रही है। दोहरीघाट क्षेत्र में अभी कटान रुकी हुई है। इससे दोहरीघाट क्षेत्र के किसानों ने राहत महसूस की है। नदी का ऐसा रूप 32 वर्षो के बाद देखने को मिल रहा है। उत्तरी किनारे पर कटान शुरु होने से जिले के तटवर्ती इलाकों के किसानों को अनुमान है कि अब शायद नदी अपने पुराने मार्ग पर बहने लगे। और उनकी खोई जमीन फिर वापस मिल सके।
जानकारों का मानना है कि रामपुर धनौली के विपरीत दिशा में नदी के दूसरी तरफ तेजी से कटान हो रही है ।अगर यही हालत रही तो नदी की मुख्य धारा जो कभी गोरखपुर क्षेत्र में बहती थी अब फिर उसी ओर से बहना शुरु कर देगी। जिससे दोरहरीघाट क्षेत्र के तटवर्ती इलाको धनौली रामपुर, नईबाजार, चिउटीडाड, सरहरा के किसानो को अपनी खोयी जमीन मिल सकती है। इसके साथ ही दोहरीघाट कसबे पर मंडरा रहा खतरा टल जाएगा।
इस संबंध में जेई सुनील मिश्रा ने बताया कि ठोकर बनने से नदी की धारा मुड़ी है, अगर यही स्थिति रही तो चिउटीडाड धनौली रिंग बंधे से सट कर बहती थी भविष्य में फिर अपनी पुरानी धारा की ओर मुड़ सकती है। इससे जिले के तटवर्ती इलाकों के लोगो की नदी की घारा में विलीन हो चुकी हजारों एकड़ भूमि वापस मिलने कि सम्भावना बलवती हो गई है।
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जानकारों का मानना है कि रामपुर धनौली के विपरीत दिशा में नदी के दूसरी तरफ तेजी से कटान हो रही है ।अगर यही हालत रही तो नदी की मुख्य धारा जो कभी गोरखपुर क्षेत्र में बहती थी अब फिर उसी ओर से बहना शुरु कर देगी। जिससे दोरहरीघाट क्षेत्र के तटवर्ती इलाको धनौली रामपुर, नईबाजार, चिउटीडाड, सरहरा के किसानो को अपनी खोयी जमीन मिल सकती है। इसके साथ ही दोहरीघाट कसबे पर मंडरा रहा खतरा टल जाएगा।
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इस संबंध में जेई सुनील मिश्रा ने बताया कि ठोकर बनने से नदी की धारा मुड़ी है, अगर यही स्थिति रही तो चिउटीडाड धनौली रिंग बंधे से सट कर बहती थी भविष्य में फिर अपनी पुरानी धारा की ओर मुड़ सकती है। इससे जिले के तटवर्ती इलाकों के लोगो की नदी की घारा में विलीन हो चुकी हजारों एकड़ भूमि वापस मिलने कि सम्भावना बलवती हो गई है।
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