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सत्यापन न होने से 469 आवेदकों को मदद नहीं
mau
Updated Fri, 17 Mar 2017 11:30 PM IST
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शासन द्वारा गरीबों की बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही के चलते वापस लौटने की नौबत आ गई है। शासन की ओर से गुरुवार की शाम आए पत्र में 20 मार्च तक सत्यापन वाले लाभार्थियों को दी जाने वाली रकम को छोड़कर शेष धनराशि 21 को वापस करने का फारमान दिया गया है। इस पत्र के बाद चारों तहसीलों के एसडीएम और नौ ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारियों के यहां सत्यापन के लिए लटके 469 आवेदकों को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।
शादी अनुदान योजना में ओबीसी में कुल 1342 आवेदकों ने आनलाइन आवेदन किया है। इस मद में अभी 95 लाख रुपये विभाग के पास है। पूरे जिले में इनमें से एसडीएम और बीडीओ की ओर से महज 744 आवेदन सत्यापित होकर आ गए हैं। जबकि 129 आवेदन निरस्त भी कर दिए गए हैं। लेकिन 469 आवेदन अभी सत्यापित नहीं किए गए है। 744 आवेदनों में से 138 आवेदन लखनऊ से पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) स्तर पर लंबित है।
जबकि 606 आवेदन पीएफएमउस से सत्यापित होकर आ गए हैं। इन आवेदकों को योजना का लाभ पाने के लिए विधायकों और सांसद की बैठक होनी है लेकिन आचार संहिता लागू हो जाने के बाद यह बैठक नहीं हो पाई है। अब मार्च महीने में चंद ही दिन बाकी हैं। देखना है कि शासन से कोई गाइडलाइन आती है अथवा इस बैठक के अभाव में इन लाभार्थियों को योजना के लाभ से वंचित रह जाना पड़ सकता है। इस वित्तीय वर्ष में महज 375 आवेदकों को योजना का लाभ दिया जा सका है।
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शादी अनुदान योजना में ओबीसी में कुल 1342 आवेदकों ने आनलाइन आवेदन किया है। इस मद में अभी 95 लाख रुपये विभाग के पास है। पूरे जिले में इनमें से एसडीएम और बीडीओ की ओर से महज 744 आवेदन सत्यापित होकर आ गए हैं। जबकि 129 आवेदन निरस्त भी कर दिए गए हैं। लेकिन 469 आवेदन अभी सत्यापित नहीं किए गए है। 744 आवेदनों में से 138 आवेदन लखनऊ से पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) स्तर पर लंबित है।
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जबकि 606 आवेदन पीएफएमउस से सत्यापित होकर आ गए हैं। इन आवेदकों को योजना का लाभ पाने के लिए विधायकों और सांसद की बैठक होनी है लेकिन आचार संहिता लागू हो जाने के बाद यह बैठक नहीं हो पाई है। अब मार्च महीने में चंद ही दिन बाकी हैं। देखना है कि शासन से कोई गाइडलाइन आती है अथवा इस बैठक के अभाव में इन लाभार्थियों को योजना के लाभ से वंचित रह जाना पड़ सकता है। इस वित्तीय वर्ष में महज 375 आवेदकों को योजना का लाभ दिया जा सका है।
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