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जिला अस्पताल की सुविधा: मशीन भी मौजूद चिकित्सक, फिर भी नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड

Thu, 22 Jul 2021 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 10:51 PM IST
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District Hospital Facility: Machine also present doctor, still ultrasound is not happening
मऊ। संक्रमण की तीसरी लहर से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जितने दावे
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किए जा रहे वो कागजी साबित हो रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों की
चिकित्सीय सुविधाएं ही बयां कर रही हैं। ऐसी ही स्थिति जिले के सबसे बड़े
सरकारी जिला अस्पताल में देखने को मिल रही है। यहां करीब पांच माह पूर्व
रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है, लेकिन आज तक एक भी
अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो सकी है। ऐसा नहीं है कि मशीन नहीं है, बल्कि हर
सुविधा होने के बाद भी रेडियोलाजिस्ट के नियमित नहीं बैठने से सिटी
स्कैन, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज परेशान हो रहे हैं। दूसरी तरफ
जिले में 52 से ज्यादा सरकारी अस्पतालों में केवल जिला अस्पताल में
रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने से यहां आने वाले मरीजों की संख्या में
इजाफा हो चुका है, लेकिन यहां पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल प्रबंधन की
उदासीनता के चलते बाहर जांच कराने को बाध्य होना पड़ रहा है।
संक्रमण की दूसरी लहर का ग्राफ कम होने के बाद वर्तमान में जिला अस्पताल
में प्रतिदिन 400 से 500 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 100 से 120 मरीज ऐसे
होते हैं जिनकी सिटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासांउड जांच की जरूरत होती है।
इसमें 30-40 मरीज मेडिको लीगल वाले होते हैं। सूत्रों की मानें तो बीते
मार्च माह से अब तक एक भी अल्ट्रासांउड जांच नहीं हुई है। हालांकि मेडिको
लीगल की जांच हो रही है।बताते चले कि जिला अस्पताल में जून 2018 से ही
रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली था। यहां रेडियोलाजिस्ट ओपी शर्मा के ट्रांसफर
होने के बाद यह पद रिक्त चल रहा था। इसकी वजह से मेडिको लीगल वाले मरीजों
को सीटी स्कैन के लिए आजमगढ़ और एक्सरे के लिए बलिया रेफर किया जाता था।
गर्भवती महिलाओं को निजी पैथालॉजी सेंटर में अधिक अल्ट्रासाउंड कराना
पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए बीते मार्च माह में रेडियोलॉजिस्ट डॉ.
नवीनचंद्र सिंह को तैनात किया गया।लेकिन इनके द्वारा मशीन की खराबी का
दावा कर नहीं बैठने से जांच प्रभावित हो रही है।जबकि महिला जिला अस्पताल
में भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते वहां आनी वाली जरुरतमंद महिला मरीज
नि:शुल्क जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रही है। लेकिन यहां
चिकित्सक के नहीं बैठने से उन्हें बाहर प्राइवेट में जांच कराने को बाध्य
होना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि कई मरीज इसकी शिकायत सीएमएस डॉ.
बृजकुमार से नहीं किए। लेकिन उनके द्वारा मरीजों की बातों को सुनकर
आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन न तो वह खुद उस पर अमल करते है न ही
तैनात रेडियोलॉजिस्ट। लेकिन इस उदासीनता तथा मनमानी का खमियाजा मरीजों को
उठना पड़ रहा है।
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