{"_id":"6a9c69d2048ebedfa202eecd","slug":"first-submerged-by-floods-now-gripped-by-infection-skin-disease-spreading-rapidly-in-about-10-villages-of-the-devranchal-region-for-the-past-15-days-mau-news-c-295-1-mau1001-151483-2026-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले बाढ़ ने डुबोया, अब संक्रमण ने घेरा : देवरांचल के करीब 10 गांवों में 15 दिनों से तेजी से फैल रहा चर्म रोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले बाढ़ ने डुबोया, अब संक्रमण ने घेरा : देवरांचल के करीब 10 गांवों में 15 दिनों से तेजी से फैल रहा चर्म रोग
विज्ञापन
दोहरीघाट में बढ़ा सरयू नदी का जलस्तर। संवाद
दुबारी। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और जिले में नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में पीड़ितों का बाढ़ का दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। मधुबन तहसील के देवरांचल के बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी घटने-बढ़ने के बीच पिछले 15 दिनों में चर्म रोग तेजी से फैलने लगा है। लगातार बाढ़ के पानी के संपर्क में रहने से ग्रामीणों के पैरों में खुजली, जलन और संक्रमण की शिकायत बढ़ गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या अधिक है। स्वास्थ्य विभाग भी चर्म रोग के मामलों में बढ़ोतरी की बात स्वीकार कर रहा है।
मधुबन तहसील के धर्मपुर विशुनपुरा, बिंदटोलिया और आसपास के करीब 10 गांवों में चर्म रोग के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। दुबारी पीएचसी में रोजाना 10 से 15 मरीज त्वचा संबंधी बीमारी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, फतेहपुर मंडाव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में इन दिनों त्वचा रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन आने वाले मरीजों में 20 से 30 मरीज चर्म रोग से पीड़ित मिल रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है।
बाढ़ के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भर जाने से मवेशियों के लिए चारा लाने के लिए भी ग्रामीणों को घुटने तक पानी में उतरना पड़ रहा है। लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने से पैरों की उंगलियों के बीच खुजली, जलन और संक्रमण की शिकायत बढ़ रही है।
विज्ञापन
गाजियापुर छावनी निवासी कमलेश चौहान (उम्र 45 वर्ष) ने बताया, घुटने भर बाढ़ के पानी से होकर रोज मवेशियों के लिए चारा लाना पड़ता है। तीन-चार दिनों से पैरों की उंगलियों के बीच में तेज खुजली हो रही है, जिसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है।
गाजियापुर के राम मिलन यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, नदी का जलस्तर गांव के चारों ओर आ चुका है। फसलें और हरा चारा पानी में डूब गया है। ऐसे में मवेशियों के लिए कम से कम दो बार तो पानी में हरा चारा लेने के लिए जाना पड़ता है। इससे पहले तो नहीं पता चला, लेकिन रात में इतनी तेज जलन होती है कि सो भी नहीं पाते।
फतेहपुर मंडाव सीएचसी के प्रभारी डॉक्टर राजीव पांडेय का कहना है कि चर्म रोग के मामले बढ़े हैं। इसको लेकर उपचार तो टीम कर रही है, साथ ही लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। बताया कि ठहरे हुए पानी में लंबे समय तक रहने के कारण फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से पनपता है। उपचार के साथ हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि जितना संभव हो, पानी में जाने से बचें। यदि पानी में जाना मजबूरी हो, तो वापस आकर पैरों को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। पैरों को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करें और सरसों का तेल या डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीफंगल क्रीम लगाएं। साथ ही बीमारी को नजरअंदाज न करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से दवा लें
विज्ञापन
मधुबन तहसील के धर्मपुर विशुनपुरा, बिंदटोलिया और आसपास के करीब 10 गांवों में चर्म रोग के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। दुबारी पीएचसी में रोजाना 10 से 15 मरीज त्वचा संबंधी बीमारी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, फतेहपुर मंडाव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में इन दिनों त्वचा रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन आने वाले मरीजों में 20 से 30 मरीज चर्म रोग से पीड़ित मिल रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है।
विज्ञापन
बाढ़ के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भर जाने से मवेशियों के लिए चारा लाने के लिए भी ग्रामीणों को घुटने तक पानी में उतरना पड़ रहा है। लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने से पैरों की उंगलियों के बीच खुजली, जलन और संक्रमण की शिकायत बढ़ रही है।
विज्ञापन
गाजियापुर छावनी निवासी कमलेश चौहान (उम्र 45 वर्ष) ने बताया, घुटने भर बाढ़ के पानी से होकर रोज मवेशियों के लिए चारा लाना पड़ता है। तीन-चार दिनों से पैरों की उंगलियों के बीच में तेज खुजली हो रही है, जिसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है।
गाजियापुर के राम मिलन यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, नदी का जलस्तर गांव के चारों ओर आ चुका है। फसलें और हरा चारा पानी में डूब गया है। ऐसे में मवेशियों के लिए कम से कम दो बार तो पानी में हरा चारा लेने के लिए जाना पड़ता है। इससे पहले तो नहीं पता चला, लेकिन रात में इतनी तेज जलन होती है कि सो भी नहीं पाते।
फतेहपुर मंडाव सीएचसी के प्रभारी डॉक्टर राजीव पांडेय का कहना है कि चर्म रोग के मामले बढ़े हैं। इसको लेकर उपचार तो टीम कर रही है, साथ ही लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। बताया कि ठहरे हुए पानी में लंबे समय तक रहने के कारण फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से पनपता है। उपचार के साथ हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि जितना संभव हो, पानी में जाने से बचें। यदि पानी में जाना मजबूरी हो, तो वापस आकर पैरों को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। पैरों को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करें और सरसों का तेल या डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीफंगल क्रीम लगाएं। साथ ही बीमारी को नजरअंदाज न करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से दवा लें