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प्रत्याशी परदेशी वोटरों को भेज रहे ट्रेनों बसों का किराए
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घोसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद प्रत्याशी ग्रामीण वोटरों के साथ ही परदेशी वोटरों को लुभाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत चुनाव के चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद प्रत्याशी परदेशी वोटरों के आने और जाने के लिए रेल के टिकटों का आरक्षण करा रहे हैं और कुछ लोग महानगरों में रहने वाले मतदाताओं को बसों के किराए के साथ कुछ और और रुपये भेज रहे हैं। जिससे मतदाता भी कहते नजर आ रहे हैं कि यही हमदर्दी और नमस्ते बंदगी सदैव बनी रहती तो जनता के सामने वोट मांगने की जरूरत नहीं होती।
अब प्रत्याशी अपने प्रचार प्रसार का माध्यम अब घर घर जाकर वोट मांगने व होर्डिंग पोस्टर के स्थान के साथ ही वाट्स एप एवं फेसबुक , इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। वाट्स एप एवं फेसबुक पर तेजी से प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कुछ गांवों की स्थिति इनसे अलग भी है ।गाँवों में प्रत्याशी और उनके समर्थकों द्वारा अपने विश्वास पात्र लोगों तक पहुंच कर अपने वोटर को सहेजने के साथ उनकी मनुहार की जा रही है। इसमें कोई जाति तो कोई क्षेत्र तो कोई विकास का सहारा ले रहा है । गली चट्टी चौराहों पर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशियों के जितने हारने की चर्चाएं की जा रही है । अपने अपने दृष्टिकोण से मतदाता भी अपने भावी प्रत्याशियों के गुण एवं दोषों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि उनके क्षेत्र का विकास पांच वर्षों तक सही हाथों में आ जाए। अब देखना है कि मतदाता किसके ऊपर कितना विश्वास करते हैं। यह तो आने वाले दो मई को ही पता चलेगा।
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ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत चुनाव के चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद प्रत्याशी परदेशी वोटरों के आने और जाने के लिए रेल के टिकटों का आरक्षण करा रहे हैं और कुछ लोग महानगरों में रहने वाले मतदाताओं को बसों के किराए के साथ कुछ और और रुपये भेज रहे हैं। जिससे मतदाता भी कहते नजर आ रहे हैं कि यही हमदर्दी और नमस्ते बंदगी सदैव बनी रहती तो जनता के सामने वोट मांगने की जरूरत नहीं होती।
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अब प्रत्याशी अपने प्रचार प्रसार का माध्यम अब घर घर जाकर वोट मांगने व होर्डिंग पोस्टर के स्थान के साथ ही वाट्स एप एवं फेसबुक , इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। वाट्स एप एवं फेसबुक पर तेजी से प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कुछ गांवों की स्थिति इनसे अलग भी है ।गाँवों में प्रत्याशी और उनके समर्थकों द्वारा अपने विश्वास पात्र लोगों तक पहुंच कर अपने वोटर को सहेजने के साथ उनकी मनुहार की जा रही है। इसमें कोई जाति तो कोई क्षेत्र तो कोई विकास का सहारा ले रहा है । गली चट्टी चौराहों पर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशियों के जितने हारने की चर्चाएं की जा रही है । अपने अपने दृष्टिकोण से मतदाता भी अपने भावी प्रत्याशियों के गुण एवं दोषों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि उनके क्षेत्र का विकास पांच वर्षों तक सही हाथों में आ जाए। अब देखना है कि मतदाता किसके ऊपर कितना विश्वास करते हैं। यह तो आने वाले दो मई को ही पता चलेगा।
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