जाम नालों से बढ़ी नगर में गंदगी, लोग परेशान
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नगरपालिका की आबादी लगभग तीन लाख है। जिसका पूरा अपशिष्ट तमसा नदी में बह कर जाता है। लेकिन हाल यह है कि न तो तमसा की सफाई पर ध्यान दिया जा रहा। न ही शहर में नालों की सफाई और गंदगी निस्तारण पर पालिका का ध्यान है। शहर की नालों की सफाई में लगभग एक महीने से ज्यादा का समय लगता है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई का कार्य शुरू न कराए जाने से जल निकासी की समस्या गहराती जा रही है।
नगर के इमिलिया, निजामुद्दीनपुरा सहित कई मोहल्लों में नालों का निर्माण तक नहीं कराया गया है। जहां पर सबसे ज्यादा जलजमाव होता है। वहीं निजामुद्दीनपुरा, मुंशीपुरा, दर्जन राय मुहल्ला, महरनिया दुक्षिण टोला, बंधा रोड सहित दर्जनों मोहल्लों में सार्वजनिक नालियां जाम हैं। जाम नालियों में स्लाटर हाउस का खून व मलबा गिरने से मोहल्लेवासियों को दुर्गंध के बीच एक-एक पल बिताना भारी पड़ रहा है।
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिला मंत्री सुरेश कल्यानिया, पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी, पंकज शर्मा, सुरेंद्र प्रसाद का कहना है कि नालों तथा सार्वजनिक नालियों के जाम होने से दुर्गंध उठ रही है। इससे आना जाना मुश्किल हो रहा है। इसी तरह निजामुद्दीनपुरा के विनोद कुमार पांडेय, कमलेश प्रसाद, श्रवण कुमार का कहना है कि नाले का निर्माण न होने से छोटी नालियां जाम हो जाती हैं। बरसात में तो नारकीय जीवन जीना पड़ता है।
इस बाबत पालिकाध्यक्ष शाहीना अरशद जमाल का कहना है कि जल निकासी के लिए नालों का निर्माण कार्य चल रहा है। बरसात के पूर्व नालों तथा सार्वजनिक नालियों की सफाई करा दी जाएगी। सफाईकर्मियों की कमी से समस्या आ रही है।
जाम नालों से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा हो सकता है। डा.ए के गुप्ता ने बताया कि पानी और कूड़ा जहां पर जमा होता है। वहां गंदगी के साथ साथ तमात तरह की बीमारियां भी जन्म लेतीं हैँं। मलेरिया, टायफाइड, जुखाम, आदि रोगों का खतरा बढ़ जाता है।इनका निदान होना चाहिए और नालों की बराबर साफ सफाई अनिवार्य है। इसके सफाई पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।