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फोरलेन के लिए काटे जाने लगे पेड़

Mon, 21 Mar 2016 12:03 AM IST
BEARU, AMAR UJALA, MAU
BEARU, AMAR UJALA, MAU Updated Mon, 21 Mar 2016 12:03 AM IST
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For four-lane cut the tree
दोहरीघाट थाना क्षेत्र के कुसुम्हा गांव के पास नेशनल हाइवे पर हो रही पेड़ो की कटाई।
गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग 29 को फोर लेन बनाने के लिए सड़क किनारे के पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि  गोरखपुर वाराणसी हाईवे के किनारे पेड़ों की कटाई का कार्य चल रहा है। जबकि लखनऊ-बलिया राजमार्ग पर 50 फीट तक के पेड़ों का चिह्नाकन किया जा रहा है। सड़क बनने के बाद फिर से इन क्षेत्रों को ग्रीन बेल्ट बनाने के लिए पौधरोपण आदि किया जाएगा। 
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जनपद में फोरलेन दोहरीघाट से गाजीपुर के बार्डर मटेहू के बगल से होकर गुजर रहा है। जिसपर 39 गांवों से अधिक के किसानों एवं मकान स्वामियों की भूमि पड़ रही है। जद में पड़ने वाली जमीनों को अधिग्रहित कर लिया गया है।
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इसके लिए शासन ने गजट भी निकालकर संबंधित किसानों का नाम प्रकाशित कर दिया है। प्रकाशन के बाद से ही किसान इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनकी जो जमीन सड़क में जा रही है उसका कितना मुआवजा किस रेट से मिलेगा। यही नहीं मकान आदि के बारे में भी किसानों में ऊहापोह की स्थिति है। इसे लेकर वह न सिर्फ भयभीत हैं बल्कि अपनी जमीन एवं मकान जाने से पीड़ा भी महसूस कर रहे हैं। इनमें कई तो भूमिहीन होने के कगार पर हैं। 
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नेशनल हाइवे किनारे पड़ने वाली जमीनों का गजट प्रकाशन होने के बाद किसानों में इस बात को लेकर रोष बढ़ रहा है कि आखिर उनके मकान एवं जमीन का मुआवजा रेट जल्द क्यों नहीं दिया जा रहा है और जो मुआवजा है उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।


किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं फोरलेन बनने की कवायद काफी दिनों से चल रही है। किसानेें की जमीन एवं उनके मकान तक नाप कर उन्हें एक्वायर कर लिया गया है लेकिन किसानों को यह तक अधिकार नहीं मिल पाया है कि उनकी जो संपत्ति जा रही है उसका मुआवजा क्या मिलेेगा, किस रेट से मिलेगा और कब मिलेेगा। कहा कि ऐसे किसान जो भूमिहीन हो जा रहे हैं आखिरी समय में मुआवजा मिलने के बाद कहीं जाकर बस भी न पाएंगे। 


दोहरीघाट के कुसुम्हा निवासी रामअशीष राय का कहना है कि उनकी 12 विस्वा जमीन सड़क किनारे थी जो सड़क में जा रही है।  नोटिस मिलने के बाद वह उसे जमा करने के लिए जिला मुख्यालय भी गए थे लेकिन उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं है।


यही हाल नौबत राय का भी है। उनकी 15 बिस्वा जमीन सड़क में जाने के चलते वह भूमिहीन होने हो जा रहे हैं। अभी तक मुआवजा न मिलने के चलते वह कहीं दूसरे स्थान पर अपना आशियाना भी नहीं ढूंढ़ सके हैं।



रामसूरत शर्मा की मेडिकल स्टोर की दुकान कुसुम्हा बाजार में पड़ रही है। वह भी अपने मुआवजे को लेकर परेशान हैं। वहीं झरख्ण्डी एवं हरिनाथ यादव बाजार के अस्तित्व खत्म होने के चलते रोजी रोटी को लेकर परेशान हैं कि वह बाद में क्या करेंगे। 
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